2027 वर्ल्ड कप से पहले सिराज के साथ ये क्या हो रहा! कभी भरोसा, अब लगातार नजरअंदाज

मोहम्मज सिराज के पास क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 से पहले खुद को साबित करने का समय है, लेकिन इसके लिए उन्हें नियमित क्रिकेट खेलने और स्पष्ट भूमिका दोनों की जरूरत होगी. आने वाली वनडे सीरीज यह संकेत देगा कि टीम मैनेजमेंट उन्हें वर्ल्ड कप की अपनी मुख्य योजना में देख रहा है या फिर तेज गेंदबाजी में नए विकल्पों को प्राथमिकता दी जा रही है.

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मोहम्मद सिराज क्या आगामी वर्ल्ड कप का बन पाएंगे हिस्सा? (Photo: PTI) मोहम्मद सिराज क्या आगामी वर्ल्ड कप का बन पाएंगे हिस्सा? (Photo: PTI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

मोहम्मद सिराज एक वक्त भारतीय तेज गेंदबाजी के ऐसे चेहरे बनकर उभरे थे, जिन पर बड़े मुकाबलों में भरोसा किया जा सकता था. जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में उन्होंने पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ ओवल टेस्ट में शानदार गेंदबाजी की थी. पांच मैचों की उस टेस्ट सीरीज में सिराज ने लगातार गेंदबाजी करते हुए अपनी रफ्तार और फिटनेस से प्रभावित किया. आखिरी टेस्ट में भी उन्होंने 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की गति से गेंदबाजी कर इंग्लैंड के निचले क्रम को परेशान किया.

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मगर इस साल यानी 2026 में मोहम्मद सिराज की कहानी कुछ अलग नजर आ रही है. क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 में अब करीब एक साल बाकी है, लेकिन भारत की वनडे टीम में उनकी भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. इस साल भारत ने 12 वनडे इंटरनेशनल मुकाबले खेले, लेकिन सिराज इनमें से सिर्फ चार मुकाबलों में मैदान पर उतरे. इन चार मैचों में उन्होंने कुल 35 ओवर्स की गेंदबाजी की और कुल 4 विकेट झटके.

मोहम्मद सिराज की गैरमौजूदगी के दौरान भारतीय टीम ने तेज गेंदबाजी में कई विकल्पों को आजमाया. प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार, प्रिंस यादव, हर्षित राणा, आकिब नबी, अंशुल कम्बोज जैसे गेंदबाजों को मौके मिले. जसप्रीत बुमराह भी ज्यादातर सीरीज में उपलब्ध नहीं रहे, ऐसे में सिराज के पास अपनी जगह मजबूत करने का मौका था, लेकिन उन्हें लगातार क्रिकेट खेलने का अवसर नहीं मिला.

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दो महीने के ब्रेक से बिगड़ी लय?
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में गुजरात टाइटन्स (GT) के लिए खेलने के बाद मोहम्मद सिराज ने अफगानिस्तान के खिलाफ मल्लांपुर में टेस्ट मैच खेला. उस मैच में उन्होंने 13 ओवर्स की गेंदबाजी की और एक विकेट लिया. इसके बाद वह करीब दो महीने तक इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर रहे. इस दौरान वह अफगानिस्तान, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे के खिलाफ व्हाइट बॉल सीरीज में नहीं खेले.
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लंबे अंतराल का असर अगस्त में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान दिखाई दिया. मोहम्मद सिराज की गति सामान्य से कम रही. जो गेंदबाज अक्सर 140-142 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बॉलिंग करता है, वह कई बार 125-130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी करता नजर आया. सिराज ने बाद में इसकी वजह भी बताई. उन्होंने कहा कि वह अपनी रिदम पर निर्भर रहने वाले गेंदबाज हैं और लंबे ब्रेक के बाद उनका रन अप और गेंदबाजी का फ्लो प्रभावित हुआ.

मोहम्मद सिराज यह भी बताया कि अपने करीब दस साल के करियर में उन्होंने इससे पहले दो महीने का ब्रेक नहीं लिया था. इसके बाद दलीप ट्रॉफी के फाइनल में उनकी गति कुछ बेहतर हुई और वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी वनडे में भी उन्होंने 141.2 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार दर्ज की.

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शुभमन ने डेथ ओवर्स में नहीं कराई बॉलिंग
वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में मोहम्मद सिराज की तो वापसी हुई, लेकिन उन्हें तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी में आराम दिया गया. मुल्लांपुर में सीरीज के तीसरे मुकाबले में उन्हें मौका मिला. इस मैच में उन्होंने आठ ओवर्स में 52 रन देकर एक विकेट लिया. हालांकि, चर्चा उनके आंकड़ों से ज्यादा इस बात की हुई कि मैच के अहम स्टेज पर कप्तान शुभमन गिल ने उनका इस्तेमाल नहीं किया. वेस्टइंडीज जब बड़े लक्ष्य का पीछा कर रहा था, तब डेथ ओवरों में अंशुल कम्बोज और नमन धीर को गेंद सौंपी गई. वेस्टइंडीज ने उस मैच में 10 गेंद शेष रहते 352 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया था.
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मोहम्मद सिराज की स्थिति की तुलना मोहम्मद शमी से की जा सकती है. शमी ने साल 2023 में क्रिकेट वर्ल्ड कप से पहले काफी कम मुकाबले खेले थे. हार्दिक पंड्या की चोट के बाद उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह मिली और उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. हालांकि, सिराज के मामले में एक अहम अंतर है. शमी लंबे समय तक बाहर रहने के बावजूद अपनी गति और गेंदबाजी की धार बनाए रखने में सक्षम थे. सिराज खुद स्वीकार कर चुके हैं कि लंबे ब्रेक का असर उनकी रिदम पर पड़ता है. यही वजह है कि अगर टीम मैनेजमेंट उन्हें क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 की योजना में रखता है तो उन्हें टूर्नामेंट से पहले पर्याप्त मैच प्रैक्टिस देना जरूरी होगा.

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मोहम्मद सिराज की उपयोगिता पर सवाल इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि आईपीएल में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है. 2025 और 2026 के आईपीएल सीजन में उन्होंने कुल 35 विकेट हासिल किए. इससे पता चलता है कि वह व्हाइट बॉल क्रिकेट में प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं. अब जरूरत इस बात की है कि उनकी भूमिका तय हो और उसी के मुताबिक उन्हें तैयार किया जाए. भारत को क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 में साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे की परिस्थितियों में खेलना है. ऐसे में तेज गेंदबाजों की भूमिका बेहद अहम होगी.

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