CWG 2026: कंडक्टर की नौकरी गई, घर भी बिक गया... फिर शर्मिला ने जीत लिया कॉमनवेल्थ गोल्ड

हरियाणा के महेंद्रगढ़ की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला F57 शॉट पुट इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया. 2 साल की उम्र में पोलियो, पहले पति से तलाक, आर्थिक तंगी और ट्रेनिंग के लिए घर बेचने जैसी कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. जानिए संघर्ष से सफलता तक शर्मिला धनखड़ की प्रेरणादायक कहानी.

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हरियाणा की गोल्ड मेडलिस्ट शर्मिला धनखड़ की प्रेरणादायक कहानी (Photo: PTI) हरियाणा की गोल्ड मेडलिस्ट शर्मिला धनखड़ की प्रेरणादायक कहानी (Photo: PTI)

देशराज सिंह चौहान

  • महेंद्रगढ़,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:24 PM IST

हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. महिला पैरा शॉट पुट F57 इवेंट में उन्होंने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए देश का नाम रोशन किया.

लेकिन इस जीत के पीछे संघर्ष, दर्द और हिम्मत की एक लंबी कहानी छिपी है. शर्मिला का जीवन बचपन से ही चुनौतियों से भरा रहा. महज 2 साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया.

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परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, पिता छोटे किसान और मां दृष्टिबाधित थीं. इस कारण उनका सही इलाज नहीं हो सका. हालात ऐसे बने कि कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई.

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लेकिन मुश्किलें यहीं नहीं थमीं, 26 साल की उम्र में उनके पहले पति ने उन्हें छोड़ दिया. उस वक्त उनकी दो बेटियां थीं. शर्मिला दोनों बेटियों के साथ मायके लौट आईं. 

फिर उनकी जिंदगी में अजीत आए. 28 साल की उम्र में दूसरी शादी के बाद उन्हें नया सहारा मिला. अजीत ने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर उनका साथ दिया.

यही वह मोड़ था, जहां से शर्मिला की असली उड़ान शुरू हुई. साल 2018 में हरियाणा रोडवेज की हड़ताल के दौरान उन्हें राज्य की पहली महिला कंडक्टर बनने का मौका मिला, लेकिन हड़ताल खत्म होते ही नौकरी भी चली गई.

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इस झटके ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने ठान लिया कि अब ऐसा मुकाम हासिल करेंगी जिसे कोई उनसे छीन न सके. आर्थिक तंगी इतनी थी कि 2023 में ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा.

परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया. 34 साल की उम्र में उन्होंने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में सीटेड शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की.

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2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में वह चौथे स्थान पर रहीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार मेहनत और सुधार के दम पर उन्होंने खुद को साबित किया और आखिरकार गोल्ड मेडल जीतकर देश को गौरवान्वित किया.

आज उनकी दोनों बेटियां भी उनकी राह पर हैं. बड़ी बेटी अनुज  (17) जेवलिन थ्रो और छोटी बेटी लक्ष्मी (13) लॉन्ग जंप में स्टेट लेवल की खिलाड़ी हैं. शर्मिला धनखड़ की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि हौसले, संघर्ष और कभी हार न मानने की मिसाल है.

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