आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर इस वक्त दुनिया भर में एक तरह का बवाल मचा हुआ है. हर दिन AI को लेकर ऐसे दावे हो रहे हैं जिससे आम इंसान डरा हुआ है. एक तरफ जहां OpenAI और Anthropic के हेड कह रहे हैं कि AI पर लगाम लगाना होगा, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप कह रहे हैं कि हम एआई को रोक नहीं सकते वर्ना चीन आगे निकल जाएगा. इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने भी कुछ कहा है. आइए जानते हैं.
बिल गेट्स ने एक नई बातचीत में चेतावनी दी है कि दुनिया की कोई भी सरकार अभी उन बड़े बदलावों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है, जो AI समाज में ला सकता है. उनका कहना है कि AI से नौकरियों पर असर पड़ सकता है, साइबर हमलों का खतरा बढ़ सकता है और लोगों में एआई से बातचीत की लत भी लग सकती है. यानी ये लोगों को एडिक्ट बना सकता है.
यह भी पढ़ें: AI CEOs का पब्लिसिटी स्टंट या सच में 10 साल में खत्म हो सकती है इंसानियत? दाल में कुछ काला है
गेट्स की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब AI को लेकर दुनिया में बहस तेज हो गई है. एक तरफ कंपनियां ज्यादा ताकतवर एआई बनाने की होड़ में लगी हैं, वहीं दूसरी तरफ साइंटिस्ट्स और टेक इंडस्ट्री के बड़े नाम इसके खतरों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं. इसी बीच गेट्स ने कहा है कि सरकारों को अब सिर्फ एआई का फायदा देखने के बजाय इसके असर से निपटने की तैयारी भी करनी होगी. हालांकि यहां ये भी समझना जरूरी है कि भले ही AI कंपनियों के सीईओ स्लोडाउन की बता कर रहे हैं, लेकिन कोई वाकई इसे स्लोडाउन करना चाह नहीं रहा है.
बिल गेट्स ने क्यों कहा- सरकारें बहुत पीछे हैं?
रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में बिल गेट्स ने कहा कि कोई भी सरकार एआई से आने वाले बदलावों के लिए उतनी तैयारी नहीं कर रही है, जितनी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारों की तैयारी इस मामले में काफी पीछे है.
गेट्स पहले एआई को लेकर काफी उम्मीद जताते रहे हैं. उनका मानना रहा है कि एआई स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरे जरूरी क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकता है. लेकिन अब उनका कहना है कि इसकी रफ्तार के साथ कुछ ऐसे खतरे भी सामने आ रहे हैं, जिनके लिए दुनिया अभी तैयार नहीं है.
यह भी पढ़ें: 'AI को रोकना चीन को जिताना है’ AI स्लोडाउन की मांग पर बोले डोनल्ड ट्रंप, एंथ्रोपिक सीईओ पर भी साधा निशाना
इनमें सबसे बड़ी चिंता नौकरियों को लेकर है. एआई पहले ही ऐसे कई काम करने लगा है, जो कुछ साल पहले तक सिर्फ इंसानों के भरोसे थे. आने वाले समय में एआई ज्यादा काम करने लगेगा तो कई नौकरियों का तरीका बदल सकता है और कुछ नौकरियों की जरूरत भी कम हो सकती है.
गेट्स ने साइबर अटैक्स और एआई आधारित खतरों को लेकर भी चिंता जताई है. इसके अलावा उन्होंने एआई से बातचीत करने वाले डिजिटल साथियों की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर भी सावधान किया है. उनका डर है कि लोग इनसे जरूरत से ज्यादा जुड़ सकते हैं.
एआई की सबसे बड़ी लड़ाई अमेरिका और चीन के बीच
गेट्स ने एआई की होड़ में चीन की तेजी की भी तारीफ की है. उनका कहना है कि अमेरिका और चीन दोनों के पास कई ऐसे संस्थान हैं, जो दुनिया के सबसे बेहतर एआई मॉडल बनाने की क्षमता रखते हैं. बता दें कि कल यानी 14 सितंबर को ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा था कि AI स्लोडाउन नहीं हो सकता, क्योंकि चीन यही चाहता है.
चीनी और अमेरिकी AI मॉडल्स में ज्यादा फर्क नही - गेट्स
गेट्स के मुताबिक दोनों देशों के सबसे अच्छे एआई मॉडल के बीच का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. उन्होंने इसे अमेरिका और चीन के बीच एक तरह की बड़ी एआई प्रतियोगिता बताया है. अमेरिकी प्रेसिडेंट और वहां की AI कंपनियों को भी इस बात का ही डर है कि अमेरिका के मुकाबले चीन का AI कहीं आगे न निकल जाए. इसलिए ही ट्रंप ने पोस्ट में कहा है कि जो जीतेगा वही जीतेगा और चीन से AI में अमेरिका काफी आगे है.
यह भी पढ़ें: ट्रेन में खाने की क्वालिटी पर AI की पैनी नजर, पैंट्री कार में अब 24x7 होगी निगरानी
यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका लगातार एआई में अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है और चीन तेजी से अपनी एआई तकनीक विकसित कर रहा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच एआई की होड़ सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रह गई है. इसका असर कारोबार, सुरक्षा, नौकरियों और दुनिया की राजनीति पर भी पड़ सकता है.
गेट्स का मानना है कि इस होड़ का फायदा सिर्फ अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनका कहना है कि एआई का इस्तेमाल गरीब देशों और उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए, जिनके पास आज अच्छी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं नहीं हैं.
गेट्स फाउंडेशन एआई पर खर्च करेगा 1 अरब डॉलर
बिल गेट्स की चेतावनी के साथ ही गेट्स फाउंडेशन ने एआई को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है. फाउंडेशन अगले दो साल में कम से कम 1 अरब डॉलर, यानी करीब 8,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रहा है.
इस पैसे का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा और खेती जैसे क्षेत्रों में एआई की पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाएगा. फाउंडेशन का मकसद यह है कि एआई का फायदा सिर्फ अमीर देशों और बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे.
यह भी पढ़ें: क्या AI छीन लेगा हेयर ड्रेसर की नौकरी? वायरल वीडियो ने छेड़ी बहस
फाउंडेशन खास तौर पर उन भाषाओं और इलाकों पर भी ध्यान देना चाहता है, जिन्हें मौजूदा एआई मॉडल उतनी अच्छी तरह नहीं समझते. इसका मतलब है कि स्थानीय भाषाओं के लिए बेहतर एआई मॉडल और डेटा तैयार करने पर भी पैसा लगाया जाएगा.
गरीब देशों के लिए एआई बन सकता है बड़ा हथियार
गेट्स का कहना है कि एआई को सिर्फ खतरे के तौर पर नहीं देखना चाहिए. सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह दुनिया के गरीब लोगों के लिए बहुत बड़ा फायदा ला सकता है.
स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है. यह बीमारी की पहचान, इलाज और नई दवाओं और टीकों की खोज में मदद कर सकता है.
शिक्षा में एआई ऐसे छात्रों तक बेहतर पढ़ाई पहुंचा सकता है, जहां अच्छे शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. खेती में यह किसानों को मौसम, फसल और दूसरी जरूरी जानकारी देने में मदद कर सकता है.
गेट्स ने एआई को एलियन से क्यों जोड़ा?
बिल गेट्स ने एआई के भविष्य को समझाने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि फिल्मों में अक्सर ऐसा दिखाया जाता है कि एलियन धरती पर हमला करने आता है और उसके बाद अमेरिका, चीन और बाकी देश आपसी मतभेद भूलकर एक साथ आ जाते हैं.
गेट्स के मुताबिक एआई कुछ हद तक ऐसा ही मौका है. उनका कहना है कि एआई हमारे सामने आ चुका है और दुनिया को इसके साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.
इसका सीधा मतलब है कि एआई को लेकर अमेरिका, चीन और दूसरे देशों के बीच सिर्फ प्रतियोगिता नहीं होनी चाहिए. कुछ मामलों में उन्हें साथ मिलकर ऐसे नियम बनाने होंगे, जिनसे एआई का गलत इस्तेमाल रोका जा सके.
सरकारों के पास कितना समय है?
यही इस पूरी बहस का सबसे अहम सवाल है. एआई का विकास इतनी तेजी से हो रहा है कि सरकारों के लिए नए नियम बनाने की रफ्तार और एआई के विकास की रफ्तार में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है.
दुनिया में अभी एआई के लिए नियम बनाने की कोशिश चल रही है, लेकिन इस बात पर देशों के बीच सहमति नहीं है कि कितने सख्त नियम होने चाहिए. अमेरिका और चीन के बीच एआई की प्रतियोगिता इस मामले को और मुश्किल बनाती है, क्योंकि कोई भी देश ऐसी पाबंदियां नहीं चाहता जिससे वह दूसरे देश से पीछे रह जाए.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क