Ancient Historical Monuments: 1000 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं भारत की ये 9 इमारतें, आज भी कायम है इनकी शान

Ancient Historical Monuments: भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक स्मारक हैं जो 1000 साल से भी ज्यादा पुराने होने के बावजूद आज तक अपनी खूबसूरती और भव्यता के लिए मशहूर हैं. सांची के स्तूप से लेकर एलोरा के कैलाश मंदिर तक, इनकी अनोखी बनावट और बारीक नक्काशी प्राचीन भारत की कला और वास्तुकला की झलक दिखाती है.

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सदियों पुरानी बेमिसाल खूबसूरती (photo- ITG) सदियों पुरानी बेमिसाल खूबसूरती (photo- ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:30 PM IST

Ancient Historical Monuments: भारत में घूमने के लिए ऐसी कई जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ सदियों पुराने इतिहास के लिए भी जानी जाती हैं. यहां बने प्राचीन मंदिर, विशाल स्तूप और चट्टानों को काटकर तैयार की गई गुफाएं भारतीय कला और वास्तुकला की शानदार मिसाल हैं. खास बात यह है कि इनमें से कई स्मारक 1000 साल से भी ज्यादा पुराने हैं लेकिन आज भी अपनी भव्यता और अनोखी बनावट से लोगों को हैरान कर देते हैं.

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इनकी दीवारों पर बनी नक्काशी, ऊंचे शिखर और बारीक कलाकारी उस दौर के कारीगरों की कुशलता को दिखाती है. अगर आपको इतिहास जानने और नई जगहें घूमने का शौक है तो भारत के इन ऐतिहासिक स्मारकों के बारे में जरूर जानना चाहिए. इनमें से कुछ धार्मिक आस्था के बड़े केंद्र हैं तो कुछ अपनी अनोखी बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण दुनिया भर में मशहूर हैं. आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही 8 ऐतिहासिक स्मारकों के बारे में.

सांची का महान स्तूप, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में स्थित सांची का महान स्तूप भारत के सबसे पुराने बौद्ध स्मारकों में से एक है. इसका निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक के शासनकाल में शुरू हुआ था. इस स्तूप को भगवान बुद्ध से जुड़ी धरोहरों के संरक्षण के लिए जाना जाता है. इसके प्रवेश द्वारों पर की गई बारीक नक्काशी पर्यटकों को आकर्षित करती है. यह जगह बौद्ध धर्म के इतिहास और प्राचीन भारतीय कला को करीब से समझने का मौका देती है.

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शोर मंदिर, महाबलीपुरम, तमिलनाडु
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में बना शोर मंदिर आठवीं शताब्दी का है. इसका निर्माण पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय के शासनकाल में कराया गया था. बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी पत्थरों से बनी खूबसूरत संरचना के लिए जाना जाता है. इसे दक्षिण भारत के शुरुआती पत्थर से बने मंदिरों में गिना जाता है. यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह मंदिर प्राचीन भारतीय वास्तुकला का शानदार उदाहरण है.

कैलाश मंदिर, एलोरा, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के एलोरा में स्थित कैलाश मंदिर अपनी अनोखी बनावट के लिए मशहूर है. आठवीं शताब्दी में बने इस मंदिर को एक ही विशाल चट्टान को काटकर तैयार किया गया था. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी बनावट कैलाश पर्वत से प्रेरित मानी जाती है. मंदिर की दीवारों, स्तंभों और मूर्तियों पर की गई नक्काशी प्राचीन कारीगरों की कुशलता दिखाती है. इतनी बड़ी चट्टान को काटकर मंदिर तैयार करना उस दौर की अद्भुत इंजीनियरिंग का उदाहरण है.

खजुराहो के मंदिर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश के शासनकाल में लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच हुआ था. ये मंदिर अपनी बारीक मूर्तियों और शानदार नक्काशी के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं. यहां देवी-देवताओं, नर्तकों और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े कई दृश्य पत्थरों पर उकेरे गए हैं. इन मंदिरों की कला भारतीय संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और उस दौर की जीवनशैली की झलक दिखाती है. पहले यहां करीब 85 मंदिर थे, जिनमें से लगभग 25 आज भी मौजूद हैं.

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बराबर की गुफाएं, बिहार
बिहार में स्थित बराबर की गुफाएं भारत की सबसे पुरानी चट्टानों को काटकर बनाई गई संरचनाओं में गिनी जाती हैं. इनका निर्माण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य काल के दौरान हुआ था. इन गुफाओं का इस्तेमाल आजीवक संप्रदाय के लोग करते थे. यहां की सबसे खास बात इसकी ग्रेनाइट की दीवारों और अंदरूनी हिस्सों की चिकनी चमकदार सतह है. बिना आधुनिक मशीनों के उस दौर में इतनी सटीक कारीगरी करना प्राचीन भारत की तकनीकी समझ को दिखाता है.

बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु के तंजावुर में बना बृहदेश्वर मंदिर करीब 1010 ईस्वी में चोल सम्राट राजराज प्रथम के शासनकाल में पूरा हुआ था. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अपनी विशाल संरचना के लिए जाना जाता है. इसका ऊंचा विमान यानी मुख्य शिखर दूर से ही दिखाई देता है. मंदिर परिसर में नंदी की विशाल प्रतिमा भी मौजूद है. एक हजार साल से ज्यादा पुराना होने के बावजूद यहां आज भी पूजा-अर्चना होती है.

लिंगराज मंदिर, ओडिशा
ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है. यह भगवान शिव को समर्पित है और कलिंग वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है. मंदिर का ऊंचा शिखर और परिसर में बने छोटे-छोटे मंदिर इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं. पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी इसे खास बनाती है. धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर ओडिशा की प्राचीन कला और स्थापत्य शैली को भी दर्शाता है.

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विरुपाक्ष मंदिर, हम्पी, कर्नाटक
कर्नाटक के हम्पी में स्थित विरुपाक्ष मंदिर की शुरुआत सातवीं शताब्दी के आसपास मानी जाती है. यह भगवान शिव के विरुपाक्ष स्वरूप को समर्पित है. मंदिर का ऊंचा प्रवेश द्वार, विशाल स्तंभों वाले मंडप और बारीक मूर्तियां इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं. विजयनगर साम्राज्य के दौर में इस मंदिर का विस्तार हुआ था. खास बात यह है कि सदियों से यहां पूजा-अर्चना होती आ रही है. यह मंदिर हम्पी की ऐतिहासिक पहचान का अहम हिस्सा है.

बादामी की गुफाएं, कर्नाटक
कर्नाटक के बादामी में स्थित गुफा मंदिर छठी और सातवीं शताब्दी के बीच बनाए गए थे. इन्हें चालुक्य राजवंश के दौर की शानदार वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है. लाल बलुआ पत्थर की चट्टानों को काटकर बनाई गई इन चार गुफाओं में हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी मूर्तियां देखने को मिलती हैं. यहां भगवान शिव के नटराज स्वरूप और भगवान विष्णु की अलग-अलग मूर्तियां खास आकर्षण हैं. 

क्यों खास हैं भारत के ये प्राचीन स्मारक?
भारत के ये ऐतिहासिक स्मारक सिर्फ घूमने की जगहें नहीं हैं, बल्कि देश के पुराने इतिहास, धार्मिक परंपराओं और कला-कौशल को समझने का जरिया भी हैं. इनकी बनावट और नक्काशी बताती है कि सदियों पहले भी कारीगर कितनी कुशलता से पत्थरों पर काम करते थे. अगर आपको इतिहास और प्राचीन वास्तुकला में दिलचस्पी है, तो ये जगहें आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल हो सकती हैं.

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ध्यान दें: इन स्मारकों की उम्र और निर्माण से जुड़ी तारीखें ऐतिहासिक अनुमानों और उपलब्ध विवरणों पर आधारित हैं. 

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