'मुझे उससे ज्यादा जीना है...' 30 किलो घटाया, दर्द में भी रेस पूरी की, पिता की कहानी वायरल

53 साल के देवांग गांधी ने अपने बेटे रुद्र के लिए अपनी जिंदगी बदल दी. 18 महीनों में 30 किलो वजन घटाया और फिर दर्द के बावजूद हाइरॉक्स रेस पूरी की. उनका मकसद खुद को फिट बनाना नहीं, बल्कि बेटे की जिंदगीभर देखभाल करने के लिए मजबूत बने रहना था.

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 इस वीडियो पर हजारों लोगों ने भावुक प्रतिक्रियाएं दीं (Photos: sportslab.mu/Instagram) इस वीडियो पर हजारों लोगों ने भावुक प्रतिक्रियाएं दीं (Photos: sportslab.mu/Instagram)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:44 PM IST

ज्यादातर एथलीटों के लिए हाइरॉक्स रेस पूरी करना शारीरिक सहनशक्ति की परीक्षा होती है. लेकिन 53 साल के देवांग गांधी के लिए मुंबई में फिनिश लाइन तक पहुंचना सिर्फ एक रेस पूरी करना नहीं था. उनके पीछे एक ऐसी वजह थी, जिसने उन्हें अपनी फिटनेस पूरी तरह बदलने के लिए प्रेरित किया. देवांग अपने खास बेटे रुद्र की जिंदगीभर देखभाल करने के लिए खुद को मजबूत रखना चाहते हैं.हाइरॉक्स रेस एक तरह की इंडोर फिटनेस प्रतियोगिता है, जिसमें दौड़ और अलग-अलग तरह की शारीरिक एक्सरसाइज को एक साथ कराया जाता है.

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देवांग ने 2024 में अपनी फिटनेस जर्नी शुरू की. इसके बाद अगले 18 महीनों में उन्होंने 30 किलो वजन कम किया. उनकी कहानी मास्टर्स यूनियन के स्पोर्ट्स लैब ने एक वीडियो में दर्ज की, जिसे इंस्टाग्राम पर अब तक 17 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

अपनी लाइफस्टाइल बदलने की वजह बताते हुए देवांग ने कहा कि उनके बेटे की जरूरतों ने उन्हें भविष्य के बारे में अलग तरह से सोचने पर मजबूर किया. उन्होंने कहा, "मुझे उससे ज्यादा जीना है. मुझे उससे ज्यादा जीना है ताकि मैं उसकी देखभाल कर सकूं." इसके बाद उन्होंने अपनी फिटनेस जर्नी को लेकर कहा, "ये सफर मेरे लिए नहीं है, ये मेरे बेटे रुद्र के लिए है."

देखें वीडियो

इसी सोच ने उन्हें अपनी पहली हाइरॉक्स रेस तक पहुंचाया. वीडियो के नैरेटर के मुताबिक, देवांग सिर्फ खुद को बेहतर और फिट बनाने के लिए मेहनत नहीं कर रहे थे, बल्कि उनका मकसद लंबे समय तक अपने बेटे की देखभाल करने में सक्षम रहना था.

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हाइरॉक्स खुद को "द वर्ल्ड सीरीज ऑफ फिटनेस रेसिंग" कहता है. यह एक मानकीकृत इनडोर प्रतियोगिता है, जिसमें 8 किलोमीटर की दौड़ के साथ आठ अलग-अलग तरह के वर्कआउट स्टेशन शामिल होते हैं. इसमें खिलाड़ी 1 किलोमीटर दौड़ते हैं और फिर एक वर्कआउट स्टेशन पूरा करते हैं. यह क्रम आठ बार दोहराया जाता है.इन स्टेशनों में स्कीएर्ग, स्लेड पुश, स्लेड पुल, बर्पी ब्रॉड जंप्स, रोइंग, फार्मर्स कैरी, सैंडबैग लंजेस और वॉल बॉल्स शामिल हैं.

हालांकि, रेस के दौरान देवांग के पैर में तेज क्रैम्प आ गया. उन्हें मेडिकल रूम ले जाया गया और उन्हें आगे रेस जारी न रखने की सलाह दी गई. इस दौरान यह साफ नहीं था कि वह दोबारा रेस में लौटेंगे या नहीं.

दर्द के बावजूद पिता ने रेस पूरी की.

लेकिन देवांग आखिरकार दर्द के बावजूद वापस आए और रेस पूरी की. वीडियो के नैरेटर ने कहा कि बेहद थके होने और काफी दर्द में होने के बावजूद देवांग ने अपनी पूरी ताकत सिर्फ एक मकसद के लिए लगाई और अपने बेटे रुद्र के लिए रेस पूरी की.

वीडियो के कैप्शन में देवांग को एक "बहुत खास मिशन" वाला पिता बताया गया, जिसका एकमात्र लक्ष्य अपने खास बेटे के लिए हमेशा मौजूद रहना था. वीडियो के अंत में लिखा गया, "टू रुद्र!"

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इस वीडियो पर हजारों लोगों ने भावुक प्रतिक्रियाएं दीं. लोगों ने देवांग और रुद्र के लिए संदेश लिखे और दर्द के बावजूद रेस पूरी करने के उनके फैसले पर प्रतिक्रिया दी. देवांग ने भी वायरल वीडियो पर कमेंट करते हुए अपनी कहानी रिकॉर्ड करने के लिए टीम का शुक्रिया अदा किया.

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