NASA का रेस्क्यू मिशन फेल, 6 को धरती पर गिरेगा Swift टेलिस्कोप

नासा का स्विफ्ट ऑब्जरवेटरी 22 साल काम करने के बाद वायुमंडल में प्रवेश करने वाला है. इसे बचाने वाला मिशन फेल हो गया. 6 नवंबर के आसपास यह पृथ्वी में गिरेगा. अधिकांश हिस्सा जल जाएगा, जबकि इसका वैज्ञानिक आंकड़ा वर्षों तक उपयोगी रहेगा.

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ये है नासा का स्विफ्ट ऑब्जरवेटरी. (Photo: NASA) ये है नासा का स्विफ्ट ऑब्जरवेटरी. (Photo: NASA)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST

नासा का स्विफ्ट अंतरिक्ष ऑब्जरवेटरी अब अपनी अंतिम यात्रा पर है. अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुसार यह ऑब्जरवेटरी 6 नवंबर को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है. यह घटना उसके 22 साल लंबे मिशन का अंत दिखाएगी. 2004 में लॉन्च हुआ यह 1.5 टन वजन का वैज्ञानिक उपकरण ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली घटनाओं को पकड़ने में बेहद सफल रहा. 

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साइंटिफिक एक्सपेरिमेंट खत्म होने के बाद इसकी कक्षा धीरे-धीरे घटने लगी थी. नासा ने इसे बचाने की कोशिश की लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण वह प्रयास असफल रहा. अब अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में जलने की उम्मीद है. बचे हुए हिस्से समुद्र में गिरेंगे. 

स्विफ्ट को खासतौर पर गामा-रे बर्स्ट यानी ब्रह्मांड की सबसे तेज और शक्तिशाली ऊर्जा विस्फोटों की स्टडी करने के लिए बनाया गया था. इन बर्स्ट में कुछ ही सेकंड में इतनी ऊर्जा निकलती है जितनी सूर्य अपने पूरे जीवनकाल में निकालता है. स्विफ्ट ने दो हजार से अधिक गामा-रे बर्स्ट और लगभग चौदह सौ सुपरनोवा का पता लगाया. 

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ये खोजें वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की उत्पत्ति, तारों के अंत और ब्लैक होल के बारे में नई जानकारी देने में मददगार साबित हुईं. इसके अलावा इसने कई अन्य खगोलीय घटनाओं को भी रिकॉर्ड किया. इतने लंबे समय तक सक्रिय रहना किसी भी वैज्ञानिक मिशन के लिए बड़ी सफलता मानी जाती है. अब जब ऑब्जरवेटरी वापस आ रही है तो इसका विशाल आंकड़ा संग्रह अभी भी वर्षों तक खगोलविदों की मदद करता रहेगा.

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कक्षा का क्षय और बचाव का प्रयास

अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने वाले उपग्रहों की कक्षा धीरे-धीरे कम होती जाती है क्योंकि वायुमंडल का हल्का सा घर्षण भी उन्हें नीचे खींचता है. स्विफ्ट की भी यही स्थिति हुई. नासा ने इसकी कक्षा ऊंची करने के लिए एक अनोखा व्यावसायिक मिशन शुरू किया. कैटालिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज नाम की कंपनी को तीस मिलियन डॉलर का डील दिया गया. 

योजना यह थी कि रोबोटिक लिंक नाम का एक अंतरिक्ष यान स्विफ्ट के पास जाकर उसे पकड़े और उसकी कक्षा को ऊपर उठा दे. यह पहली बार किसी वैज्ञानिक ऑब्जरवेटरी को इस तरह व्यावसायिक तरीके से बचाने का प्रयास था. लेकिन अगस्त में तकनीकी समस्याएं सामने आईं. रोबोटिक यान स्विफ्ट के काफी करीब नहीं पहुंच पाया. नतीजतन नासा को यह अभियान रद्द करना पड़ा.

अमेरिकी स्पेस फोर्स लगातार स्विफ्ट की निगरानी कर रही है. अनुमान है कि यह शुक्रवार 6 नवंबर के आसपास वायुमंडल में प्रवेश करेगा. सटीक समय और स्थान अभी अनिश्चित है क्योंकि वायुमंडलीय स्थितियां बदलती रहती हैं. ज्यादातर हिस्सा ऊंचाई पर ही जल जाएगा क्योंकि तेज गति और घर्षण से तापमान बहुत बढ़ जाता है. 

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कुछ मजबूत हिस्से बच सकते हैं लेकिन उनकी संभावना कम है और वे समुद्र में गिरने की उम्मीद है. इससे किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं जताई जा रही. फिर भी अंतरिक्ष एजेंसियां ऐसे पुनः प्रवेशों को ध्यान से ट्रैक करती हैं ताकि जमीन पर कोई जोखिम न बने. यह घटना दिखाती है कि पुराने उपग्रहों को बचाना कितना चुनौतीपूर्ण है. 

व्यावसायिक कंपनियों को अंतरिक्ष में जटिल रोबोटिक ऑपरेशन करने का अनुभव अभी सीमित है. स्विफ्ट का बचाव अभियान अगर सफल होता तो भविष्य में कई अन्य उपग्रहों को लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सकता था. इससे अंतरिक्ष कचरे की समस्या भी कुछ हद तक कम होती. अब जब यह प्रयास विफल हो गया तो वैज्ञानिक समुदाय और अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए सबक है कि भविष्य के मिशनों में ऐसी चुनौतियों के लिए बेहतर तैयारी करनी होगी. साथ ही नए उपग्रहों को डिजाइन करते समय उनके अंत की योजना भी पहले से बनानी होगी.

वैज्ञानिक विरासत बनी रहेगी

स्विफ्ट भले ही भौतिक रूप से खत्म हो रहा हो लेकिन उसका वैज्ञानिक योगदान समाप्त नहीं होगा. इसके द्वारा एकत्र किए गए आंकड़े अभी भी उपलब्ध हैं और शोधकर्ता उनका उपयोग नई खोजों के लिए करते रहेंगे. गामा-रे बर्स्ट और सुपरनोवा के अध्ययन में इसने जो आधार तैयार किया है.

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वह आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित होगा. नासा और अन्य एजेंसियां इसी दिशा में नए मिशन भी विकसित कर रही हैं जो स्विफ्ट की तरह ब्रह्मांड की रहस्यमयी घटनाओं को और गहराई से समझने में मदद करेंगे.

कुल मिलाकर स्विफ्ट की वापसी एक युग का अंत है. यह ऑब्जरवेटरी न सिर्फ वैज्ञानिक खोजों का प्रतीक बनी बल्कि व्यावसायिक अंतरिक्ष प्रयासों की सीमाओं को भी उजागर कर गई. अब इसकी अंतिम यात्रा को शांतिपूर्वक पूरा होने देना है ताकि इसका योगदान सुरक्षित रहे और भविष्य के मिशनों के लिए मार्ग प्रशस्त हो.

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