समुद्र में 200 KM दूर छोड़ा... मगर फिर तैरकर इंसानों के पास पहुंची, दिल छू लेगी इस सील की कहानी

एक सील को जब समुद्र में छोड़ दिया गया, तो वह कुछ दिनों के बाद फिर से इंसानों के बीच वापस आ गई. काफी दिनों तक इंसानों के साथ रहने की वजह से सील सुरक्षित महसूस करने लगी.

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बार- बार इंसानों के पास लौटकर आ जाती है एक सील (Photo - Pexels) बार- बार इंसानों के पास लौटकर आ जाती है एक सील (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:21 PM IST

किसी जानवर को अगर जंगल या समुद्र में छोड़ दिया जाए तो आमतौर पर यही उम्मीद होती है कि वह अपने प्राकृतिक माहौल में घुल-मिल जाएगा. लेकिन चीन में एक सील की कहानी कुछ अलग है. उसे खुले समुद्र में छोड़ने के बाद वह करीब 200 किलोमीटर तैरकर वापस उसी द्वीप पर पहुंच गई, जहां उसने इंसानों के बीच लंबा वक्त बिताया था.

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इस सील का नाम है - नाना. सोशल मीडिया पर नाना के वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं. उसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं, क्योंकि माना जा रहा है कि लंबे समय तक इंसानों की देखभाल में रहने के कारण नाना के मन में इंसानों को लेकर सुरक्षा की भावना बन गई है.

समुद्र में छोड़ा, फिर 6 दिन बाद वापस लौट आई
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नाना करीब दो साल की है. उसे 7 सितंबर को खुले समुद्र में छोड़ा गया था. लेकिन महज छह दिन बाद यानी 13 सितंबर को वह दोबारा डाचांगशान आइलैंड के किनारे नजर आई.

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि नाना ने वहां तक पहुंचने के लिए करीब 200 किलोमीटर का सफर तैरकर तय किया था. नाना के शरीर पर एक ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया था. 

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इसी की मदद से विशेषज्ञों को पता चला कि वह समुद्र में कई द्वीपों के पास से गुजरते हुए वापस डाचांगशान आइलैंड पहुंची. वहां के मछुआरों ने जब उसे देखा तो पाया कि इतनी लंबी दूरी तैरने के बाद नाना पहले की तुलना में काफी दुबली हो गई थी.

इंसानों से नहीं डरती थी नाना
नाना की कहानी आज की नहीं है. वह इससे पहले भी इंसानों के बीच रहने को लेकर चर्चा में आ चुकी है. जून में नाना ने लोगों का ध्यान खींचा था, क्योंकि वह इंसानों से बिल्कुल नहीं डरती थी. बल्कि डाचांगशान आइलैंड पर आने वाले लोगों के आसपास रहना और उनसे संपर्क करना उसे पसंद था.

दरअसल, नाना को पहली बार सितंबर 2024 में एक तूफान के बाद चीन के गुआंग्शी झुआंग स्वायत्त क्षेत्र के समुद्र तट पर पाया गया था. उस समय वह सिर्फ कुछ महीने की थी और उसके शरीर पर कई चोटें थीं. स्थानीय अधिकारियों ने उसकी देखभाल शुरू की. लोगों ने भी उसे प्यार से नाना नाम दिया.

नाना को ठीक करने और उसे दोबारा जंगली जीवन के लिए तैयार करने में काफी समय लगा. नवंबर 2025 में उसे लियाओनिंग प्रांतीय इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन फिशरीज साइंसेज के समुद्री जीव संरक्षण केंद्र में भेजा गया. वहां उसे समुद्र में खुद रहने के लिए ट्रेनिंग दी गई.

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इसके बाद अप्रैल में समुद्री जीव विशेषज्ञों ने नाना समेत पांच सील को समुद्र में छोड़ने की कोशिश की. उन्हें सैनशान आइलैंड के पास समुद्र में छोड़ा गया, जो डाचांगशान आइलैंड से करीब 110 किलोमीटर दूर है.

बाकी सील समुद्र में मौजूद जंगली सीलों के समूह में शामिल हो गईं. लेकिन नाना ने ऐसा नहीं किया. वह दोबारा डाचांगशान आइलैंड पर पहुंच गई और वहां इंसानी गतिविधियों के बीच रहने लगी.

एक्सपर्ट बोले- इंसानों को सुरक्षा से जोड़ चुकी है नाना
अब सवाल उठता है कि आखिर नाना बार-बार इंसानों के पास ही क्यों लौटती है? डालियान ओशन यूनिवर्सिटी के समुद्री पर्यावरण शोधकर्ता वांग शिन ने मीडिया से बातचीत में इसकी एक वजह बताई. उनके मुताबिक, नाना को लंबे समय तक इंसानों ने पाला और उसकी देखभाल की. ऐसे में उसके दिमाग में इंसानों और सुरक्षित माहौल के बीच एक संबंध बन गया होगा.

यानी नाना के लिए इंसानों के आसपास रहना डर की बजाय सुरक्षा से जुड़ा हो सकता है. यही वजह है कि उसने खुले समुद्र में जाने के बाद भी वापस उसी जगह लौटने का फैसला किया, जहां वह पहले काफी समय बिता चुकी थी.

वांग के मुताबिक, डाचांगशान आइलैंड भी नाना के लिए उपयुक्त जगह है. यहां पानी साफ है, मछलियां और झींगे पर्याप्त मात्रा में हैं और समुद्र के किनारे रेतीले इलाके भी हैं.

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अब नाना को न खिलाने की अपील
नाना की कहानी लोगों का दिल जरूर जीत रही है, लेकिन स्थानीय प्रशासन नहीं चाहता कि लोग उसे अपने आसपास बुलाएं या खाना खिलाएं.अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि नाना के पास न जाएं, उसे खाना न दें और उसे परेशान न करें.

प्रशासन का कहना है कि नाना अभी भी जंगली माहौल में रहने की आदत डाल रही है. भले ही वह इंसानों से नहीं डरती, लेकिन अगर लोग उसे घेरेंगे, उसके पीछे भागेंगे या उसे लगातार परेशान करेंगे तो वह तनाव में आ सकती है.

सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर नाना इंसानों के दिए खाने पर निर्भर हो गई तो उसके लिए दोबारा पूरी तरह जंगली जीवन में लौटना मुश्किल हो सकता है. इसीलिए प्रशासन ने फिलहाल 'न दखल, न खाना' की नीति अपनाई है.

नाना की कहानी चीन के सोशल मीडिया पर भी खूब पसंद की जा रही है. लोग उसके वापस लौटने को इंसानों के साथ उसके रिश्ते से जोड़कर देख रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि अगर नाना को डाचांगशान आइलैंड पसंद है तो उसे दोबारा कहीं और ले जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

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हालांकि, नाना को लेकर प्रशासन का रुख साफ है. वह उसके व्यवहार को नियंत्रित नहीं करना चाहता और न ही उसकी कहानी का इस्तेमाल सिर्फ प्रचार के लिए करना चाहता है. लियाओनिंग के चांगहाई काउंटी प्रशासन ने नाना की सुरक्षा और उसके बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट भी बनाया है.

अब नाना समुद्र और इंसानों के बीच अपने इस अनोखे सफर के कारण लोगों के बीच चर्चा में है. करीब 200 किलोमीटर तैरकर वापस लौटने वाली इस सील की कहानी ने यह जरूर दिखा दिया है कि इंसानों की देखभाल और यादों का असर जानवरों के व्यवहार पर कितना गहरा हो सकता है.

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