टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर संजय बांगड़ की ट्रांस विमेन बेटी अनाया बांगड़ के लिए एक बेहद शानदार खबर आई है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) ने उन्हें महिलाओं के लोकल क्रिकेट में खेलने की हरी झंडी दे दी है.
कुछ समय पहले तक लड़के के तौर पर मुंबई के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेलने वाली अनाया अब अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं. इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में अनाया बांगड़ ने बताया कि एक वक्त ऐसा आ गया था जब उन्हें लगने लगा था कि उनका क्रिकेट करियर अब खत्म हो चुका है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया से मिली इस खबर ने उनकी उम्मीदों को फिर से पंख दे दिए हैं.
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अनाया को तुरंत 'कम्युनिटी क्रिकेट' (लोकल और स्टेट लेवल) खेलने की इजाजत दे दी है. लेकिन अगर वो विमेंस बिग बैश लीग (WBBL) जैसे बड़े और 'एलीट' टूर्नामेंट खेलना चाहती हैं, तो उन्हें एक बड़ी शर्त पूरी करनी होगी.
नियम के मुताबिक मार्च 2027 तक अनाया को अपने शरीर में टेस्टोस्टेरोन का लेवल 10 nmol/L से नीचे बनाए रखना होगा. अगर वो ऐसा कर पाती हैं और लगातार टेस्ट पास करती हैं तो वो ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी महिला क्रिकेट लीग में भी खेल सकेंगी.
ICC और BCCI के क्या है नियम
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने पिछले साल ही ट्रांसजेंडर्स के एलीट क्रिकेट खेलने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया था. वहीं, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पास ट्रांस महिला क्रिकेटरों को लेकर फिलहाल कोई पॉलिसी ही नहीं है.
अनाया ने की क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की तारीफ
अनाया ने बताया कि उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट और रिसर्च डेटा BCCI को भेजा था. लेकिन बोर्ड की तरफ से कोई जवाब नहीं आया. अनाया कहती हैं कि बीसीसीआई इस मामले पर बिल्कुल चुप रहा. लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने मेरी पूरी मेडिकल हिस्ट्री देखी, मेरी रिपोर्ट पढ़ी और निष्पक्षता दिखाते हुए मुझे खेलने की इजाजत दी.
दर्द भरा रहा अनाया का सफर
अपनी इस मुश्किल जर्नी पर बात करते हुए अनाया ने बताया कि एक लड़के से लड़की बनने का उनका सफर शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत दर्द भरा रहा. परिवार, दोस्त, करियर सब कुछ बदल गया. हालांकि, उनका कहना है कि इस बदलाव के बाद वो अब बहुत खुश और सुकून में हैं.
उन्होंने यह भी माना कि हार्मोन थेरेपी के बाद उनके शरीर में काफी बदलाव आए हैं. अनाया ने कहा कि लड़के के तौर पर मेरे अंदर बहुत ताकत थी. लेकिन अब मेरा दिल और हड्डियां कमजोर महसूस होती हैं. मांसपेशियों की ताकत घट गई है. सच कहूं तो अब मैं 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंदों का सामना नहीं कर सकती.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क