बैन को ठेंगा दिखाकर देश में फिर तेजी से बढ़ रहे हैं चीनी ऐप्स, पढ़ें ये रिपोर्ट

पिछले साल भारत सरकार ने देश की सुरक्षा और संप्रभुता का हवाला देकर कई चीनी ऐप्स को बैन कर दिए थे. बैन के एक साल बीत जाने के बाद भी चीन के कई ऐप्स भारत में काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. इनमें कई बैन कंपनियों के ऐप्स भी शामिल हैं. 

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST
  • बैन के एक साल बीत जाने के बाद भी चीन के कई ऐप्स भारत में काफी तेजी से बढ़ रहे हैं
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत में टॉप 60 में कम से कम 8 ऐप्स चीनी है
  • ये सभी ऐप्स हर महीने 211 मिलियन यूजर्स तक पहुंचते हैं

पिछले साल भारत सरकार ने देश की सुरक्षा और संप्रभुता का हवाला देकर कई चीनी ऐप्स को बैन कर दिए थे. बैन के एक साल बीत जाने के बाद भी चीन के कई ऐप्स भारत में काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. इनमें कई बैन कंपनियों के ऐप्स भी शामिल हैं. 

इसको लेकर TOI ने रिपोर्ट किया है. TOI के अनुसार कई कंपनियां चीनी पहचान छिपा कर नए कंपनी के नाम के साथ मार्केट में ऐप को लॉन्च करती है.

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रिपोर्ट के अनुसार भारत में टॉप 60 में कम से कम 8 ऐप्स चीनी है. ये सभी ऐप्स हर महीने 211 मिलियन यूजर्स तक पहुंचते हैं. 

पिछले साल जुलाई में जब चीनी ऐप्स को बैन किया जा रहा था तब इन ऐप्स के पास 96 मिलियन यूजर्स थे. पिछले 13 महीने में इन ऐप्स ने 115 मिलियन नए यूजर्स को जोड़ा है. पिछले साल सरकार ने आईटी एक्ट के सेक्शन 69A के अंतर्गत लगभग 267 चीनी ऐप्स को बैन किया था. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि नए ऐप्स अपनी चीनी पहचान को छिपा लेते हैं. इन ऐप्स को नए नाम के साथ लिस्ट किया जाता है. लगभग सभी ऐप्स मीडिया और एंटरटेनमेंट स्पेस कैटेगरी में आते हैं. इसी कैटेगरी में TikTok भी था. जिसे पिछले साल देश में बैन कर दिया गया था. 

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एक्सपर्ट्स के अनुसार इस कैटेगरी में ऐप्स को ये फायदा होता है कि वो बहुत तेजी से काफी यूजर्स तक पहुंच जाते हैं. कुछ ऐप्स तो कुछ महीने में ही 10 मिलियन यूजर्स तक पहुंच गए. इसमें सबसे तेजी से Playit चीनी ऐप बढ़ा है. ये यूजर्स को पाइरेटेड मूवी और वेब-सीरीज डाउनलोड करने का ऑप्शन देता है. 

इसी तरह mAst: Music Status, Noizz, Mivi, Resso, Tiki, Shareme, Zili चीनी ऐप्स भी मौजूद है. इनमें से कई ऐप्स के ऑनर वो कंपनियां हैं जिनके ऐप को पिछले साल बैन कर दिया गया था. 

रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अधिकारी ने बताया कि इन ऐप्स पर तभी एक्शन लिया जाता है जब सिक्योरिटी एजेंसी इनके फंक्शनिंग पर रेड फ्लैग दिखाती है. पिछले साल भी सिक्योरिटी इशू की वजह से ही ऐप्स को बैन किया गया था. 


 
 

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