वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू के आड़े किसका ईगो आ रहा, टीम मैनेजमेंट का या... 'प्रोसेस' का?

भारतीय टीम के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने माना कि वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें भी बाकी खिलाड़ियों की तरह 'प्रोसेस' से गुजरना होगा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब टीम मैनेजमेंट खुद खिलाड़ी को तैयार मान रहा है, तो आखिर उसके डेब्यू के आड़े क्या आ रहा है- चयन की रणनीति, स्थापित खिलाड़ियों पर भरोसा या फिर 'प्रोसेस' की दलील?

Advertisement
इंग्लैंड दौरे की टी20 सीरीज में वैभव का डेब्यू हो पाएगा? (Photo, Getty) इंग्लैंड दौरे की टी20 सीरीज में वैभव का डेब्यू हो पाएगा? (Photo, Getty)

विश्व मोहन मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

776 रन... 72 छक्के... 230 से ज्यादा का स्ट्राइक रेट... आईपीएल का सबसे बड़ा सितारा... फिर भी भारतीय टीम की जर्सी पहनने का इंतजार.

अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वैभव सूर्यवंशी कब डेब्यू करेंगे, बल्कि यह है कि अगर टीम मैनेजमेंट खुद मान रहा है कि लड़का इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार है, तो आखिर उसे रोका क्यों जा रहा है?

Advertisement

आयरलैंड के खिलाफ 0-2 की शर्मनाक हार के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है.भारतीय टीम के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने साफ शब्दों में कहा,'वैभव इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए बिल्कुल तैयार है. इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन उसे भी वही प्रक्रिया अपनानी होगी, जिससे बाकी खिलाड़ी गुजरे हैं.'

यहीं से बहस शुरू होती है...

तैयार भी... लेकिन नहीं खेलेंगे! आखिर यह कैसी दलील?

क्रिकेट में आम तौर पर दो ही वजह होती हैं- या तो खिलाड़ी तैयार नहीं होता या फिर टीम में उसकी जगह नहीं बनती. लेकिन यहां कहानी बिल्कुल अलग है. टीम मैनेजमेंट खुद कह रहा है कि वैभव तैयार हैं. दूसरी तरफ टीम लगातार मैच हार रही है.

फिर भी उन्हें मौका नहीं मिल रहा...ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर रुकावट कहां है?

Advertisement

क्या यह सिर्फ 'प्रोसेस' है? या फिर टीम मैनेजमेंट अपने पहले फैसले से पीछे हटना नहीं चाहता?

टेन डोशेट ने संजू सैमसन का बचाव भी किया. उन्होंने कहा कि संजू ने तीन महीने पहले भारत को टी20 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी और टीम खिलाड़ियों को लंबा मौका देना चाहती है.

यह तर्क सुनने में सही लगता है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सिर्फ पुराने योगदान पर नहीं चलता.

हर सीरीज नए सवाल पूछती है. अगर प्रदर्शन लगातार गिर रहा हो और बेंच पर बैठा खिलाड़ी देश का सबसे चर्चित किशोर बल्लेबाज हो, तो बहस होना स्वाभाविक है.जब हारने के बाद भी टीम नहीं बदले... तो सवाल कप्तान से नहीं, सोच से होते हैं.

आयरलैंड के खिलाफ भारत सीरीज हार गया. दूसरा मैच सिर्फ एक रन से गंवाया.ऐसे मैचों के बाद अक्सर टीम प्रयोग करती है. लेकिन भारत ने वैभव को फिर भी बाहर रखा. यानी संदेश साफ था- परफॉर्मेंस से ज्यादा भरोसा स्थापित खिलाड़ियों पर है. यही फैसला अब आलोचना के घेरे में है.

क्या 'प्रोसेस' प्रतिभा से बड़ा हो गया है?

हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए. यह सिद्धांत सही है. लेकिन हर सिद्धांत के अपवाद भी होते हैं. अगर 16 साल की उम्र में सचिन तेंदुलकर 'प्रोसेस' का इंतजार करते रहते, तो शायद भारतीय क्रिकेट का इतिहास कुछ और होता.

Advertisement

अगर कोई 15 साल का बल्लेबाज आईपीएल में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाकर 776 रन बना सकता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि उसे और क्या साबित करना बाकी है?

ईगो नहीं... लेकिन फैसले पर सवाल जरूर

टीम मैनेजमेंट पर सीधे-सीधे 'ईगो' का आरोप लगाना जल्दबाजी होगी. लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि अब यह मामला सिर्फ चयन का नहीं रह गया है. हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैभव पर सवाल पूछा जा रहा है. हर जवाब में वही 'प्रोसेस' दोहराया जा रहा है. और हर मैच के बाद यह बहस और तेज हो रही है. क्योंकि जब आप खुद मान लें कि खिलाड़ी तैयार है, तब उसे लगातार बाहर रखना फैसले को सवालों के घेरे में जरूर खड़ा करता है.

अब इंग्लैंड दौरे पर सबसे बड़ी नजर

भारत अब इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज खेलेगा.अगर वहां भी वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं मिलता, तो 'प्रोसेस' वाली दलील शायद और कमजोर पड़ जाएगी. क्योंकि तब सवाल सिर्फ इतना नहीं रहेगा कि वैभव कब खेलेंगे, बल्कि यह होगा- क्या भारतीय क्रिकेट में असाधारण प्रतिभा भी अब सिर्फ अपनी बारी आने का इंतजार करेगी?

और अगर टीम मैनेजमेंट खुद मान चुका है कि खिलाड़ी तैयार है, तो उसके डेब्यू के आड़े आखिर क्या आ रहा है- प्रोसेस, रणनीति... या अपने फैसले बदलने की हिचक?

Advertisement

 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »