बुमराह-सिराज से गुर सीखा... गुरनूर बरार के इरादे खतरनाक, अब तीनों फॉर्मेट में चाहिए जगह

भारत के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे सीनियर गेंदबाजों के साथ समय बिताकर अपनी गेंदबाजी में लेंथ और निरंतरता पर काम किया है. श्रीलंका में दो मल्टी-डे मैचों में 13 विकेट लेने वाले गुरनूर अब खुद को ऐसा ऑल-फॉर्मेट पेसर बनाना चाहते हैं.

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गुरनूर का मिशन: ऑल-फॉर्मेट! (Photo@Sri Lanka Cricket) गुरनूर का मिशन: ऑल-फॉर्मेट! (Photo@Sri Lanka Cricket)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • बेंगलुरु,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:14 PM IST

भारतीय टीम में जगह बनाने के बाद गुरनूर बरार की नजर अब सिर्फ मौके हासिल करने पर नहीं, बल्कि खुद को ऐसा तेज गेंदबाज बनाने पर है जो तीनों फॉर्मेट में लगातार गेंदबाजी कर सके और भारी वर्कलोड झेल सके. पिछले तीन महीने उनके लिए इसी दिशा में सीखने का दौर रहे हैं. जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा जैसे सीनियर तेज गेंदबाजों के करीब रहकर उन्होंने अपनी गेंदबाजी की सबसे अहम कमी पर काम किया-सही लेंथ पर लगातार गेंद डालना.

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26 साल के पंजाब के इस तेज गेंदबाज ने भारत के लिए अब तक छह वनडे खेले हैं और 11 विकेट अपने नाम किए हैं. हालांकि उनकी इकॉनमी करीब सात रन प्रति ओवर है, लेकिन गुरनूर मानते हैं कि राष्ट्रीय टीम के साथ बिताए समय ने उनकी गेंदबाजी में वह समझ पैदा की है, जो आने वाले समय में उन्हें और बेहतर बनाएगी.

गुरनूर ने कहा कि रणजी ट्रॉफी और भारत ए के प्रदर्शन के दम पर उन्हें टीम इंडिया में जगह मिली, लेकिन उनका असली मकसद इससे आगे था. वह यह समझना चाहते थे कि किस पिच पर किस बल्लेबाज के खिलाफ किस लेंथ से गेंदबाजी करनी है और उस लेंथ पर कितनी निरंतरता रखनी है.

दलीप ट्रॉफी में नॉर्थ जोन के लिए खेल रहे बरार ने टूर्नामेंट से इतर चुनिंदा मीडिया से बातचीत में यह बात कही.

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... बुमराह-सिराज को करीब से देखना

गुरनूर के लिए टीम इंडिया का ड्रेसिंग रूम सिर्फ चयन की उपलब्धि नहीं, बल्कि सीखने का मौका भी रहा. मुख्य कोच गौतम गंभीर, गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल और सीनियर तेज गेंदबाजों के साथ बातचीत ने उनकी सोच को काफी प्रभावित किया.

उन्होंने बताया कि बुमराह और सिराज को करीब से देखना अपने आप में अनुभव रहा. वे कैसे तैयारी करते हैं, किस तरह बल्लेबाज पर लगातार दबाव बनाते हैं और अपनी गेंदबाजी पर टिके रहते हैं- इन चीजों से गुरनूर ने काफी कुछ सीखा.

उन्हें जो सबसे अहम सलाह मिली, वह थी- जिस वजह से टीम में आए हो, उसे मत बदलो. अपनी रफ्तार और लेंथ पर भरोसा रखो, लेकिन अलग-अलग परिस्थितियों में गेंदबाजी करने का तरीका सीखते रहो. मैचों के अनुभव के साथ यह हुनर बेहतर होता जाएगा.

‘जितना ज्यादा गेंदबाजी करूंगा, शरीर उतना मजबूत होगा’

गुरनूर का लक्ष्य सिर्फ तकनीकी रूप से बेहतर होना नहीं है. वह अपने शरीर को भी ऐसे तैयार करना चाहते हैं कि लंबे स्पेल और लगातार मैचों का दबाव झेल सकें.

उनकी सोच पुराने दौर के तेज गेंदबाजों जैसी है- गेंद हाथ में हो तो बस गेंदबाजी करते रहो.

श्रीलंका में इसका नमूना भी देखने को मिला, जहां श्रीलंका ए और एसएलसी इलेवन के खिलाफ दो मल्टी-डे मैचों में उन्होंने कुल 54.3 ओवर गेंदबाजी की और 13 विकेट चटकाए.

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गुरनूर के मुताबिक, मैच में उतरने के बाद वह खुद को खेल से बाहर नहीं करना चाहते. इसके लिए रिकवरी, नींद और शरीर की देखभाल जरूरी है, लेकिन उनका मानना है कि शरीर को लगातार चुनौती देने से वह मजबूत होता है.

धीमी पिच पर 13 विकेट ने बढ़ाया भरोसा

श्रीलंका में मिली सफलता गुरनूर के आत्मविश्वास के लिए भी खास रही. धीमी पिचों पर 13 विकेट लेने के बाद उन्हें भरोसा हुआ कि वह अलग-अलग परिस्थितियों में प्रभाव डाल सकते हैं.

उनकी सोच साफ है- सामने कौन बल्लेबाज है, पिच कैसी है या मैदान कैसा है, इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए. मुकाबला पहले खुद से है.

गुरनूर का मानना है कि गेंदबाज के लिए सबसे बड़ा हथियार उसका दिमाग है. अगर गेंदबाज पहले ही मान ले कि पिच पर कुछ नहीं है, तो वह बल्लेबाज से एक कदम पीछे हो जाता है.

इसीलिए वह धीमी पिच पर विकेट पर गेंद मारने, पैड पर निशाना साधने और डबल-पेस्ड विकेट पर सीम की स्थिति बदलने जैसे विकल्पों पर भरोसा करते हैं.

उनका संदेश भी उतना ही स्पष्ट है- पिच धीमी हो, तेज हो, हरी हो या सपाट... गेंदबाज के पास बहाने नहीं, विकल्प होने चाहिए.

... और यही सोच गुरनूर को एक ऐसे तेज गेंदबाज में बदलने की दिशा में ले जा रही है, जो सिर्फ किसी एक फॉर्मेट का खिलाड़ी नहीं, बल्कि ऑल-फॉर्मेट पेसर और लंबा वर्कलोड उठाने वाला भरोसेमंद गेंदबाज बनना चाहता है.

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