सोचिए, जिस मां की गोद में आपने बचपन बिताया, जिसने आपको चलना सिखाया, पढ़ाया-लिखाया और हर मुश्किल में आपका साथ दिया, एक दिन पता चले कि वह आपकी असली मां ही नहीं है. ऐसा सुनना किसी फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन चीन में दो महिलाओं के साथ यही हुआ. जन्म के समय अस्पताल में हुई एक बड़ी लापरवाही की वजह से दोनों नवजात बच्चियां बदल गईं. इसके बाद 37 साल तक किसी को इस गलती का पता नहीं चला. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि दोनों परिवार इतने सालों तक सिर्फ 4 किलोमीटर की दूरी पर रहते रहे, लेकिन कभी यह नहीं जान पाए कि उनकी असली बेटी पास ही किसी दूसरे घर में रह रही है.
यह मामला चीन के हुबेई प्रांत का है. दोनों महिलाओं का जन्म एक ही अस्पताल में लगभग एक ही समय हुआ था. अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही के कारण दोनों बच्चियों को गलत परिवारों के हवाले कर दिया गया. इसके बाद दोनों परिवारों ने उन्हें अपनी ही बेटी समझकर पाला. किसी को कभी इस बात का अंदाजा तक नहीं हुआ कि जिस बच्ची को वे अपना खून समझ रहे हैं, वह किसी और की संतान है.
दोनों की जिंदगी अपनी-अपनी राह पर चलती रही
समय बीतता गया, दोनों लड़कियां बड़ी हुईं. पढ़ाई की, नौकरी की और बाद में शादी करके अपने-अपने परिवार बसाए. 37 साल तक सब कुछ सामान्य चलता रहा. किसी के मन में यह सवाल भी नहीं आया कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सच अभी सामने आना बाकी है. कहते हैं कि सच चाहे जितना छिप जाए, एक दिन सामने आ ही जाता है. ऐसा ही हुआ, जब एक महिला को अपने परिवार को लेकर कुछ बातें अजीब लगने लगीं. शक दूर करने के लिए उसने डीएनए टेस्ट कराया.
रिपोर्ट सामने आई तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. जांच में पता चला कि जिन लोगों को वह 37 साल से अपने माता-पिता मान रही थी, वे उसके असली माता-पिता नहीं हैं. इसके बाद दूसरी महिला का भी डीएनए टेस्ट कराया गया. तब पूरी सच्चाई सामने आ गई कि जन्म के समय दोनों बच्चियां बदल गई थीं. सच्चाई सामने आने के बाद दोनों परिवार पहली बार आमने-सामने आए. यह पल बेहद भावुक था. असली मां अपनी बेटी को देखकर फूट-फूटकर रो पड़ी. दूसरी ओर, जिन माता-पिता ने 37 साल तक बेटियों को पाल-पोसकर बड़ा किया था, उनके लिए भी यह किसी सदमे से कम नहीं था. दोनों महिलाओं की आंखों में भी खुशी और दर्द एक साथ था. एक तरफ उन्हें अपने असली माता-पिता मिल गए थे, तो दूसरी तरफ उन लोगों से बिछड़ने का डर था, जिन्होंने उन्हें पूरी जिंदगी प्यार दिया.
इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि दोनों परिवार इतने सालों तक सिर्फ 4 किलोमीटर की दूरी पर रहते रहे. कई बार वे शायद एक ही बाजार, सड़क या इलाके से गुजरे होंगे, लेकिन उन्हें कभी पता नहीं चला कि उनकी असली बेटी या असली मां उनसे कुछ ही मिनटों की दूरी पर है. अगर अस्पताल की गलती समय रहते सामने आ जाती, तो शायद 37 साल का यह दर्द और इंतजार नहीं झेलना पड़ता.
पालने वाले माता-पिता को नहीं छोड़ेंगी बेटियां
सच्चाई जानने के बाद दोनों महिलाओं ने साफ कहा कि वे अपने पालने वाले माता-पिता का साथ कभी नहीं छोड़ेंगी. उनका कहना है कि जन्म देने वाले माता-पिता अपनी जगह हैं, लेकिन जिन्होंने उन्हें बचपन से प्यार दिया, हर मुश्किल में साथ दिया और उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया, उनका रिश्ता भी उतना ही अनमोल है. दोनों महिलाओं ने यह भी कहा कि अब वे अपने असली माता-पिता के साथ भी नया रिश्ता बनाएंगी, ताकि जिंदगी के बचे हुए साल साथ बिताए जा सकें.
यह घटना सिर्फ दो महिलाओं की कहानी नहीं है, बल्कि अस्पतालों में बरती जाने वाली लापरवाही का बड़ा उदाहरण भी है. जन्म के समय हुई एक छोटी-सी गलती ने दो परिवारों से उनकी असली बेटियों का बचपन छीन लिया. हालांकि 37 साल बाद सच सामने आ गया, लेकिन बीते हुए साल कभी वापस नहीं आ सकते.
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