क्रिकेट में एक गेंदबाज की असली पहचान सिर्फ उसकी विकेटों की संख्या से नहीं होती. असली सवाल यह है कि वह बल्लेबाज के सामने कितने अलग सवाल खड़े कर सकता है. बल्लेबाज हर बार जवाब तलाशता है, लेकिन अगर गेंदबाज एक ही एक्शन से बार-बार सवाल बदल दे, तो मुकाबले का पलड़ा उसके पक्ष में झुकने लगता है.
गॉल टेस्ट में भारत को मानव सुथार में शायद इसी तरह का गेंदबाज दिखाई दिया है.
सिर्फ दो टेस्ट का करियर किसी खिलाड़ी के बारे में अंतिम फैसला सुनाने के लिए पर्याप्त नहीं होता. लेकिन 24 साल के सुथार ने इन दो मुकाबलों में जो संकेत दिए हैं, वे इतने मजबूत जरूर हैं कि उन्हें गौर से देखने की जरूरत है.
खासकर उनकी तीन गेंदें- तीन अलग बल्लेबाजों के खिलाफ, तीन अलग अंदाज में...इस बात का मजबूत संकेत हैं कि भारत को इस युवा स्पिनर में सिर्फ एक गेंदबाज नहीं, बल्कि ऐसा विकेट-टेकर मिल सकता है, जो हर गेंद पर बल्लेबाज के सामने नया सवाल खड़ा करने की काबिलियत रखता है.
पहली गेंद: ज्योमेट्री का सवाल
गॉल टेस्ट के चौथे दिन पसिंदु सोरियाबंडारा के सामने सुथार ने गेंद को मिडिल और लेग के आसपास फ्लोट कराया. गेंद में ज्यादा टर्न नहीं था और उसने लगभग उसी दिशा में अपना सफर जारी रखा, जिस दिशा में वह आई थी.
सोरियाबंडारा ने डिफेंस खेलते हुए अंदरूनी किनारे की उम्मीद की, लेकिन गेंद वहां थी ही नहीं. गेंद सीधे उनके पिछले पैर पर लगी. भारत ने रिव्यू लिया और बॉल-ट्रैकिंग ने तीनों रेड दिखा दिए - LBW...
सुथार ने बल्लेबाज को टर्न से नहीं, बल्कि सीधी गेंद से मात दी.
दूसरी गेंद: लालच का सवाल
सोनल दिनुषा के सामने कहानी बदल गई. वह दूसरी पारी में शतक से सिर्फ 16 रन दूर थे. सुथार ने इस बार गेंद को लेग स्टंप के बाहर फेंका, फ्लाइट दी और बाएं हाथ के बल्लेबाज को शॉट खेलने का न्योता दिया.
दिनुषा ने गेंद को क्लिप करने की कोशिश की. गेंद बल्ले के अंदरूनी किनारे से टकराई, पैड से लगी और उछलकर लेग-गली में चली गई. कैच...
यहां सुथार ने बल्लेबाज को आउट करने के लिए विकेट पर हमला नहीं किया. उन्होंने बल्लेबाज को शॉट खेलने के लिए मजबूर किया और गलती का इंतजार नहीं किया- गलती की गुंजाइश खुद बनाई.
तीसरी गेंद: गति और टर्न का सवाल
फिर आए प्रभात जयसूर्या.
इस बार सुथार ने गति बढ़ाई और ड्रिफ्ट का इस्तेमाल किया. गेंद की रफ्तार 92.7 किमी/घंटा थी. इन-ड्रिफ्ट करती हुई लेंथ गेंद ऐसी दिखाई दी जैसे बाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए बैकफुट से आसानी से डिफेंड की जा सकती है.
लेकिन गेंद पिच पर पड़ी, ग्रिप हुई और मामूली-सा बाहर निकली. इतना ही काफी था. बल्लेबाज के बाहरी किनारे को छकाते हुए गेंद ऑफ स्टंप से जा टकराई.
तीन गेंदें. तीन अलग गति और लेंथ. तीन अलग सवाल… और तीनों का जवाब- विकेट.
यही शायद सुथार की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है.
... सिर्फ लेफ्ट-आर्म स्पिनर नहीं, सवाल बदलने वाला गेंदबाज
भारत के बल्लेबाज केएल राहुल ने सुथार की इसी खूबी को सबसे सटीक तरीके से पकड़ा.
उनके मुताबिक सुथार की असली ताकत एक ही एक्शन और एक ही एंगल से आने वाली ‘सूक्ष्म विविधताएं’ हैं. वह अपनी आर्म स्पीड में बड़ा बदलाव किए बिना गेंद को धीमा या तेज कर सकते हैं. गॉल जैसी परिस्थितियों में उन्होंने हवा से मिलने वाली ड्रिफ्ट का भी शानदार इस्तेमाल किया.
यही फर्क बेहद महत्वपूर्ण है.एक ऑर्थोडॉक्स स्लो लेफ्ट-आर्म स्पिनर के लिए एक ही एक्शन से कभी गेंद को अंदर लाकर एलबीडब्ल्यू हासिल करना और कभी उसे बाहर निकालकर बल्ले का किनारा लेना बहुत बड़ी खूबी है.
आमतौर पर ऐसे स्पिनर के बारे में सोचते हुए पहला ख्याल आता है- एक जगह गेंद डालते रहो, पिच को काम करने दो और दबाव बनाकर बल्लेबाज की गलती का इंतजार करो.
सुथार की शुरुआती कहानी कुछ अलग है.
वह बल्लेबाज को यह महसूस करा सकते हैं कि गेंद में ज्यादा कुछ हो ही नहीं रहा, लेकिन अगले ही पल गेंद की गति, ड्रिफ्ट, लेंथ या टर्न बदलकर पूरा सवाल बदल देते हैं.
17 विकेट सिर्फ आंकड़ा नहीं हैं
सिर्फ दो टेस्ट में सुथार के नाम 17 विकेट हैं. इसमें दो 5 विकेट हॉल, एक मैच में 10 विकेट और 27.2 की स्ट्राइक रेट शामिल है. उनकी इकॉनमी रेट भी महज 2.49 रन प्रति ओवर है.
आंकड़े शानदार हैं, लेकिन उनसे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है उन विकेटों का तरीका. सुथार सिर्फ एक तरह से बल्लेबाजों को आउट नहीं कर रहे. वह एक ही गेंदबाजी एक्शन से अलग-अलग रास्ते निकाल रहे हैं.
केएल राहुल ने भी इसी ओर इशारा किया. उनका मानना है कि सुथार की निरंतरता बल्लेबाज को धीरे-धीरे एक मुश्किल मानसिक स्थिति में डाल देती है. अगर गेंद टर्न नहीं कर रही है तो बल्लेबाज सोचता है कि उसे कुछ करना पड़ेगा... और जैसे ही बल्लेबाज उस मानसिकता में पहुंचता है, गेंदबाज मुकाबला जीतने की स्थिति में आ जाता है.
यानी सुथार की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ गेंद का टर्न होना नहीं है. उनकी ताकत यह है कि वह बल्लेबाज को अगली गेंद के बारे में निश्चित नहीं होने देते.
भारत की मजबूत पाइपलाइन का एक और नतीजा
सुथार का टेस्ट क्रिकेट में अचानक आ जाना भी नहीं हुआ है. प्रथम श्रेणी क्रिकेट, इंडिया ए के दौरे और ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका तथा इंग्लैंड जैसी अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने के अनुभव ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार होने का मौका दिया है.
केएल राहुल के मुताबिक घरेलू क्रिकेट से सीधे टेस्ट क्रिकेट तक का सफर बेहद बड़ा होता है. लेकिन भारत का मौजूदा सिस्टम खिलाड़ियों को टेस्ट कैप मिलने से पहले ही अपनी कमजोरियों, अपनी ताकत और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की अपेक्षाओं को समझने का मौका देता है.
सुथार के शुरुआती प्रदर्शन में उस तैयारी की झलक साफ दिखाई देती है.
असली सवाल अब शुरू होता है
बेशक, दो टेस्ट के बाद यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत को अपना अगला महान बाएं हाथ का स्पिनर मिल गया है. टेस्ट क्रिकेट लंबी परीक्षा है और हर नई सीरीज एक अलग सवाल लेकर आएगी.
लेकिन सुथार ने शुरुआती दो मुकाबलों में इतना जरूर दिखा दिया है कि उन्हें सिर्फ ‘एक और लेफ्ट-आर्म स्पिनर’ समझना भूल होगी.
वह बल्लेबाज को सिर्फ गेंद नहीं फेंकते, सवाल फेंकते हैं -
विश्व मोहन मिश्र