आज से कुछ साल पहले तक भारत के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में ज्यादातर नाम बड़े कारोबारी घरानों से आते थे. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. नई पीढ़ी के स्टार्टअप फाउंडर्स कम उम्र में ही अरबों रुपये की कंपनियां खड़ी कर रहे हैं. यही वजह है कि भारत के सबसे युवा अरबपतियों की लिस्ट में अब टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप फाउंडर्स का दबदबा बढ़ता जा रहा है. या यों कहें कि वो कंपनियां जो लोगों की लाइफ आसान बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं तेजी से ग्रो कर रही हैं.
इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल हैं कैवल्य वोहरा. क्विक कॉमर्स Zepto के को-फाउंडर कैवल्य वोहरा आज भारत के सबसे युवा टेक अरबपति माने जाते हैं. उन्होंने बहुत कम उम्र में ऐसी कंपनी बनाई जिसने भारत में किराना खरीदने का तरीका बदल दिया. जेप्टो टेक कंपनी नहीं है, लेकिन ये पूरी तरह से टेक पर ही बेस्ड है. इस कंपनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भरपूर यूज होता है. ऐप के काम करने का पूरा तरीका भी एआई बेस्ड हो चुका है.
कॉलेज की पढ़ाई छोड़ी, लेकिन सपना नहीं
कैवल्य वोहरा और उनके दोस्त आदित पलिचा बचपन से एक-दूसरे को जानते थे. दोनों ने अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था, लेकिन पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कॉलेज छोड़ने का फैसला किया. उनका मानना था कि अगर आइडिया सही है तो उसे अभी शुरू करना चाहिए. कैवल्य वोहरा का नेट वर्थ लगभग 4,480 करोड़ रुपये बताया जा रहा है.
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कोविड के समय लोगों को घर बैठे सामान चाहिए था. दोनों ने पहले WhatsApp के जरिए किराना डिलीवरी शुरू की. बाद में इसी आइडिया को बड़े स्तर पर लेकर आए और 2021 में Zepto लॉन्च कर दिया. शुरुआत में किराना कार्ट नाम का स्टार्टअप शुरू किया था. चूंकि कैवल्य टेक्नोलॉजी साइड देखते हैं, इसलिए फाउंडर होने के साथ फिलहाल जेप्टो में वो चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर भी हैं.
10 मिनट की डिलीवरी ने बदल दिया गेम
Zepto ने वादा किया कि वह 10 मिनट के अंदर ग्रॉसरी पहुंचाएगा. शुरुआत में कई लोगों ने इसे नामुमकिन बताया. लेकिन कंपनी ने शहरों में छोटे-छोटे डार्क स्टोर बनाए और ऐसा सिस्टम तैयार किया जिससे ऑर्डर कुछ ही मिनटों में ग्राहक तक पहुंचने लगे. यही मॉडल Zepto की सबसे बड़ा स्ट्रॉन्ग प्वाइंट बना. आज जेप्टो का मुकाबला Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और Amazon Fresh जैसी बड़ी कंपनियों से है.
इतनी कम उम्र में कैसे बने अरबपति?
स्टार्टअप फाउंडर्स की दौलत उनकी जेब में रखे कैश से नहीं मापी जाती. उनकी कंपनी की वैल्यू बढ़ने के साथ उनके शेयरों की कीमत भी बढ़ती है. जब इन्वेस्टर्स किसी कंपनी में बड़ी रकम लगाते हैं और उसकी वैल्यू अरबों डॉलर तक पहुंच जाती है, तो कंपनी के फाउंडर्स भी अरबपतियों की सूची में शामिल हो जाते हैं. यही कैवल्य वोहरा के साथ भी हुआ.
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अब सिर्फ जेप्टो नहीं, AI और फिनटेक का दौर
फोर्ब्स की रिपोर्ट बताती है कि भारत के सबसे युवा अरबपतियों की सूची अब तेजी से बदल रही है. पहले जहां ट्रेडिशनल कारोबार का दबदबा था, वहीं अब AI, फिनटेक, क्विक कॉमर्स और दूसरे टेक स्टार्टअप के फाउंडर्स तेजी से इस सूची में जगह बना रहे हैं. इससे क्लियर है कि आज के दौर में बड़ी फैक्ट्री या फैमिलीे बिजनेस ही सक्सेस का रास्ता नहीं है. सही टेक आइडिया और तेजी से बढ़ने वाला स्टार्टअप भी कम उम्र में बड़ी दौलत बना सकता है.
भारत में बदल रही है अरबपति बनने की कहानी
एक समय था जब अरबपति बनने में कई दशक लग जाते थे. अब डिजिटल इंडिया, UPI, सस्ते इंटरनेट, ऑनलाइन पेमेंट और स्टार्टअप में बढ़ते इन्वेस्टमेंट ने तस्वीर बदल दी है. टेक कंपनियां पहले से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं और युवा फाउंडर्स कम उम्र में ही दुनिया की बड़ी कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं.
इन्वेस्टर्स का भरोसा
कैवल्य वोहरा दरअसल टेक जीनियस भी माने जा रहे हैं. आम तौर पर लोग इस उम्र में जॉब ढूंढते हैं, लेकिन कोविड के दौरान उन्हें ये आईडिया आया. इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, साइबर सिक्योरिटी, क्विक कॉमर्स और SaaS (सॉफ्टवेयर ऐज ए सर्विस) जैसे सेक्टर में भारत के युवा दुनिया भर के इन्वेस्टर्स का ध्यान खींच रहे हैं.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क