जय मीणा ने बुधवार को एशियन गेम्स में सॉफ्ट टेनिस का भारत का पहला पदक जीता. पुरुष सिंगल्स के सेमीफाइनल में जापान के ताकुया कुरोसाका से 2-4 से हारने के बावजूद उन्हें कांस्य पदक मिला. तीसरे एशियन गेम्स खेल रहे 26 साल के जय मुकाबले में एक समय तीन गेम से पिछड़ रहे थे. उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दो गेम जीते, लेकिन लय बरकरार नहीं रख सके. 45 मिनट चले मुकाबले में कुरोसाका ने उन्हें 3-5, 1-4, 1-4, 4-1, 6-4, 1-4 से हराया.
एशियन गेम्स में भारत को सॉफ्ट टेनिस का पहला पदक दिलाने वाले जय मीणा की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं- जिस खेल का हिस्सा बनने का उन्होंने कभी सपना भी नहीं देखा था, उसी में आज देश के लिए इतिहास रच दिया.
देवास का एक लड़का क्रिकेटर बनना चाहता था. बल्ला पकड़कर मैदान पर उतरने का सपना था. लेकिन किस्मत ने उसके लिए एक अलग खेल चुन रखा था. एक ऐसा खेल, जिसके बारे में उसने शायद पहले कभी सुना भी नहीं था. नाम था जय मीणा.
मध्य प्रदेश के देवास में पले-बढ़े जय जब पायनियर पब्लिक स्कूल पहुंचे, तो पहली नजर में सॉफ्ट टेनिस ने उन्हें आकर्षित नहीं किया था. वह बस कोर्ट के पास रुके, खेल देखा और उत्सुकता में उसके करीब आते चले गए. फिर उन्हें बॉल बॉय की जिम्मेदारी मिल गई.
उन्हें तब शायद अंदाजा भी नहीं था कि गेंदें उठाते-उठाते जिस खेल को वह समझ रहे हैं, वही एक दिन उन्हें भारतीय खेल इतिहास के पन्नों तक पहुंचा देगा.
बॉल बॉय से इतिहास बनाने तक
बुधवार को जापान में एशियन गेम्स 2026 के सॉफ्ट टेनिस कोर्ट पर 24 साल के जय मीणा ने वह कर दिखाया, जो उनसे पहले कोई भारतीय नहीं कर सका था.
फिलीपींस के नुगिट शेरविन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में जय ने जबरदस्त वापसी करते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई. इसके साथ ही भारत का सॉफ्ट टेनिस में एशियन गेम्स का पहला पदक पक्का हो गया. लेकिन यह मुकाबला उनके लिए आसान नहीं था.
जय ने पहला गेम 0-4 से गंवा दिया. दूसरे गेम में उन्होंने 4-2 से वापसी की, लेकिन तीसरे गेम में फिर पिछड़ गए. इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने लगातार दो गेम जीतकर स्कोर 3-2 कर दिया और मैच बंद करने की स्थिति में पहुंच गए.
मगर फिलीपींस के खिलाड़ी ने हार नहीं मानी. छठा गेम 4-2 से जीतकर उन्होंने मुकाबले को निर्णायक टाई-ब्रेकर में पहुंचा दिया.
सात अंकों के टाई-ब्रेकर में भी जय की मुश्किलें कम नहीं हुईं. वह 3-5 से पीछे थे. पदक और इतिहास के बीच सिर्फ कुछ अंक खड़े थे. यहीं से कहानी ने करवट ली. जय ने लगातार चार अंक जीते और 7-5 से टाई-ब्रेकर अपने नाम कर लिया.
एक ऐसी वापसी, जिसने उन्हें सेमीफाइनल में पहुंचाया और भारत को सॉफ्ट टेनिस में पहली बार एशियन गेम्स पदक (ब्रॉन्ज) दिला दिया. हालांकि जय मीणा सेमीफाइनल में जापान के ताकुया कुरोसाका से 2-4 से हार गए... और उन्हें ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा.
2022 में क्वार्टर फाइनल, 2026 में पदक
जय के लिए यह अचानक मिली सफलता नहीं है. चार साल पहले हांगझोउ एशियन गेम्स में भी वह पुरुष सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे. इस बार उन्होंने उस पड़ाव को पार कर इतिहास बना दिया.
2026 एशियन गेम्स में वह व्यक्तिगत और मिश्रित स्पर्धाओं में पदक दौर तक पहुंचने वाले इकलौते भारतीय हैं. उनके साथी खिलाड़ी आर्यन ठाकुर ग्रुप चरण में ही बाहर हो गए. जय की कहानी पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऊपर जाती रही है.
2022 के गुजरात नेशनल गेम्स में उन्होंने पुरुष सिंगल्स का स्वर्ण पदक जीता. 2025 में वह राष्ट्रीय चैम्पियन बने. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका सफर लगातार नए मुकाम छूता गया.
जापान में 14 साल की उम्र में कदम
2024 विश्व सॉफ्ट टेनिस चैम्पियनशिप में जय ने आद्या तिवारी के साथ मिश्रित युगल में कांस्य पदक जीता. यह विश्व चैम्पियनशिप में भारत का सॉफ्ट टेनिस का पहला पदक था.
इसके अगले साल एशियन सॉफ्ट टेनिस चैम्पियनशिप (9th Asian Soft Tennis Championship 2025) में उन्होंने पुरुष सिंगल्स का कांस्य जीतकर भारत को इस प्रतियोगिता का पहला पदक दिलाया. उस टूर्नामेंट में जय ने सिंगल्स के अलावा मिश्रित युगल, पुरुष टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में भी पदक जीते.
दिलचस्प बात यह है कि सॉफ्ट टेनिस की दुनिया में उनका प्रवेश भी जल्दी हो गया था. सिर्फ 14 साल की उम्र में जय जापान में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने पहुंच गए थे.
जिस देश को सॉफ्ट टेनिस की जन्मभूमि माना जाता है, उसी जापान में अब वह अपने तीसरे एशियन गेम्स में भारत के लिए इतिहास रच रहे हैं.
क्रिकेट छूटा, लेकिन खेल नहीं
जय की कहानी की खूबसूरती सिर्फ उनके पदक में नहीं है. असली कहानी उस मोड़ में छिपी है जहां उनका क्रिकेट का सपना धीरे-धीरे सॉफ्ट टेनिस में बदल गया.
वह इस खेल को खेलने नहीं, देखने आए थे. फिर गेंदें उठाईं. खिलाड़ियों को करीब से देखा. कोर्ट पर होने वाली हर गतिविधि को समझा. धीरे-धीरे वही जिज्ञासा अभ्यास में बदली और अभ्यास ने करियर का रूप ले लिया.
जिस लड़के का सपना क्रिकेटर बनने का था, वह बॉल बॉय बना और अंततः उसी कोर्ट पर भारत का इतिहास रचने वाला खिलाड़ी बन गया.
मेहनत के साथ मिला सिस्टम का साथ
जय के सफर में व्यक्तिगत मेहनत के साथ संस्थागत समर्थन की भूमिका भी रही है. वह टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप (TAGG) के एथलीट हैं और एशियन चैम्पियनशिप तथा एशियन गेम्स की तैयारी के लिए अहमदाबाद और जम्मू के राष्ट्रीय शिविरों में ट्रेनिंग कर चुके हैं.
उन्हें कोरिया और जापान में विदेशी एक्सपोजर और जापान में ट्रेनिंग के लिए भी सहायता मिली. 2026 एशियन गेम्स चक्र के दौरान जय को TAGG के तहत 4,06,950 रुपये और Assistance to National Sports Federations के तहत 18,79,948 रुपये की सहायता मिली.
आंकड़े उनके सफर का एक हिस्सा बताते हैं. पदक उसकी दूसरी तस्वीर है. लेकिन जय मीणा की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा शायद वह है जहां से यह सब शुरू हुआ था- क्रिकेटर बनने का सपना देखने वाला देवास का एक बच्चा, स्कूल के सॉफ्ट टेनिस कोर्ट के पास रुका, बॉल बॉय बना और गेंदें उठाते-उठाते एक दिन भारत के लिए इतिहास उठा लाया.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क