सात महीने पहले जिस इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में इंडिया ओपन के दौरान पक्षियों, बंदर और बदइंतजामी को लेकर सवाल उठे थे, वही स्टेडियम अब BWF विश्व चैम्पियनशिप में बिल्कुल बदली हुई तस्वीर पेश कर रहा है. और सबसे अहम बात यह है कि इस बार बदलाव सिर्फ दिख नहीं रहा, महसूस भी हो रहा है.
स्टेडियम बेहद साफ-सुथरा नजर आ रहा है. भारतीय खेल परिसरों की व्यवस्थाओं की अक्सर दूसरे देशों से तुलना होती है, लेकिन अब तक यहां मौजूद खिलाड़ियों और अधिकारियों के बीच आम राय यही है कि विश्व चैम्पियनशिप का यह आयोजन स्थल विश्वस्तरीय नजर आ रहा है.
इस बदलाव पर खिलाड़ियों की भी नजर है. टूर्नामेंट के बीच BWF के महासचिव थॉमस लुंड ने इस बदलाव की अब तक की सबसे बड़ी तारीफ की.
उन्होंने कहा, 'मैं इस बात से बेहद प्रभावित हूं कि इतने कम समय में इस आयोजन स्थल को किस तरह तैयार किया गया है. मुझे पता है कि साल की शुरुआत में इसकी आलोचना हुई थी, लेकिन इतने कम समय में जिस स्तर पर काम किया गया है, वह शानदार है.'
थॉमस के मुताबिक खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया भी बेहद सकारात्मक रही है.
उन्होंने कहा कि बैडमिंटन इंडिया, सरकार, भारतीय खेल प्राधिकरण और आयोजन से जुड़े सभी पक्षों ने मिलकर जिस तरह काम किया, उसकी खिलाड़ियों ने खूब सराहना की है. खास तौर पर वे खिलाड़ी, जो साल की शुरुआत में इंडिया ओपन के दौरान यहां की व्यवस्थाओं को लेकर चिंतित थे, इस बार काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं.
थाईलैंड के दूसरी वरीयता प्राप्त कुनलावुत वितिदसर्न ने भी व्यवस्थाओं को लेकर कहा, 'बहुत अच्छा. मैं यहां की व्यवस्थाओं से काफी खुश हूं.'
यह जनवरी की स्थिति से बड़ा बदलाव है, जब इंडिया ओपन में बैडमिंटन से ज्यादा चर्चा आयोजन स्थल की हो रही थी.
एचएस प्रणय और लोह कीन यू के मुकाबले के दौरान एक कबूतर कोर्ट में आ गया था. ऐसा दोबारा भी हुआ. इसके बाद स्टेडियम के भीतर एक बंदर भी देखा गया. डेनमार्क की मिया ब्लिचफेल्ट ने साफ-सफाई और खेलने की परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे. वहीं एंडर्स एंटोनसेन ने दिल्ली के प्रदूषण का हवाला देते हुए टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया था.
मिया ने तो उस समय यहां तक कहा था कि उनके लिए यह कल्पना करना मुश्किल है कि ऐसी स्थिति वाला आयोजन स्थल छह महीने बाद विश्व चैम्पियनशिप की मेजबानी कैसे कर पाएगा.
इंडिया ओपन बना था असली टेस्ट
इंडिया ओपन को जानबूझकर IGI स्टेडियम में विश्व चैम्पियनशिप के टेस्ट इवेंट के तौर पर कराया गया था. लेकिन इस टेस्ट ने आयोजन स्थल की उन तमाम कमियों को उजागर कर दिया, जिन्हें दूर करना जरूरी था. BWF ने भी इसे गंभीरता से लिया.
BWF टूर्नामेंट ऑपरेशंस के इवेंट्स डायरेक्टर सेल्वमरेश सुप्रमणियम ने बताया कि पिछले छह महीनों में बड़े पैमाने पर काम किया गया. फरवरी में BWF की टीम दोबारा दिल्ली आई. इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार कर बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया को भेजी गई, जिसने इसे आयोजन स्थल के मालिक भारतीय खेल प्राधिकरण तक पहुंचाया.
कमियों की सूची लंबी थी. छत और वॉटरप्रूफिंग पर काम जरूरी था. साफ-सफाई सुधारनी थी. वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम अपग्रेड करने थे. शौचालयों की सफाई और फिटिंग बदलने की जरूरत थी. यहां तक कि बीम पर भी पेंट किया जाना था.
और सबसे बड़ी समस्या थी- पक्षियों की बीट
विश्व चैम्पियनशिप में कबूतरों को रोकने के लिए बाकायदा अलग इंतजाम किया गया है. सेल्वमरेश के मुताबिक BAI और SAI ने एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाले एंटी-टॉक्सिक जेल सिस्टम पर काम किया, ताकि पक्षी बीम पर न बैठ सकें. इसके अलावा स्टेडियम में ट्रिपल-डोर सिस्टम लगाया गया है, जिससे जानवरों के अंदर आने की संभावना कम हो.
उन्होंने बताया कि परिसर के आसपास घूमने वाले कुत्तों को भी स्थानीय एजेंसियों की मदद से दूसरी जगह भेजा गया.
हालांकि आयोजक यह दावा नहीं कर रहे कि जानवरों और कीड़ों को 100 फीसदी रोका जा सकता है. उनका जोर इस बात पर है कि अगर कोई समस्या आती है तो उस पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से कार्रवाई होती है.
सेल्वमरेश ने BAI और SAI की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों ने चुनौती को स्वीकार किया और जिन सुधारों की जरूरत थी, उन्हें लागू किया. अब आयोजन स्थल पर जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद हैं.
साफ शौचालय और महिला खिलाड़ियों के लिए खास इंतजाम
बदलाव सिर्फ उन चीजों तक सीमित नहीं हैं, जो सोशल मीडिया पर तस्वीरें बनती हैं. शौचालयों को अपग्रेड किया गया है. नई फिटिंग लगाई गई हैं. महिला खिलाड़ियों ने एक और पहल की खास तौर पर तारीफ की है- वॉशरूम में सैनिटरी पैड और पी-सुरक्षित स्प्रे जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.
स्कॉटलैंड की खिलाड़ी कर्स्टी गिल्मर ने इस पहल का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि जैसे टॉयलेट पेपर जरूरी है, वैसे ही सैनिटरी प्रोडक्ट्स की उपलब्धता भी जरूरी है.
दक्षिण अफ्रीका की शटलर जोहाना शोल्ट्ज भी व्यवस्थाओं से खुश नजर आईं. उनका कहना था कि जरूरत की कोई चीज चाहिए हो तो आसानी से मिल जाती है और पूरा अनुभव काफी सहज है.
सेल्वमरेश ने बताया कि खास तौर पर महिला खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है.
दर्शकों को भी दिख रहा बदलाव
बदलाव सिर्फ खिलाड़ियों और अधिकारियों तक सीमित नहीं है. दर्शक भी इसे महसूस कर रहे हैं.
बुधवार को अपने बेटे के साथ विश्व चैम्पियनशिप देखने पहुंचे भूपेश कुमार ने पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी के मुकाबले देखे. उन्हें सबसे ज्यादा चिंता शौचालयों को लेकर थी.
लेकिन उनकी उम्मीद के उलट शौचालय नए और साफ मिले. बाहर कर्मचारी तैनात थे, जो इस्तेमाल के बाद उन्हें साफ कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि शाम तक भी शौचालय साफ थे, जबकि उन्हें इसके विपरीत होने की उम्मीद थी.
सीटें भी आरामदायक मिलीं. खाने के काउंटरों पर कीमतें भी उचित लगीं. एरिना के आसपास ब्रांडेड स्टॉल और बच्चों के लिए बनाए गए कियोस्क ने माहौल को ज्यादा आकर्षक बनाया है.
ये छोटी-छोटी चीजें इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जनवरी में सवाल इन्हीं चीजों पर उठे थे.
तस्वीरें खुद बता रही हैं बदलाव की कहानी
मिया ब्लिचफेल्ट ने इस बदलाव की सबसे प्रभावी तस्वीर पेश की है. इंडिया ओपन के दौरान आयोजन स्थल की आलोचना करने वाली डेनमार्क की इस खिलाड़ी ने इंस्टाग्राम पर उस समय और अब की तस्वीरों की तुलना साझा की. उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हुई.
लेकिन इस बार संदेश बिल्कुल अलग था. अधिकांश विदेशी खिलाड़ी यहां की व्यवस्थाओं से खुश हैं. स्टेडियम को लगातार साफ रखा जा रहा है. वॉलंटियर्स दर्शक दीर्घा में लगातार सफाई करते नजर आते हैं. प्रवेश द्वार स्पष्ट रूप से चिह्नित हैं और जानवरों को रोकने के इंतजाम अब तक प्रभावी रहे हैं.
इस बार किसी मैच के बीच न कबूतर आया, न बंदर.
विश्व चैम्पियनशिप जैसे आयोजन के लिए यह सुनने में भले ही बहुत मामूली उपलब्धि लगे, लेकिन दिल्ली में जनवरी के हालात को देखते हुए यह बदलाव अपने आप में बड़ी बात है.
जहां जरूरत थी, वहां IGI स्टेडियम की सीटें बदली गई हैं. बारिश और ट्रैफिक के बावजूद परिवहन व्यवस्था भी अब तक सुचारु रही है. खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए तय होटलों को लेकर भी प्रतिक्रिया सकारात्मक है.
प्रैक्टिस स्थल पर भी काम हुआ है. नई पेंटिंग और गहरे रंग की दीवारों ने शटल को देखने में आसानी बढ़ाई है.
हां, आयोजन स्थल में कुछ चुनौतियां अब भी हैं. एयर कंडीशनिंग और ऊंची छत के कारण शटल के ड्रिफ्ट में बदलाव आता है, जिसे खिलाड़ियों को समझना पड़ रहा है. लेकिन यह अब बैडमिंटन की चुनौती है, आयोजन प्रबंधन का संकट नहीं.
और शायद यही दिल्ली के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है. विश्व चैम्पियनशिप अपने बीच के दौर में पहुंच चुकी है और अब यह वही बन गई है, जो इसे शुरू से होना चाहिए था- एक शानदार बैडमिंटन टूर्नामेंट.
थॉमस ने भी यही उम्मीद जताई कि अब से फाइनल तक चर्चा कोर्ट पर होने वाले मुकाबलों की होनी चाहिए. जनवरी में आयोजन स्थल खुद कहानी था. अगस्त में कहानी सिर्फ बैडमिंटन है.
अक्षय रमेश