कोलंबो में भारत के सामने श्रीलंका ने ऐसी दीवार खड़ी कर दी, जिसे आखिरी दिन भी भारतीय गेंदबाज नहीं तोड़ सके. सोनल दिनुषा की 133 रनों की नाबाद पारी ने श्रीलंका को हार के मुंह से बाहर निकालते हुए दूसरे और आखिरी टेस्ट को ड्रॉ करा दिया. पांचवें दिन की थकी हुई पिच, फॉलोऑन का दबाव और पैरों में उठते क्रैम्प के बावजूद दिनुशा पूरे दिन डटे रहे. भारत को आखिरकार चार विकेट नहीं मिल सके और मुकाबला बराबरी पर खत्म हुआ.
भारत ने हालांकि दो मैचों की सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली. गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में टीम इंडिया ने 165 रनों से शानदार जीत दर्ज की थी. लेकिन कोलंबो के SSC मैदान पर श्रीलंका ने जिस जुझारूपन का प्रदर्शन किया, वह मेजबान टीम के लिए किसी जीत से कम नहीं रहा.
दिनुषा बने भारत के रास्ते की सबसे बड़ी दीवार
दिनुषा ने 264 गेंदों का सामना करते हुए 420 मिनट क्रीज पर बिताए और 133 रनों की नाबाद पारी खेली. इस सीरीज में यह उनका तीसरा शतक और चार पारियों में चौथा 50+ स्कोर रहा. दो टेस्ट में उन्होंने कुल 722 गेंदें खेलीं और 1139 मिनट बल्लेबाजी की.
25 साल के दिनुषा ने एक और खास रिकॉर्ड अपने नाम किया. वह टेस्ट क्रिकेट में फॉलोऑन के बाद एक ही मैच में दो शतक लगाने वाले दुनिया के सिर्फ तीसरे बल्लेबाज बने. उनसे पहले भारत के विजय हजारे और जिम्बाब्वे के एंडी फ्लावर यह कारनामा कर चुके हैं.
उनकी इस जुझारू पारी के दम पर श्रीलंका ने अपनी दूसरी पारी 429/9 पर घोषित की. इससे उसे कुल 216 रनों की बढ़त मिली. इसके बाद दोनों टीमों ने हाथ मिलाए और मुकाबला ड्रॉ पर खत्म हो गया.
... सुबह लगा था कुछ ही देर की बात है
श्रीलंका ने पांचवें दिन 229/6 से शुरुआत की थी और उसकी बढ़त महज 16 रन थी. ऐसा लग रहा था कि भारतीय गेंदबाज जल्द ही पारी समेट देंगे. लेकिन दिनुषा और केशरा नुवांथा ने पूरा समीकरण बदल दिया.
दोनों ने सातवें विकेट के लिए 246 गेंदों में 112 रन जोड़े. सबसे खास बात यह रही कि इस दौरान श्रीलंका ने पहला सत्र बिना कोई विकेट गंवाए निकाल दिया. दिनुषा ने 196 गेंदों में अपना शतक पूरा किया और भारत की जीत की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया.
लंच के बाद भारत को पहली सफलता मानव सुथार ने दिलाई. उन्होंने नुवांथा को आउट किया और ध्रुव जुरेल ने स्लिप में शानदार कैच लपका. इसके बाद दिनुषा ने प्रभात जयसूर्या के साथ 25 रन जोड़े. जयसूर्या को रवींद्र जडेजा ने जुरेल के हाथों दूसरी स्लिप में कैच कराया.
आखिरी बल्लेबाजों ने भी नहीं छोड़ी उम्मीद
भारत को लगा कि अब जीत ज्यादा दूर नहीं है, लेकिन दिनुषा को एक और जिद्दी साथी मिल गया- लाहिरू कुमारा. दोनों ने आठवें विकेट के लिए 170 गेंदों में 47 रन जोड़ दिए. कुमारा ने 90 गेंदों में 12 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों को लगातार परेशान किया.
जडेजा ने आखिरकार कुमारा को भी पवेलियन भेज दिया, लेकिन असिथा फर्नांडो ने दिनुषा का साथ नहीं छोड़ा. दिनुषा अंत तक 133 रन बनाकर नाबाद रहे और श्रीलंका को सुरक्षित निकाल ले गए.
दिनुषा ने बदला अपना अंदाज
दिनुषा की बल्लेबाजी में स्वाभाविक रूप से आकर्षण है. ड्राइव और पुल उनके पसंदीदा शॉट हैं, लेकिन पांचवें दिन उन्हें खूबसूरती नहीं, सिर्फ बचाव चाहिए था. उन्होंने स्पिनरों की टर्न को बैकफुट पर जाकर दबाया और तेज गेंदबाजों के खिलाफ गेंद के पीछे अच्छी तरह रहे.
भारत ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी. शॉर्ट गेंदों और लेग साइड की गेंदों के जरिए दिनुषा को स्ट्राइक से दूर रखने की कोशिश हुई, ताकि निचले क्रम के बल्लेबाजों को स्पिन के सामने लाया जा सके. रणनीति कुछ हद तक काम भी आई, लेकिन नुवांथा और कुमारा ने अपेक्षित आक्रामक शॉट खेलने के बजाय संयम दिखाया.
भारत को तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज से भी वह धार नहीं मिली, जिसकी उसे जरूरत थी. कप्तान शुभमन गिल भी उस समय ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सके, जब मुकाबला भारत के हाथ से फिसल रहा था. एक समय वह ड्रेसिंग रूम भी गए और कोचिंग स्टाफ से बातचीत करते नजर आए.
लेकिन तब तक दिनुशा और श्रीलंका के निचले क्रम के बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजी की लहरों को कुंद कर चुके थे.
भारत के लिए जीत में भी छिपी बड़ी चिंता
भारत के लिए सकारात्मक पहलू यह रहा कि उसने जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज जीतने के बाद पहली बार विदेशी धरती पर टेस्ट सीरीज अपने नाम की. शुभमन गिल की कप्तानी में यह उनकी पहली विदेशी टेस्ट सीरीज जीत भी रही.
... लेकिन सीरीज जीत के बावजूद कोलंबो का पांचवां दिन भारतीय टीम के लिए कई सवाल छोड़ गया. श्रीलंका के चार निचले क्रम के विकेट समय पर नहीं गिरा पाना उसे खलेगा. लगातार दो पारियों में गेंदबाजी करने और पांचवें दिन की पिच के कमजोर पड़ने को भारत अपनी दलील बना सकता है, लेकिन अंदर से टीम यह जरूर महसूस करेगी कि टेस्ट क्रिकेट की एक पुरानी कमजोरी अब भी पूरी तरह दूर नहीं हुई है- निचले क्रम को जल्दी समेटने में नाकामी.
श्रीलंका के लिए यह ड्रॉ जीत जैसा था और उसके नायक रहे सोनल दिनुषा, जिन्होंने पूरे दिन भारत और हार के बीच ऐसी दीवार खड़ी कर दी, जिसे आखिरकार कोई भारतीय गेंदबाज पार नहीं कर सका.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क