eMudhra की बड़ी गलती से इंटरनेट की सुरक्षा पर खतरा, Google-Apple ने कमजोर सर्टिफिकेट को किया ब्लॉक!

eMudhra के डिजिटल सर्टिफिकेट में सुरक्षा से जुड़ी बड़ी खामी सामने आई है. कमजोर सिक्योरिटी की वजह से फर्जी वेबसाइट बनाने का खतरा बढ़ सकता था. इस मामले में Google, Apple और Mozilla ने प्रभावित सर्टिफिकेट को ब्लॉक करने के लिए कदम उठाए. जानिए क्या है पूरा मामला और यूजर्स पर इसका क्या असर हो सकता है.

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आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:05 PM IST

इंटरनेट पर किसी वेबसाइट को खोलते समय अगर आपको HTTPS और लॉक का निशान दिखता है, तो आप उसे सुरक्षित मानते हैं. लेकिन क्या हो अगर उस वेबसाइट की सेफ्टी के लिए इस्तेमाल होने वाले डिजिटल सर्टिफिकेट में ही गड़बड़ी हो? ऐसा ही एक मामला eMudhra से जुड़ा है, जिसके सामने आने के बाद Google और Apple जैसी टेक कंपनियों को सेफ्टी के लिए कदम उठाने पड़े हैं.

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दरअसल, eMudhra के आठ डिजिटल सर्टिफिकेट में कमजोर सिक्योरिटी चाबी का मामला सामने आया है. ये चाबी वेबसाइट की पहचान को सुरक्षित रखने और यह पता लगाने में मदद करती हैं कि वेबसाइट असली है या नहीं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन चाबी में प्रॉपर रैंडमनेस नहीं थी, जिसकी वजह से इन्हें खोजना आसान हो सकता था.

क्या होती हैं ये सिक्योरिटी चाबी?

आसान भाषा में समझें तो डिजिटल सर्टिफिकेट इंटरनेट पर किसी वेबसाइट की पहचान साबित करने का काम करता है. जब आप किसी वेबसाइट को खोलते हैं, तो आपका ब्राउजर यह जांच करता है कि वेबसाइट का सर्टिफिकेट भरोसेमंद है या नहीं. इसी प्रोसेस में क्रिप्टोग्राफी यानी खास तरह की सिक्योरिटी चाबी का इस्तेमाल होता है.

अगर इन चाबी में कोई कमजोरी हो, तो हैकर्स इसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं. वे किसी असली वेबसाइट की नकल करने वाला फर्जी सर्टिफिकेट बना सकते हैं. कुछ सिचुएशन में इससे यूजर्स को नकली वेबसाइट और असली वेबसाइट के बीच अंतर समझने में परेशानी हो सकती है. ऐसे में पासवर्ड और दूसरी सेंसेटिव जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ सकता है.

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Google और Apple ने क्या किया?

इस मामले के सामने आने के बाद Google, Apple और Mozilla ने प्रभावित सर्टिफिकेट को ब्लॉक करने के लिए कदम उठाए. इसका मकसद ब्राउजर और डिवाइस को इन कमजोर सर्टिफिकेट पर भरोसा करने से रोकना है.

सार्वजनिक सर्टिफिकेट रिकॉर्ड में इन कमजोर चाबी से बनाए गए किसी फर्जी सर्टिफिकेट का सबूत नहीं मिला है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के संभावित खतरे को पूरी तरह खारिज किया जा सकता है.

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यूजर्स को क्या करना चाहिए?

आम यूजर्स को अपने ब्राउजर, स्मार्टफोन और ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखना चाहिए. पुराने डिवाइस और लंबे समय से अपडेट नहीं हुए सॉफ्टवेयर में सेफ्टी से जुड़ी दिक्कतें बनी रह सकती हैं.

यह मामला बताता है कि इंटरनेट पर सेफ्टी सिर्फ लॉक के निशान तक सीमित नहीं है. वेबसाइट की पहचान सुरक्षित रखने वाले डिजिटल सर्टिफिकेट और उनकी चाबी का मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है.
 

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