चांद से SpaceX रॉकेट की जोरदार टक्कर, छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरा मलबा

करीब एक साल तक अंतरिक्ष में भटकने के बाद SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का विशाल मलबा आखिरकार चांद से टकरा गया. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस टक्कर से चंद्रमा की सतह पर एक नया गड्ढा बना होगा. यह घटना अंतरिक्ष कचरे को लेकर बढ़ती चिंता भी उजागर करती है.

Advertisement
टक्कर की रफ्तार 8,700 किमी प्रति घंटा थी (सांकेतिक फोटो) टक्कर की रफ्तार 8,700 किमी प्रति घंटा थी (सांकेतिक फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:24 AM IST

SpaceX के एक रॉकेट का भटकता टुकड़ा आखिरकार चांद से टकरा गया. ये SpaceX Falcon 9 रॉकेट का हिस्सा था जिसने दो लूनर लैंडर लॉन्च किए थे. वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले एक साल से अपने रास्ते से भटकने के बाद बुधवार को अनुमान के मुताबिक चांद से टकरा गया.

इस टुकड़े का साइज स्कूल-बस जितना था. इसका वजन चार मीट्रिक टन (4,000 किलोग्राम) बताया गया था. हालांकि 5,400 मील प्रति घंटे (8,700 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार से हुई इस टक्कर की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन स्पेस ट्रैकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि रॉकेट का बचा हुआ हिस्सा चांद से टकराना तय था.

Advertisement

इस अंतरिक्ष कचरे के टकराने से चंद्रमा की धूल का गुबार उठेगा ऐसा कहा गया था. यह धूल सूरज की रोशनी में शायद चमकी हो, लेकिन पृथ्वी से इसे नंगी आंखों से देखना मुश्किल था.

यह चांद पर जमा होने वाले कचरे का ताजा मामला है. कई लोगों को डर है कि अमेरिका और चीन के बीच चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की होड़ के साथ यह समस्या और बढ़ सकती है. 2022 में, एक चीनी रॉकेट लूनर मिशन के बाद अनजाने में चांद से टकरा गया था, और आशंका है कि पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिकों की जानकारी के बिना रॉकेट के कई और टुकड़े चांद से टकराए होंगे.

SpaceX की जूलियाना शाइमन ने कहा कि कंपनी भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए NASA के साथ काम कर रही है. उन्होंने कहा कि यह टक्कर जानबूझकर नहीं कराई गई थी. उन्होंने बताया कि सौर गतिविधि और गुरुत्वाकर्षण के मेल ने इसे अनजाने में चांद से टकराने वाले रास्ते पर डाल दिया था.

Advertisement

टकराव की अनुमानित जगह चांद के पश्चिमी हिस्से (जो सूरज की रोशनी में रहता है) में आइंस्टीन क्रेटर के पास थी. यह चांद के सामने और पीछे के हिस्सों के किनारे के पास है, जिसे पृथ्वी से देखना बहुत मुश्किल होता है.

मैकडॉवेल ने कहा कि मेरे हिसाब से रॉकेट अब आइंस्टीन क्रेटर के पास चांद पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर चुका है.

मैकडॉवेल ने कहा कि अगर रॉकेट के आखिरी सफर के दौरान कोई एस्टेरॉयड उससे टकरा भी जाता, तो भी उसके टुकड़े चांद पर उसी जगह पर गिरते.

मैकडॉवेल ने बताया कि इसकी विज़ुअल पुष्टि के लिए NASA के 'लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर' के दुर्घटना वाली जगह के ऊपर से गुज़रने और टक्कर से बने क्रेटर की तस्वीरें भेजने का इंतजार करना होगा. स्पेस एजेंसी को उम्मीद नहीं है कि ऐसा अगले हफ्ते से पहले होगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »