बोमा पहाड़ पर पांव रखा तो 500 रुपये जुर्माना!

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में एक ऐसी पहाड़ी है, जिस पर ग्रामीण किसी को पैर भी नहीं रखने देते. बोमा नामक एक ऐसा पहाड़ है, जिस पर चढ़ना तो दूर, पैर रखना भी प्रतिबंधित है.

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aajtak.in

  • रायपुर,
  • 19 मई 2014,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में एक ऐसी पहाड़ी है, जिस पर ग्रामीण किसी को पैर भी नहीं रखने देते. बोमा नामक एक ऐसा पहाड़ है, जिस पर चढ़ना तो दूर, पैर रखना भी प्रतिबंधित है.

जो व्यक्ति यह नियम तोड़ता है, उस पर नेलगुड़ा के ग्रामीण 500 रुपये तक का जुर्माना करते हैं. बस्तर में बोमा का मतलब वक्ष होता है और बोमा पहाड़ी को इस क्षेत्र के ग्रामीण धरती माता का वक्ष मानते हैं.

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सूबे के दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर इंद्रावती नदी के किनारे बोमा नामक पहाड़ है. इस पहाड़ का शिखर बिल्कुल वक्ष की तरह है. इस पहाड़ी के शिखर पर चढ़ना तो दूर शिखर के नीचे भी ग्रामीण पैर नहीं रखते. इस क्षेत्र के ग्रामीण छोटे तुमनार की महागौरी और नेलगुड़ा के जंगल में स्थापित गंगनादई की दुर्लभ मूर्तियों की सैकड़ों वर्षों से पूजा करते आ रहे हैं.

छोटे तुमनार के माता मंदिर (महागौरी मंदिर) के पुजारी परमानंद बताते हैं कि क्षेत्र के बारसूर, समलूर, नेलगुड़ा, छोटे तुमनार, बड़ेतुमनार, केतुलनार, मिरतूर आदि गांवों में 10-11वीं शताब्दी की पुरानी मूर्तियां हैं. इनकी आराधना ग्रामीण अपनी मान्यताओं के अनुसार करते आ रहे हैं. इस क्षेत्र के आदिवासी प्रकृति उपासक भी हैं.

प्रात: स्मरण श्‍लोक में वर्णित है कि समुद्रवसने देवि! पर्वतस्तनमंडले। विष्णुपत्नि! नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व में॥ अर्थात- हे सागररूपी वस्त्र पहनी हुई देवी, पर्वत जिसके स्तनमंडल हैं, ऐसी विष्णु की पत्नी (पृथ्वी) मैं तुम्हें नमस्कार करता हूं. पैरों से छूने के दोष के लिए आप मुझे क्षमा करें.

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पुजारी ने बताया कि क्षेत्रवासी वक्ष रूपी बोमा पहाड़ी को पवित्र मानते आए हैं, इसलिए पहाड़ी के शिखर पर चढ़ना तो दूर लकड़ी आदि के लिए इस पहाड़ पर पैर भी नहीं रखते. गुमलनार के रामदेव और वनमाली बताते हैं कि पर्वत शिखरों को पृथ्वी का वक्ष मानने के कारण इन्हें पवित्र माना जाता है. पवित्र स्थल मानने के कारण ही आमतौर पर शिखरों में देवियों के मंदिर स्थापित किए जाते हैं.

नेलगुड़ा के मनीराम यादव बताते हैं कि बोमा पहाड़ी पर लोगों के जाने पर पारंपरिक प्रतिबंध के चलते यह पहाड़ी क्षेत्र वनौषधियों और वन्य प्राणियों का प्राकृतिक वास भी है. लकड़ी और शिकार के लिए बोमा पहाड़ी पर जाने वाले कुछ ग्रामीणों पर पूर्व में अर्थदंड लगाया जा चुका है.

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