बल्लेबाजी ने बचाई लाज, लेकिन गेंदबाज कब तक लेंगे उधार की जीत?

गौतम गंभीर की आक्रामक टी20 रणनीति को आठवें नंबर तक मौजूद बल्लेबाजी की गहराई का साथ मिल रहा है, मगर हर मैच में बल्लेबाजों से चमत्कार की उम्मीद नहीं की जा सकती. वर्ल्ड चैंपियन भारत को जीत की लय बनाए रखने के लिए गेंदबाजी में भी सुधार करना होगा.

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न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अब गेंदबाजों के प्रदर्शन पर रहेंगी निगाहें. (Photo, AFP) न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अब गेंदबाजों के प्रदर्शन पर रहेंगी निगाहें. (Photo, AFP)

विश्व मोहन मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 24 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:00 AM IST

गौतम गंभीर की टी20 रणनीति में दम है, भारतीय बल्लेबाज बड़े से बड़ा लक्ष्य चेज करने का माद्दा दिखा रहे हैं. आठवें नंबर तक बल्लेबाजी की ताकत टीम को संकट से निकाल रही है, लेकिन गेंदबाजों की नाकामी कब तक ढकी रहेगी?

टी20 क्रिकेट में 200 रन बनाना कभी जीत की गारंटी माना जाता था. अब 225 रन बनाने के बाद भी जीत पक्की नहीं है. न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च में भारतीय टीम ने यही दिखाया. 226 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया, सीरीज में 1-0 की बढ़त भी बना ली, लेकिन इस जीत के भीतर एक ऐसी चिंता छिपी रही, जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है. 

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भारतीय बल्लेबाजों ने मैच जिता दिया, मगर गेंदबाजों ने मुकाबले को वहां पहुंचा दिया था, जहां एक छोटी-सी चूक भी भारी पड़ सकती थी.

गौतम गंभीर की टी20 रणनीति पर सवाल उठते रहे हैं. उनकी आक्रामक सोच को लेकर आलोचक अपनी दलीलें देते हैं. लेकिन बल्लेबाजी के प्रदर्शन को देखें तो भारतीय टीम इस प्रारूप में वर्ल्ड चैम्पियन के अंदाज में खेलती दिखाई दे रही है. बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय घबराहट नहीं, रनरेट का दबाव नहीं और विकेट गिरने के बाद भी हमले की क्षमता बरकरार. यह भारतीय बल्लेबाजी की ताकत है. समस्या यह है कि बल्लेबाजों के इस दमखम के बीच गेंदबाज लगातार अपनी जिम्मेदारी के सवालों से बच नहीं सकते.

क्राइस्टचर्च में भारत के सामने 226 रनों का लक्ष्य था. टी20 में यह ऐसा स्कोर है, जिसे देखकर किसी भी टीम को अपनी गेंदबाजी पर भरोसा होना चाहिए. लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड की इस उम्मीद को टिकने नहीं दिया.

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संजू सैमसन ने 33 गेंदों पर 67 रन बनाकर आक्रामक शुरुआत की. अभिषेक शर्मा ने 12 गेंदों में 29 रन ठोककर रन बनाने की रफ्तार को तेज रखा. श्रेयस अय्यर ने 42 रनों की पारी से योगदान दिया, जबकि नमन धीर ने नाबाद 42 रन बनाकर जीत की औपचारिकता पूरी की. भारत ने 19.4 ओवरों में 6 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया.

इस जीत का सबसे अहम पहलू यह था कि भारत किसी एक बल्लेबाज के भरोसे नहीं रहा. एक ने शुरुआत की, दूसरे ने गति बनाए रखी और फिर बाकी बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी संभाली. यही वह गहराई है, जो भारतीय टीम को बड़े लक्ष्य का पीछा करने का भरोसा देती है.

आठवें नंबर तक बल्लेबाजी के विकल्प होने का फायदा सिर्फ इतने तक सीमित नहीं है कि टीम में ज्यादा बल्लेबाज हैं. इसका मतलब यह भी है कि शीर्ष क्रम के विकेट गिरने पर रन बनाने की रणनीति पूरी तरह बदलनी नहीं पड़ती. विरोधी गेंदबाजों के लिए राहत का समय कम हो जाता है. भारत की बल्लेबाजी इसी सोच के साथ आगे बढ़ती दिख रही है.

गंभीर की रणनीति का बचाव करने वालों के पास सबसे बड़ा तर्क यही है कि टी20 में आक्रामकता और बल्लेबाजी की गहराई से मैच का रुख बदला जा सकता है. भारत की मौजूदा बल्लेबाजी इस तर्क को ताकत देती है.

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जब टीम के पास लगातार प्रहार करने वाले बल्लेबाज हों, तो 220 रनों का लक्ष्य भी असंभव नहीं लगता. पहले बल्लेबाजी करते हुए भी टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने की कोशिश कर सकती है, क्योंकि उसके पास आखिरी ओवरों तक तेजी से रन बनाने के विकल्प मौजूद रहते हैं.

लेकिन इस रणनीति का अर्थ यह नहीं है कि गेंदबाजी की कमजोरियों को स्वीकार कर लिया जाए. आक्रामक बल्लेबाजी टीम की ताकत है, गेंदबाजी की नाकामी उसका स्थायी विकल्प नहीं हो सकती. गंभीर की योजना तभी ज्यादा प्रभावी होगी, जब बल्लेबाजों के साथ गेंदबाज भी मैच पर नियंत्रण रखने की क्षमता दिखाएं.

बल्लेबाज कब तक ढकेंगे गेंदबाजों की पोल?

न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहा. टी20 में रन बनना स्वाभाविक है. हर गेंदबाज हर दिन किफायती नहीं रह सकता. लेकिन सवाल तब उठता है, जब विरोधी बल्लेबाज बार-बार गेंदबाजी पर हावी होने लगें और टीम को बचाने के लिए बल्लेबाजों को असाधारण प्रदर्शन करना पड़े.

पावरप्ले में विकेट निकालना, बीच के ओवरों में साझेदारियां तोड़ना और डेथ ओवरों में रन रोकना किसी भी मजबूत टी20 टीम की बुनियादी जरूरतें हैं. भारतीय गेंदबाजों को इन तीनों मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन करना होगा. सिर्फ बड़े स्कोर का पीछा करने की क्षमता किसी टीम को हर परिस्थिति में जीत नहीं दिला सकती.

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मान लीजिए, किसी मैच में शीर्ष क्रम जल्दी आउट हो जाए या पिच बल्लेबाजी के लिए मुश्किल हो. ऐसी स्थिति में 225 रनों का लक्ष्य भी पहाड़ बन सकता है. तब टीम को गेंदबाजों से मिले अतिरिक्त भरोसे की जरूरत होगी, न कि इस उम्मीद की कि बल्लेबाज फिर कोई चमत्कार कर देंगे.

भारत की बल्लेबाजी ने फिलहाल गेंदबाजी की कमियों का असर कम कर दिया है. लेकिन हर जीत को इसी तरह हासिल करना आसान नहीं होगा. विपक्षी टीमें भी भारतीय बल्लेबाजी की ताकत को समझ रही हैं और उसी हिसाब से अपनी रणनीति बनाएंगी.

बड़े लक्ष्य का पीछा करने में भारत की सफलता विरोधियों पर दबाव जरूर बढ़ाएगी. साथ ही भारतीय गेंदबाजों पर भी दबाव रहेगा कि वे हर बार अपनी टीम को 220 से ज्यादा रन बनाने की मजबूरी में न डालें.

यहीं गंभीर की रणनीति की असली परीक्षा है. आक्रामक बल्लेबाजी जारी रहनी चाहिए, लेकिन गेंदबाजी में सुधार के बिना टीम का पूरा ढांचा एकतरफा हो सकता है. बल्लेबाजों को हर मैच में असाधारण प्रदर्शन करने की जरूरत न पड़े, यह सुनिश्चित करना भी कोच और टीम प्रबंधन की जिम्मेदारी है.

आलोचक गंभीर की रणनीति में नुक्स निकालते रहें, लेकिन भारतीय बल्लेबाजी के प्रदर्शन को खारिज नहीं किया जा सकता. वर्ल्ड चैम्पियन टीम जिस निडरता से बड़े लक्ष्य का पीछा कर रही है, वह उसकी सबसे बड़ी ताकत है. अब गेंदबाजों को भी इस ताकत के अनुरूप प्रदर्शन करना होगा.

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फिलहाल बल्लेबाज जीत दिला रहे हैं, लेकिन हर बार उनसे संकटमोचक बनने की उम्मीद नहीं की जा सकती. गंभीर की टी20 सोच को पूरी तरह सफल साबित करने के लिए गेंदबाजों को भी अपना हिस्सा निभाना होगा. क्योंकि उधार की जीत का सिलसिला चाहे जितना रोमांचक हो, लंबे टूर्नामेंट में उसका हिसाब चुकाना ही पड़ता है.

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