दिल्ली की सड़कों पर सुबह के करीब 4 बजे एक कैब में सफर कर रहे शख्स ने ऐसा नजारा देखा, जिसने उसे अंदर तक प्रभावित कर दिया. आमतौर पर इस समय ज्यादातर लोग अपने घरों में सो रहे होते हैं, लेकिन एक कैब ड्राइवर अपनी ड्यूटी के साथ-साथ कुछ नया सीखने में लगा था. वह अपने फोन पर चैटजीपीटी की मदद से इंग्लिश सीख रहा था. बाद में यात्री को पता चला कि इसके पीछे सिर्फ इंग्लिश सीखने की इच्छा नहीं, बल्कि अपनी बेटी के बेहतर भविष्य का सपना था.
यह कहानी मैनेजमेंट कंसल्टेंट तुषार जेजानी ने सोशल मीडिया पर शेयर की है. उन्होंने बताया कि वह नई दिल्ली में करीब सुबह 4:13 बजे एक कैब में सवार हुए थे. सड़कें लगभग खाली थीं और शहर का ज्यादातर हिस्सा नींद में था. इसी दौरान उनकी नजर कैब ड्राइवर पर गई, जो फोन पर इंग्लिश में बात कर रहा था. शुरुआत में तुषार को थोड़ी चिंता हुई. उन्हें लगा कि शायद ड्राइवर किसी दूसरे व्यक्ति से उनकी यात्रा और लोकेशन के बारे में बात कर रहा है. इसलिए उन्होंने ध्यान से उसकी बातचीत सुननी शुरू की. लेकिन कुछ देर बाद उन्हें समझ आया कि मामला कुछ और ही था. ड्राइवर किसी से सामान्य बातचीत नहीं कर रहा था, बल्कि इंग्लिश सीखने की कोशिश कर रहा था.
ड्राइवर ने यात्री से भी की बातचीत
ड्राइवर ने जब देखा कि यात्री थोड़ा असहज महसूस कर रहा है तो उसने खुद बातचीत शुरू कर दी. उसने पूछा- सर, आप कहां जा रहे हैं? तुषार ने जवाब दिया कि वह बेंगलुरु जा रहे हैं. इसके बाद ड्राइवर ने पूछा कि यह सफर काम के सिलसिले में है या पर्सनल वजह से. तुषार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उनका सफर हमेशा काम के लिए ही होता है. दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई. इसी बातचीत के दौरान तुषार को अंदाजा हुआ कि ड्राइवर इंग्लिश बोलने की अपनी क्षमता बेहतर करने की कोशिश कर रहा था.
इस घटना की सबसे खास बात यह थी कि ड्राइवर सिर्फ रोजी-रोटी के लिए कैब नहीं चला रहा था. वह अपने खाली समय में खुद को बेहतर बनाने की कोशिश भी कर रहा था. जब ज्यादातर लोग उस समय सो रहे थे, तब वह इंग्लिश सीखने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर रहा था. तुषार ने बताया कि उस वक्त उन्हें महसूस हुआ कि ड्राइवर सिर्फ एक नई भाषा नहीं सीख रहा था. वह अपनी जिंदगी में कुछ बदलने की कोशिश कर रहा था. उसकी मेहनत के पीछे उसकी बेटी का भविष्य जुड़ा हुआ था.
बेटी के लिए बेहतर भविष्य बनाना चाहता था
तुषार के मुताबिक, इस मुलाकात ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने महसूस किया कि ड्राइवर इंग्लिश सीखकर केवल अपनी नौकरी या कमाई बेहतर करने की कोशिश नहीं कर रहा था. वह अपनी बेटी को जिंदगी में बेहतर मौके देना चाहता था. एक पिता का यह सपना बेहद साधारण था, लेकिन उसकी कोशिश बहुत बड़ी थी. वह शायद यह चाहता था कि उसकी बेटी को वे मुश्किलें न झेलनी पड़े, जिनका सामना उसे खुद करना पड़ा. इसलिए वह उम्र या समय की परवाह किए बिना नई चीज सीख रहा था.
कहानी ने सोशल मीडिया पर जीता लोगों का दिल
तुषार ने जब इस घटना को सोशल मीडिया पर शेयर किया तो लोगों ने इसे खूब पसंद किया. कहानी इसलिए भी लोगों को छू गई क्योंकि इसमें किसी बड़ी उपलब्धि या करोड़ों रुपये की कमाई की बात नहीं थी. इसमें एक आम इंसान की मेहनत, सीखने की इच्छा और अपने बच्चे के लिए बेहतर भविष्य बनाने का सपना था. यह घटना एक छोटी लेकिन बड़ी सीख भी देती है. जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती. अगर सीखने की इच्छा हो तो इंसान अपने पास मौजूद साधनों से भी शुरुआत कर सकता है.
दिल्ली की उस शांत सड़क पर सुबह करीब 4 बजे कैब चला रहा वह ड्राइवर शायद किसी को दिखाई भी नहीं दे रहा था. लेकिन वह चुपचाप अपनी जिंदगी बदलने की कोशिश कर रहा था. उसकी इंग्लिश सीखने की कोशिश सिर्फ एक भाषा सीखने की कहानी नहीं थी. यह एक पिता के उस सपने की कहानी थी, जिसमें वह अपनी बेटी के लिए उससे बेहतर भविष्य बनाना चाहता है.
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