तालाबों-जलाशयों पर तैरते हुए सोलर पैनल पैदा करेंगे बिजली, 5070 करोड़ के प्रोजेक्ट को केंद्र की मंजूरी

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है. इसमें फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और एनर्जी स्टोरेज पर 5070 करोड़ रुपये खर्च होंगे. 5000 मेगावाट क्षमता बढ़ाई जाएगी, जिससे रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

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ये तस्वीर अमेरिका के उटाह की है. कुछ इस तरह से सोलर पैनल अब हमारे तालाबों पर भी दिखाई देंगे. (Photo: Getty) ये तस्वीर अमेरिका के उटाह की है. कुछ इस तरह से सोलर पैनल अब हमारे तालाबों पर भी दिखाई देंगे. (Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST

केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना यानी पीएम-एसएसवाई के तहत फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक प्रोजेक्ट के साथ एनर्जी स्टोरेज प्रणाली विकसित की जाएगी. इस योजना का कुल परिव्यय 5070 करोड़ रुपये रखा गया है. 

यह कदम भारत की रीन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी को बढ़ाने और जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है. योजना का उद्देश्य जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का बेहतर उपयोग करना है, ताकि भूमि की कमी की समस्या से बचा जा सके और स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़े.

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इस योजना के अंतर्गत 5,000 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किए जाएंगे. इनके साथ कम से कम दो घंटे की एनर्जी स्टोरेज क्षमता यानी 10,000 मेगावाट का सिस्टम भी जोड़ा जाएगा. प्रोजेक्ट को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच मंजूरी दी जाएगी. वित्तीय सहायता का भुगतान 2032-33 तक जारी रहेगा. 

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के आकलन के अनुसार देश के जलाशयों और उपयुक्त जल निकायों में लगभग 102.18 गीगावाट पीक फ्लोटिंग सोलर क्षमता मौजूद है. वर्तमान में देश में फ्लोटिंग सोलर क्षमता केवल करीब 700 मेगावाट है, इसलिए यह योजना इसे कई गुना बढ़ाने का काम करेगी.

इसके अलावा अध्ययन, बाथिमेट्री, हाइड्रोग्राफी, पर्यावरणीय अध्ययन और अन्य तैयारी कार्यों के लिए प्रति प्रोजेक्ट अधिकतम 50 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध होगी. सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस योजना का लाभ उठा सकेंगे.

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क्या फायदा होगा?

फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये मौजूदा जलाशयों और तालाबों का उपयोग करती हैं. इससे दुर्लभ भूमि संसाधनों पर दबाव नहीं पड़ता. एनर्जी स्टोरेज प्रणाली के जुड़ने से ग्रिड की विश्वसनीयता मजबूत होगी, क्योंकि सौर ऊर्जा दिन के समय पैदा होती है. स्टोरेज से शाम या रात में भी बिजली उपलब्ध हो सकेगी. 

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योजना से सालाना करीब 10 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है. साथ ही प्रोजेक्ट सीरीज में लगभग 16,000 से 17,000 रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

फ्लोटेशन सिस्टम, सोलर सेल, मॉड्यूल और एनर्जी स्टोरेज प्रणालियों की पूरी वैल्यू चेन में आत्मनिर्भरता को समर्थन मिलेगा. इससे आत्मनिर्भर भारत के विजन को बल मिलेगा. जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग होने के साथ-साथ राष्ट्रीय ऊर्जा और जलवायु उद्देश्यों की प्राप्ति में मदद मिलेगी. 

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फ्यूचर में क्या होगा?

भारत सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन भूमि की उपलब्धता हमेशा चुनौती रही है. फ्लोटिंग सोलर इस समस्या का समाधान पेश करता है. जलाशयों पर पैनल लगाने से भाप बनना भी कम होता है, जो जल संरक्षण में सहायक है. एनर्जी स्टोरेज का एकीकरण रीन्यूएबल एनर्जी की अनियमितता को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. 

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हालांकि प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के लिए पर्यावरणीय प्रभावों का ध्यान रखना, स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना और तकनीकी चुनौतियों को समय पर हल करना जरूरी होगा.  कुल मिलाकर प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना स्वच्छ ऊर्जा, रोजगार सृजन और सतत विकास को एक साथ आगे बढ़ाने वाली पहल है. 

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