Muling Village Himachal: अटल टनल पार करते ही मिलेगी जन्नत जैसी शांति, हिमाचल के इस खूबसूरत रिमोट गांव में बिताएं अपनी छुट्टियां

मनाली की भीड़ से दूर हिमाचल प्रदेश के मुलिंग गांव में प्रकृति और सुकून का मजा लें. लाहौल घाटी में बसा यह गांव पारंपरिक घरों, खूबसूरत पहाड़ी नजारों, स्थानीय संस्कृति और तारों भरे आसमान के लिए अट्रैक्टिव हो सकता है. जानें यहां कैसे पहुंचें और घूमने के दौरान क्या-क्या करें.

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लाहौल-स्पीति के पास मुलांग गांव स्थित है. (PHOTO:ITG) लाहौल-स्पीति के पास मुलांग गांव स्थित है. (PHOTO:ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

Muling Village Himachal Pradesh: अगर आप हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में कुछ दिन सुकून से बिताना चाहते हैं, लेकिन मनाली की भीड़भाड़ से दूर रहना चाहते हैं, तो लाहौल घाटी के इस रिमोट गांव की सैर कर सकते हैं. पहाड़ों के बीच बसा यह गांव अपनी शांत वादियों, पारंपरिक घरों और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए खास है. यहां आपको बड़े शहरों जैसी भागदौड़ नहीं, बल्कि पहाड़ों के बीच सुकून से समय बिताने का मौका मिलेगा.

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हिमाचल प्रदेश का मुलिंग गांव उन लोगों को पसंद आ सकता है, जिन्हें घूमने के दौरान सिर्फ मशहूर जगहों पर तस्वीरें खिंचवाना नहीं, बल्कि लोकल संस्कृति को करीब से जानना भी अच्छा लगता है. यहां गांव की गलियों में घूमने, आसपास के प्राकृतिक नजारों को देखने और खुले आसमान के नीचे समय बिताने का अलग ही एक्सपीरियंस मिल सकता है. अपनी ऑफिस लाइफ से दूर कुछ सुकून के पल बिताने के लिए यह जगह एकदम बेस्ट रहने वाली है, जहां आपको जिंदगी भर के लिए कुछ शानदार यादें भी मिलेगीं. 

कहां है मुलिंग गांव?

मुलिंग हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में स्थित एक छोटा-सा गांव है. यहां पहुंचने के लिए मनाली से अटल टनल पार करके सिस्सू की ओर जाना पड़ता है. रास्ते में ऊंचे पहाड़, घाटी के नजारे और बदलता प्राकृतिक वातावरण सफर को खास बना देते हैं. अगर आप हिमाचल की किसी शांत जगह पर घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो मुलिंग को अपनी बकेट लिस्ट में शामिल कर सकते हैं.

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कैसे पहुंचें मुलिंग गांव?

मुलिंग पहुंचने के लिए मनाली से सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया जा सकता है. मनाली से अटल टनल होते हुए सिस्सू पहुंचे. जानकारी के मुताबिक, मनाली से मुलिंग की दूरी करीब 45 किलोमीटर और सफर में लगभग डेढ़ घंटे लग सकते हैं. सिस्सू मुलिंग के नजदीक पड़ता है, यहां से आगे जाने के लिए लोकल टैक्सी करके मुलिंग गांव पहुंचा जा सकता है. हालांकि, वास्तविक दूरी और समय आपके शुरुआती स्थान, सड़क की स्थिति और मौसम पर डिपेंड करता है.  इसलिए, यहां जाने से पहले स्थानीय सड़क की स्थिति, मौसम और आने-जाने के साधनों की जानकारी जरूर ले लें.

मुलिंग में क्या-क्या कर सकते हैं?

1. गांव की गलियों में घूमने का लें मजा

मुलिंग में घूमने का सबसे अच्छा तरीका है यहां की गलियों में पैदल समय बिताना. गांव में पारंपरिक हिमाचली शैली के मिट्टी और लकड़ी से बने घर देखने को मिल सकते हैं. इन घरों की बनावट और आसपास का प्राकृतिक वातावरण आपको लाहौल की स्थानीय जीवनशैली को समझने का मौका देगा. हालांकि, किसी के घर या निजी संपत्ति की तस्वीर लेने से पहले परमिशन जरूर लें.

2. सेब और खुबानी के बगीचे देखें

लाहौल घाटी में मौसम के अनुसार सेब और खुबानी के बगीचे देखने को मिल सकते हैं. वसंत और गर्मियों के दौरान इन बगीचों के आसपास का नजारा बेहद खास हो सकता है. फोटोग्राफी पसंद करने वाले लोगों के लिए भी यह जगह अच्छी हो सकती है. 

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3. स्थानीय मठों में जानें लाहौल की संस्कृति

लाहौल घाटी की संस्कृति पर बौद्ध परंपराओं का गहरा असर है. आसपास के छोटे मठों में जाकर आप स्थानीय धार्मिक परंपराओं और शांत वातावरण को करीब से महसूस कर सकते हैं. मठ में एंट्री करते समय वहां के नियमों का पालन करें और पूजा या धार्मिक एक्टिविटीज के दौरान शांति बनाए रखें.

4. प्रकृति के बीच करें सैर

अगर आपको ट्रेकिंग और पहाड़ों पर पैदल घूमना पसंद है, तो मुलिंग के आसपास के रास्तों और घाटी के नजारों को एक्सप्लोर कर सकते हैं. यहां की नेचुरल ब्यूटी देखने के लिए लंबी ट्रेकिंग करना जरूरी नहीं है. छोटी-छोटी सैर भी आपकी यात्रा को यादगार बना सकती हैं. अनजान रास्तों पर अकेले जाने से बचें और मौसम की जानकारी लेकर ही निकलें.

5. रात में देखें तारों से भरा आसमान

शहरों की रोशनी से दूर होने के कारण लाहौल घाटी के कुछ इलाकों में रात के समय आसमान साफ होने पर तारे देखने का अच्छा अनुभव मिल सकता है. मुलिंग में भी मौसम अनुकूल रहने पर आप खुले आसमान के नीचे कुछ समय बिता सकते हैं. इसके लिए रोशनी से दूर सुरक्षित जगह चुनें और रात में गांव से बहुत दूर जाने से बचें.

6. चखें हिमाचल के लोकल फूड

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किसी भी जगह की यात्रा वहां के खानपान के बिना अधूरी लग सकती है. मुलिंग या आसपास के स्थानीय होमस्टे में उपलब्धता के अनुसार थुकपा, मोमोज और सिड्डू जैसे पकवान चख सकते हैं. स्थानीय परिवारों के साथ रहने का मौका मिले, तो वहां के पारंपरिक खानपान और रहन-सहन के बारे में भी जान सकते हैं.

मुलिंग घूमने जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

मुलिंग जैसे छोटे पहाड़ी गांव की यात्रा पर जाने से पहले ठहरने की जगह और आने-जाने के गाड़ी पहले से बुक कर लें. हर समय सार्वजनिक परिवहन या खाने-पीने की दुकानें मौजू हों, यह जरूरी नहीं है. ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े साथ रखें और पहाड़ी मौसम को ध्यान में रखते हुए ट्रिप प्लान करें. 

 

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