Gen Z में ‘सोशल बैटरी डेड’ होने का चलन बढ़ा है. इसका मतलब लोगों से बातचीत और मेल-जोल से मानसिक थकान महसूस करना है. ऐसी स्थिति में Gen Z कुछ समय के लिए सोशल मीडिया, दोस्तों और बातचीत से दूरी बनाकर अपनी मानसिक शांति और ऊर्जा पर ध्यान देती है.