केतन के कत्ल के वक्त सिया के प्रेमी चेतन के हर मूवमेंट की होगी स्टडी, क्या है Gait analysis

केतन अग्रवाल मर्डर केस में आरोपी चेतन चौधरी की पहचान के लिए पुलिस CCTV फुटेज से उसकी चाल की स्टडी कराएगी. यह तरीका व्यक्ति की अनोखी चाल पैटर्न से पहचान करने में मदद करता है.

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केतन मर्डर केस में मुख्य आरोपी सिया के प्रेमी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस होगा. (Photo: ITG) केतन मर्डर केस में मुख्य आरोपी सिया के प्रेमी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस होगा. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

फोरेंसिक जांच में गेट एनालिसिस (Gait Analysis) तेजी से लोकप्रिय हो रही तकनीक है. केतन अग्रवाल मर्डर केस में आरोपी चेतन चौधरी की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस या संबंधित एजेंसी अब इसी तरीके का सहारा लेगी. जब चेहरा स्पष्ट न हो. मास्क लगा हो या कैमरे की क्वालिटी खराब हो, तब भी व्यक्ति की चाल के आधार पर उसे पहचाना जा सकता है. यह तकनीक व्यक्ति की चलने की पूरी शैली को साइंटिफिक तरीके से बताती है.  

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गेट एनालिसिस मनुष्य की चलने की पैटर्न का अध्ययन है. इसमें एक कदम की लंबाई, कदमों की गति, शरीर की मुद्रा, हाथों का हिलना,कूल्हों की गति, पंजों का प्लेसमेंट और घुटनों का एंगल जैसे 20 से ज्यादा पैरामीटर शामिल होते हैं. हर व्यक्ति की चाल 90-95% अनोखी होती है, ठीक उसी तरह जैसे फिंगरप्रिंट या आईरिस. ब्रिटेन की शोध के अनुसार, गेट पैटर्न जन्म के बाद विकसित होता है और 15-20 साल की उम्र तक स्थिर हो जाता है.

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गेट एनालिसिस फोरेंसिक में कैसे काम करता है?

फोरेंसिक गेट एनालिसिस मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है...

  • मैनुअल/विजुअल एनालिसिस: विशेषज्ञ CCTV फुटेज को फ्रेम-बाय-फ्रेम देखते हैं. वे आरोपी के पुराने वीडियो (सोशल मीडिया, परिवार वीडियो आदि) से चाल का मिलान करते हैं.
  • ऑटोमेटेड/कंप्यूटर बेस्ड एनालिसिस: AI सॉफ्टवेयर पैरों का ज्वाइंट्स को ट्रैक करता है. 3D मॉडल बनाकर गणितीय तुलना की जाती है. UK की सरे यूनिवर्सिटी और नेशनल फिजिक्स लेबोरेटरी की स्टडी के अनुसार, ऑटोमेटेड सिस्टम 90% से ज्यादा सटीकता दे सकता है जब फुटेज अच्छी क्वालिटी का हो.

केतन मर्डर केस में आरोपी चेतन के खिलाफ सीसीटीवी फुटेज है जिसमें चेहरा पूरी तरह साफ नहीं दिख रहा है. पुलिस चेतन के पुराने वीडियो इकट्ठा कर रही है. विशेषज्ञ कदम की लंबाई (औसतन 1.3-1.5 मीटर पुरुषों में), चलने की गति (4-6 किमी/घंटा) और पोस्चर का मिलान करेंगे. अगर 80% से ज्यादा मैचिंग मिली तो इसे अदालत में मजबूत सबूत माना जाएगा.

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वास्तविक दुनिया के उदाहरण और आंकड़े

  • ब्रिटेन: 2000 के दशक से गेट एनालिसिस का इस्तेमाल हो रहा है. 2010 में एक केस में CCTV से चाल के आधार पर अपराधी को सजा हुई. UK पुलिस के अनुसार, 70% मामलों में जहां चेहरे की पहचान फेल हो जाती है, गेट एनालिसिस काम आता है.
  • अमेरिका और यूरोप: FBI और Europol इसे बिहेवियरल बायोमैट्रिक्स के रूप में इस्तेमाल करते हैं. 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि गेट एनालिसिस 85-95% सटीकता देता है.
  • भारत: दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु पुलिस गेट एनालिसिस का इस्तेमाल कर चुकी है. 2023-24 में दिल्ली पुलिस ने कई स्नैचिंग के मामलों में इस तकनीक से आरोपी पकड़े. NCRB के अनुसार, फोरेंसिक वीडियो एनालिसिस के केस 2020 से 2025 तक दोगुने हो गए हैं.

केतन मर्डर केस में गेट एनालिसिस क्यों महत्वपूर्ण?

केतन हत्या का मामला काफी संवेदनशील है. पुलिस के पास मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और कुछ गवाह हैं, लेकिन सीसीटीवी में चेहरा छिपा है. चेतन ने अगर मास्क या हेलमेट का इस्तेमाल किया होता तो चेहरे की पहचान फेल हो जाती. गेट एनालिसिस यहां गेम चेंजर साबित हो सकता है क्योंकि चाल बदलना बहुत मुश्किल होता है.

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विशेषज्ञ आरोपी के नॉर्मल चलने, सीढ़ियां चढ़ने या भागने की चाल का अध्ययन करेंगे. खासतौर पर दबाव में व्यक्ति की चाल बदलती है, जिसे भी एनालिसिस किया जाएगा.

तकनीक की ताकत और सीमाएं

ताकतें... 

  • चेहरा छिपाने पर भी काम करती है.
  • दूर के CCTV से भी संभव.
  • AI के साथ तेज नतीजे.
  • अदालत में स्वीकार्य. 

सीमाएं... 

  • खराब रोशनी, कम रिजोल्यूशन या कोण में सटीकता घट जाती है (50-60%).
  • अगर आरोपी जानबूझकर लंगड़ाकर चले या मोटे कपड़े पहने तो मुश्किल.
  • भारत में अभी प्रशिक्षित विशेषज्ञ कम हैं.
  • अदालत में अकेले इस पर भरोसा नहीं किया जाता, अन्य सबूतों के साथ इस्तेमाल होता है.

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भारत में फोरेंसिक का भविष्य

भारत सरकार ने फोरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं. 2025-26 में कई राज्यों में AI आधारित फोरेंसिक लैब स्थापित हो रही हैं. गेट एनालिसिस को NISER, CFSL (Central Forensic Science Laboratory) और पुलिस अकादमियों में शामिल किया जा रहा है.

केतन मर्डर केस अगर गेट एनालिसिस से सफल रहा तो यह भारतीय फोरेंसिक साइंस के लिए मील का पत्थर साबित होगा. अपराधी अब समझ गए हैं कि सिर्फ चेहरा छिपाने से काम नहीं चलेगा. उनकी चाल, बॉडी लैंग्वेज और मूवमेंट भी उन्हें पकड़ सकते हैं.

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निष्कर्ष यह है कि गेट एनालिसिस विज्ञान और पुलिसिया जांच का बेहतरीन मिश्रण है. केतन केस में आरोपी चेतन की चाल अगर अपराध से मैच करती है तो न्याय की प्रक्रिया मजबूत होगी और तकनीक का यह उपयोग भविष्य के कई केसों के लिए उदाहरण बनेगा.

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