100% सुन नहीं सकते हरियाणा के बैंक मैनेजर, फिर भी 130 KM पैदल चलकर पहुंचे एवरेस्ट बेस कैंप

हरियाणा के करनाल में रहने वाले पंजाब नेशनल बैंक के चीफ मैनेजर प्रदीप मुंडेजा सात साल की उम्र से सुनने में असमर्थ हैं. इसके बावजूद उन्होंने नेपाल में करीब 130 किलोमीटर का कठिन ट्रेक पूरा कर एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने का सपना पूरा किया. जानिए उनकी कहानी.

Advertisement
प्रदीप मुंडेजा हरियाणा के करनाल में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में चीफ मैनेजर के पद पर काम करते हैं. ( Photo: LinkedIN/ Pradeep Mundeja) प्रदीप मुंडेजा हरियाणा के करनाल में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में चीफ मैनेजर के पद पर काम करते हैं. ( Photo: LinkedIN/ Pradeep Mundeja)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:15 PM IST

हरियाणा के करनाल में रहने वाले बैंक मैनेजर प्रदीप मुंडेजा ने ऐसा कारनामा किया है, जो कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. प्रदीप सात साल की उम्र से सुन नहीं सकते, लेकिन उन्होंने अपनी इस परेशानी को सपनों के रास्ते में नहीं आने दिया. उन्होंने नेपाल में स्थित एवरेस्ट बेस कैंप तक करीब 130 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की. उनकी यह उपलब्धि बताती है कि अगर इंसान किसी लक्ष्य को पाने की ठान ले, तो मुश्किलों के बावजूद आगे बढ़ सकता है.

प्रदीप मुंडेजा हरियाणा के करनाल में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में चीफ मैनेजर के पद पर काम करते हैं. वह सात साल की उम्र से पूरी तरह सुनने में असमर्थ हैं. इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन में फिटनेस और एडवेंचर को खास जगह दी है. प्रदीप ने साबित किया है कि किसी व्यक्ति की शारीरिक परेशानी उसके सपनों को पूरा करने में रुकावट नहीं बननी चाहिए. वह लंबे समय से साइकिल चलाने और दौड़ने जैसी एक्टिविटी में हिस्सा लेते रहे हैं. उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें दिव्यांगजनों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

Advertisement



130 किलोमीटर का सफर तय करना आसान नहीं था
नेपाल में स्थित एवरेस्ट बेस कैंप समुद्र तल से करीब 5,364 मीटर की ऊंचाई पर है. यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को पहाड़ों के कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है. जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है. इसके अलावा कड़ाके की ठंड, बर्फ और मौसम में अचानक बदलाव जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है. प्रदीप ने इन सभी मुश्किलों के बीच करीब 130 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की. उन्होंने इस सफर के लिए कई महीनों तक तैयारी और ट्रेनिंग की थी. उन्होंने 5 से 17 अक्टूबर 2026 के बीच यह अभियान पूरा किया. इस दौरान उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचकर पंजाब नेशनल बैंक का झंडा भी फहराया.

परिवार और टीम ने दिया साथ
प्रदीप ने इस यात्रा की योजना भारत में रहते हुए खुद बनाई थी. इसके बाद उन्होंने पुणे के एक ट्रेकिंग ग्रुप के साथ इस सफर को पूरा किया. पहाड़ों पर लंबे समय तक पैदल चलना, मुश्किल चढ़ाई चढ़ना और ठंड में खुद को संभालना किसी के लिए भी आसान नहीं होता. ऐसे में प्रदीप की उपलब्धि और खास हो जाती है. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, साथ काम करने वाले लोगों, ट्रेकिंग टीम और पंजाब नेशनल बैंक से मिले सहयोग को दिया. उनके इस कारनामे पर बैंक ने भी खुशी जताई और इसे अपने लिए गर्व का पल बताया.

'सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती'
प्रदीप की इस यात्रा की सबसे खास बात उनका नजरिया है. उनका मानना है कि सपनों को पूरा करने की कोई उम्र या समय सीमा नहीं होती. सही तैयारी, लगातार मेहनत और पहला कदम उठाने की हिम्मत हो, तो मुश्किल दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं. प्रदीप की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी परेशानी या कमजोरी के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं. उन्होंने दिखाया कि मंजिल तक पहुंचने के लिए सिर्फ शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि हिम्मत, धैर्य और खुद पर भरोसा भी जरूरी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »