16 साल की लड़की ने बनाई स्मार्ट ईयररिंग, खतरा होते ही पुलिस को मिलेगा अलर्ट

16 साल की छात्रा ने ऐसी स्मार्ट ईयररिंग तैयार की है, जो मुसीबत में फंसी महिलाओं के लिए साइलेंट सेफ्टी डिवाइस की तरह काम कर सकती है. इसमें छिपा बटन, कैमरा और GPS जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है.

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आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 06 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:21 PM IST

आजकल टेक्नोलॉजी सिर्फ फोन, लैपटॉप या स्मार्टवॉच तक सीमित नहीं रह गई है. अब इसका इस्तेमाल लोगों की सेफ्टी के लिए भी किया जा रहा है. इसी कड़ी में 2020 में दक्षिण अफ्रीका की 16 साल की छात्रा Bohlale Mphahlele ने ऐसा डिवाइस तैयार किया था, जो मुश्किल समय में काफी काम आ सकता है. एक ऐसी स्मार्ट ईयररिंग का प्रोटोटाइप तैयार किया था, जो देखने में आम ईयररिंग जैसी लगती है, लेकिन खतरे के समय यह चुपचाप मदद लेने का जरिया बन सकती है.

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खतरा महसूस होते ही काम आएगी ईयररिंग

मान लीजिए कोई व्यक्ति आपको परेशान कर रहा है या अचानक ऐसी स्थिति बन गई जहां फोन निकालना मुश्किल है. ऐसे समय में सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है कि आखिर मदद के लिए किसी को बताया कैसे जाए.

इसी प्रॉब्लम को ध्यान में रखते हुए इस स्मार्ट ईयररिंग को तैयार किया गया है. इसमें एक छोटा बटन दिया गया है, जिसे जरूरत पड़ने पर दबाया जा सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए फोन निकालकर किसी को कॉल करने की जरूरत नहीं होगी.

बटन दबाने के बाद डिवाइस सेफ्टी से जुड़े अलर्ट को एक्टिव करने के लिए डिजाइन की गई है. इसमें कैमरे का इस्तेमाल हमला करने वाले  की तस्वीर क्लिक करने के लिए किया जा सकता है. साथ ही इसमें GPS जैसी टेक्नोलॉजी का कॉन्सेप्ट भी शामिल है, जिससे यूजर की लोकेशन का पता लगाने में मदद मिल सकती है.

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बिना किसी को बताए मांग सकेंगे मदद

इस डिवाइस की सबसे खास बात यही है कि इसे इस तरह बनाया गया है कि मुश्किल समय में यूजर को ज्यादा हलचल न करनी पड़े. कई बार किसी खतरे की स्थिति में फोन निकालना या किसी को कॉल करना खुद खतरा बढ़ा सकता है.

ऐसे में कान में पहले से लगी ईयररिंग के जरिए मदद का सिग्नल भेजने का आइडिया काफी अलग है. सामने वाले व्यक्ति को भी तुरंत पता नहीं चलेगा कि यूजर ने मदद के लिए अलर्ट किया है.

छात्रा ने क्यों बनाया ये डिवाइस?

Bohlale ने यह प्रोजेक्ट महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा को ध्यान में रखकर तैयार किया. उनका मकसद ऐसी टेक्नोलॉजी बनाना था, जो किसी मुश्किल स्थिति में फंसे व्यक्ति को जल्दी मदद दिलाने में काम आ सके.

इस प्रोजेक्ट को दक्षिण अफ्रीका के Eskom Expo for Young Scientists में भी पेश किया गया था. वहां इसे इंजीनियरिंग-इलेक्ट्रॉनिक्स और एम्बेडेड सिस्टम कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल मिला.

फिलहाल यह डिवाइस प्रोटोटाइप स्टेज पर है और इसे लेकर आगे और काम किया जा सकता है. लेकिन 16 साल की उम्र में ऐसा आइडिया सामने लाना अपने आप में खास है.

सोचिए, आने वाले समय में अगर ऐसी टेक्नोलॉजी रोजमर्रा की चीजों में शामिल हो जाए, तो ईयररिंग जैसी छोटी सी एक्सेसरी भी जरूरत पड़ने पर आपकी साइलेंट बॉडीगार्ड बन सकती है.

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