शर्मिला धनखड़ (Sharmila Dhankhar) भारत की पैरा एथलीट हैं, जो मुख्य रूप से शॉट पुट (गोला फेंक) प्रतियोगिता में हिस्सा लेती हैं. वह एफ57 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करती हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. साल 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने महिलाओं की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा. इस उपलब्धि के साथ वह राष्ट्रमंडल खेलों की पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनीं.
शर्मिला धनखड़ का जन्म 15 अगस्त 1986 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव में हुआ था. जब वह लगभग दो वर्ष की थीं, तब उन्हें पोलियो हो गया था. इसके कारण उनके एक पैर पर स्थायी प्रभाव पड़ा. शुरुआती जीवन में उन्होंने कई व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना किया.
उनका विवाह 19 वर्ष की उम्र में हुआ था. बाद में वह अपने दो बच्चों के साथ मायके लौट आईं. इसके बाद उन्होंने दोबारा विवाह किया. उनके दूसरे पति अजीत सिंह ने उन्हें पैरा खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद उन्होंने रेवाड़ी में कोच टेक चंद के मार्गदर्शन में शॉट पुट और डिस्कस थ्रो का प्रशिक्षण शुरू किया.
शर्मिला ने वर्ष 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. बर्मिंघम में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने 8.43 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ और राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया तथा चौथे स्थान पर रहीं.
साल 2025 में नई दिल्ली में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने महिलाओं की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में 10.03 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ पांचवां स्थान हासिल किया.
वर्ष 2026 में दुबई में आयोजित फज्जा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शर्मिला ने शॉट पुट एफ57 में स्वर्ण पदक और डिस्कस थ्रो एफ57 में कांस्य पदक जीता.
हरियाणा के महेंद्रगढ़ की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला F57 शॉट पुट इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया. 2 साल की उम्र में पोलियो, पहले पति से तलाक, आर्थिक तंगी और ट्रेनिंग के लिए घर बेचने जैसी कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. जानिए संघर्ष से सफलता तक शर्मिला धनखड़ की प्रेरणादायक कहानी.
भारत की शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड जीतकर इतिहास रचा और 20 साल का इंतजार खत्म किया। इसी इवेंट में शिल्पा शायला ने नाटकीय फैसले के बाद ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया.
शर्मिला के गोल्ड मेडल के साथ ही भारत का पैरा एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक का 20 साल का इंतजार भी खत्म हो गया. इसी स्पर्धा में भारत की एक अन्य खिलाड़ी शिल्पा शायला ने ब्रॉन्ज मेडल जीता.