स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की फिटनेस ने टीम इंडिया की टेंशन बढ़ा दी है. बुमराह इंग्लैंड दौरे पर लगी चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए, जिसके कारण उन्हें श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर होना पड़ा. बुमराह की जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को 15 अगस्त से शुरू होने जा रही टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया.
अब पूर्व भारतीय ऑलराउंडर करसन घावरी ने बुमराह को लेकर भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) और टीम मैनेजमेंट को बड़ी सलाह दी है. घावरी का मानना है कि बूम बूम बुमराह को बार-बार जल्दबाजी में मैदान पर उतारने के बजाय उन्हें लंबा ब्रेक देकर पूरी तरह फिट किया जाना चाहिए.
दो वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा रहे करसन घावरी ने मिड-डे से बातचीत में कहा, 'बुमराह को पांच-छह महीने या जरूरत पड़े तो एक साल का ब्रेक लेना चाहिए. जब तक वह 100 प्रतिशत फिट नहीं हो जाते, उन्हें वापस नहीं आना चाहिए.' घावरी ने कहा कि बुमराह अक्सर पूरी तरह फिट हुए बिना बड़े टूर्नामेंट या सीरीज में उतर जाते हैं. इसके बाद वर्कलोड बढ़ने पर उनका शरीर जवाब दे देता है.
उन्होंने कहा, 'अगर कोई खिलाड़ी सिर्फ 50-60 प्रतिशत फिट है तो उसे टीम में चुनना ही नहीं चाहिए. फिर बीच टूर्नामेंट में वह चोटिल हो जाता है और टीम का पूरा संतुलन बिगड़ जाता है. यह खिलाड़ी और देश, दोनों के लिए अच्छा नहीं है.'
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बुमराह तीनों फॉर्मेट क्यों खेल रहे?
75 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर का मानना है कि मौजूदा हालात में बुमराह के लिए तीनों फॉर्मेट खेलना व्यावहारिक नहीं है. उन्होंने सुझाव दिया कि टीम मैनेजमेंट को बुमराह का इस्तेमाल मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में करना चाहिए, क्योंकि यह भारत के लिए सबसे अहम फॉर्मेट है. घावरी कहते हैं, 'अगर बुमराह IPL (इंडियन प्रीमियर लीग), टी20 इंटरनेशनल और ओडीआई भी लगातार खेलेंगे तो उनका शरीर इतनी अधिक मांग को लंबे समय तक झेल नहीं पाएगा.'
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करसन घावरी ने अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार को भी दोबारा भारतीय टीम में मौका देने की मांग की. उन्होंने कहा कि दोनों गेंदबाज पिछले कुछ सीजन से आईपीएल में लगातार खेल रहे हैं और फिट भी हैं. घावरी ने बताया, 'शमी और भुवनेश्वर लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं और चोट से भी दूर रहे हैं. चयनकर्ताओं को उनके अनुभव का फायदा उठाना चाहिए.'
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करसन घावरी का मानना है कि अगर मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार की वापसी होती है तो मोहम्मद सिराज और जसप्रीत बुमराह पर दबाव काफी कम हो जाएगा. उन्होंने सुझाव दिया कि टेस्ट क्रिकेट में शमी और सिराज के बीच रोटेशन अपनाया जा सकता है, जबकि टी20 क्रिकेट में भुवनेश्वर कुमार का अनुभव टीम के काफी काम आ सकता है.
जसप्रीत बुमराह पिछले कुछ वर्षों में कई बार चोटिल हुए हैं और उनके वर्कलोड मैनेजमेंट को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर होने के बाद बीसीसीआई के फिटनेस सिस्टम और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है. ऐसे में करसन घावरी की सलाह भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए एक बड़ा संकेत मानी जा रही है. अब देखना होगा कि बोर्ड बुमराह के करियर को लंबा करने के लिए उनके वर्कलोड मैनेजमेंट में कोई बड़ा बदलाव करता है या नहीं.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क