भारत और श्रीलंका के बीच गॉल के गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में आयोजित टेस्ट मैच बारिश से प्रभावित रहा. पांचवें दिन भी बारिश आई, मगर भारतीय टीम की जीत के लगभग 5 मिनट बाद. इस बार जब बारिश आई तो पिच बचाने की हड़बड़ी नहीं थी क्योंकि मुकाबला समाप्त हो चुका था. हालांकि मंजुला की अगुवाई में गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम के करीब 130 ग्राउंड्समैन का काम अभी बाकी था.
पूरे टेस्ट के दौरान बारिश ने बार-बार खेल में बाधा डाली. कभी अचानक बादल घिरे तो कभी तेज हवा के साथ बारिश आई. हर बार ग्राउंड स्टाफ कुछ ही मिनटों में मैदान को कवर्स से ढकने के लिए दौड़ पड़ा. उनकी मेहनत ने भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को भी प्रभावित किया. उन्होंने टेस्ट के बाद अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में तीन तस्वीरों के जरिए ग्राउंड स्टाफ के प्रयासों को दिखाया. इनमें तेज बारिश के बीच कर्मचारियों को मैदान संभालते, पूरे ग्राउंड को कवर्स से ढका हुआ और मौसम साफ होने के बाद भारी कवर हटाते देखा जा सकता है.
ऋषभ पंत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, 'ग्राउंड्समैन और सपोर्ट स्टाफ का शुक्रिया. आपकी मेहनत और सहयोग अविश्वसनीय था, खासकर बारिश के बीच. मैं इसकी वास्तव में सराहना करता हूं.'
इंटरनेशनल मुकाबले के दौरान गॉल में करीब 130 लोगों की टीम मैदान संभालती है, लेकिन इनमें सिर्फ 16 स्थायी कर्मचारी हैं. बड़े इवेंट के समय 10 कर्मचारियों को हम्बनटोटा से बुलाया जाता है, जबकि बाकी लोगों को मैच और प्रैक्टिस सेशन के लिए दिहाड़ी पर रखा जाता है. मंजुला ने TOI को बताया कि दैनिक कर्मचारियों को प्रतिदिन 2500 से 4000 श्रीलंकाई रुपये मिलते हैं. इतने लोगों की मौजूदगी के बावजूद बारिश के समय मैदान पर अफरा-तफरी नहीं दिखती. हर ग्रुप की जिम्मेदारी पहले से तय रहती है. किसी को पिच संभालनी होती है तो कोई स्क्वायर, रन-अप और आउटफील्ड को कवर करने में जुटता है.
गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम की भौगोलिक स्थिति ग्राउंड स्टाफ के लिए चुनौती भी है और मौसम का अंदाजा लगाने का जरिया भी. कर्मचारियों की नजर गॉल फोर्ट के पास हिंद महासागर की ओर रहती है. समुद्र के ऊपर बादल बनते दिखाई देते ही टीम अलर्ट हो जाती है. आधिकारिक संकेत मिलते ही सबसे पहले पिच, फिर स्क्वायर और गेंदबाजों के रन-अप को ढका जाता है. इसके बाद पूरे आउटफील्ड पर कवर बिछाए जाते हैं. मंजुला के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चीज 'रिएक्शन टाइम' है.
बस 5 मिनट और मैदान पूरी तरह कवर
गॉल में कई बार बारिश बेहद तेज होती है, लेकिन ज्यादा देर नहीं चलती. ऐसे में कुछ मिनट की देरी भी मैदान को काफी नुकसान पहुंचा सकती है. गॉल के ग्राउंड स्टाफ की रफ्तार का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पूरी टीम पांच मिनट से भी कम समय में मैदान को कवर कर सकती है. बारिश का संकेत मिलते ही कर्मचारी अलग-अलग दिशाओं से दौड़ते हुए कवर्स लेकर पहुंचते हैं. पिच और स्क्वायर को ढकने वाली पहली टीम को खास तालमेल रखना पड़ता है, ताकि अलग-अलग कवर आपस में न उलझें. इसके बाद रन-अप और बाकी आउटफील्ड को सुरक्षित किया जाता है.
काफी वजनी होते हैं ये कवर
मैदान को ढकना केवल तेजी का काम नहीं है. इसके लिए जबरदस्त शारीरिक मेहनत भी करनी पड़ती है. मैदान पर इस्तेमाल होने वाला 100x100 आकार का एक कवर 650 किलोग्राम से भी ज्यादा वजनी हो सकता है. पूरे मैदान को सुरक्षित रखने के लिए करीब 28 कवर इस्तेमाल किए जाते हैं. यानी बारिश शुरू होते ही कर्मचारियों को कुछ मिनट के भीतर हजारों किलो वजन के इन कवर्स को सही जगह तक पहुंचाना और बिछाना होता है.
समुद्र के पास होने के कारण तेज क्रॉसविंड एक अलग चुनौती पेश करती है. भारी कवर्स को अपनी जगह बनाए रखने के लिए 300 से ज्यादा रबर टायर तैयार रखे जाते हैं. कवर बिछाने के बाद जरूरत पड़ने पर इन टायरों को उनके ऊपर रखा जाता है, ताकि हवा उन्हें हटा ना सके.
बारिश के कारण मुकाबले में कई बार रुकावट आई, लेकिन हर बार ग्राउंड स्टाफ का असली इम्तिहान बरसात शुरू होने के साथ ही स्टार्ट हो जाता था. कवर बिछाने के बाद मौसम साफ होने पर उन्हें तेजी से हटाना और मैदान को दोबारा खेल के लायक तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण था.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क