अंतरिक्ष में गायब हुए इंडिया के भेजे 16 सैटेलाइट्स, जानिए खराब सैटेलाइट्स कहां गिराए जाते हैं

ISRO का PSLV C62 मिशन फेल हो चुका है. अब सवाल ये हैं कि चौथा स्टेज और सैटेलाइट कहां गिरेंगे? खराब या पुराने सैटेलाइट्स को दो तरीकों से निपटाया जाता है- लो अर्थ ऑर्बिट में छोटे सैटेलाइट्स हवा के घर्षण से 5-25 साल में खुद जलकर खत्म हो जाते हैं. बड़े सैटेलाइट्स और स्पेस स्टेशन को नियंत्रित तरीके से 'पॉइंट नेमो' में गिराया जाता है, जहां कोई इंसान या द्वीप नहीं है.

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अंतरराष्ट्रीय नियम है कि खराब सैटेलाइट को उसे लॉन्च करने वाला देश कंट्रोल्ड तरीके से नीचे गिराए. (Photo: Getty) अंतरराष्ट्रीय नियम है कि खराब सैटेलाइट को उसे लॉन्च करने वाला देश कंट्रोल्ड तरीके से नीचे गिराए. (Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:21 PM IST

ISRO का आज का लॉन्च मिशन फेल हो चुका है. उसी के साथ सवाल ये उठता है कि PSLV रॉकेट से जो 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए. वो कहां हैं. कब धरती पर गिरेंगे. या अंतरिक्ष में ही घूमते रहेंगे. अंतरिक्ष में हजारों सैटेलाइट्स काम कर रहे हैं, लेकिन जब ये खराब हो जाते हैं, पुराने हो जाते हैं या ईंधन खत्म हो जाता है, तो इन्हें अंतरिक्ष में छोड़ना खतरनाक है. 

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ये स्पेस डेब्री (कचरा) बन जाते हैं, जो अन्य सैटेलाइट्स से टकरा सकते हैं. इसलिए, दुनिया भर के स्पेस एजेंसियां इन सैटेलाइट्स को डिस्पोज करने के नियम फॉलो करती हैं. लेकिन क्या ये खुद-ब-खुद गिरते हैं? या कोई फिक्स जगह है? 

पुराने सैटेलाइट्स क्या करते हैं? दो मुख्य तरीके

प्राकृतिक गिरावट (Natural Deorbit)

पृथ्वी के बहुत करीब (लो अर्थ ऑर्बिट - LEO, 200-2000 किमी ऊंचाई) वाले सैटेलाइट्स पर हवा का हल्का घर्षण (atmospheric drag) लगता है. यह घर्षण धीरे-धीरे सैटेलाइट की स्पीड कम करता है, और ये नीचे की ओर गिरते जाते हैं.  

यह भी पढ़ें: 'नर्वस नाइंटीज' का शिकार क्यों हो रहा इसरो का PSLV रॉकेट? लगातार दूसरी असफलता

  • 400-600 किमी ऊंचाई पर: 5-10 साल में खुद गिर जाते हैं.  
  • 700-1000 किमी पर: 100-200 साल या ज्यादा लग सकते हैं.
  • छोटे सैटेलाइट्स (जैसे CubeSats) ज्यादातर इसी तरह जलकर खत्म हो जाते हैं. लेकिन बड़े सैटेलाइट्स के टुकड़े जमीन पर गिर सकते हैं, इसलिए अब नियम सख्त हैं.

कंट्रोल्ड डीऑर्बिट (Controlled Deorbit)

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एजेंसियां बचे हुए ईंधन से थ्रस्टर्स फायर करके सैटेलाइट को धीमा करती हैं, ताकि ये तय जगह पर गिरे. ज्यादातर बड़े सैटेलाइट्स और स्पेस स्टेशन इसी तरीके से गिराए जाते हैं.

अंतरराष्ट्रीय नियम क्या हैं?

स्पेस डेब्री को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN COPUOS) ने Space Debris Mitigation Guidelines बनाए हैं (2007 में अपनाए गए, 2025 तक अपडेटेड). ये नियम स्वैच्छिक हैं, लेकिन ज्यादातर देश फॉलो करते हैं. मुख्य नियम...

25-वर्ष नियम (25-Year Rule): मिशन खत्म होने के बाद सैटेलाइट को 25 साल के अंदर डीऑर्बिट करना चाहिए, ताकि वो LEO में ज्यादा समय न रहे.  अमेरिका (FCC), यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) अब 5 साल का नियम लागू कर रहे हैं.

  • सैटेलाइट्स को डिजाइन ऐसा करें कि वे सामान्य ऑपरेशन में डेब्री न छोड़ें.  
  • विस्फोट न हो (passivation: बचे ईंधन को खत्म करना).  
  • टकराव से बचाव (collision avoidance).  
  • अगर सैटेलाइट पूरी तरह न जल सके, तो कंट्रोल्ड तरीके से गिराएं.

अगर सैटेलाइट 2000 किमी से ऊपर (जैसे GEO ऑर्बिट - 36,000 किमी) है, तो उसे ग्रेवयार्ड ऑर्बिट में भेजा जाता है, जहां वो सदियों तक रह सकता है बिना टकराव के.

यह भी पढ़ें: ISRO की इस साल की पहली लॉन्चिंग फेल, रॉकेट ने दिशा बदली... खो गए सारे सैटेलाइट्स

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फिक्स जगह: स्पेसक्राफ्ट सेमेटरी या पॉइंट नेमो

बड़े सैटेलाइट्स, स्पेस स्टेशन और कार्गो व्हीकल्स को पॉइंट नेमो (Point Nemo) नाम की जगह पर गिराया जाता है. यह दक्षिणी प्रशांत महासागर में सबसे दूरस्थ जगह है...

  • सबसे नजदीकी जमीन से 2,688 किमी दूर (न्यूजीलैंड, ईस्टर आइलैंड, अंटार्कटिका से).
  • नाम: नेमो (Latin में कोई नहीं) - जूल्स वर्न की किताब से लिया गया है. Oceanic Pole of Inaccessibility या South Pacific Ocean Uninhabited Area.

यहां क्यों? क्योंकि... कोई इंसान, जहाज या द्वीप नहीं है. अगर टुकड़े बच भी जाएं, तो कोई खतरा नहीं. 1971 से अब तक 264+ स्पेसक्राफ्ट यहां गिराए गए (रूस सबसे ज्यादा, Mir स्पेस स्टेशन सहित). ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) 2030-2031 में यहीं गिराया जाएगा.

क्या कोई खतरा है?

ज्यादातर सैटेलाइट्स वायुमंडल में जल जाते हैं. बड़े टुकड़े (जैसे Mir के) समंदर में डूब जाते हैं. अब तक कोई मौत नहीं हुई स्पेस डेब्री से (एक बार 1997 में महिला पर छोटा टुकड़ा गिरा था). लेकिन डेब्री बढ़ रहा है, इसलिए नियम सख्त हो रहे हैं.

खराब सैटेलाइट्स खुद-ब-खुद गिर सकते हैं (प्राकृतिक तरीके से), लेकिन अब नियम कहते हैं कि उन्हें 5-25 साल में कंट्रोल्ड तरीके से गिराना चाहिए. छोटे सैटेलाइट्स वायुमंडल में जल जाते हैं, बड़े को पॉइंट नेमो के स्पेसग्रेवयार्ड में भेजा जाता है. यह जगह सबसे सुरक्षित है, क्योंकि वहां कोई नहीं है. 

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