करीब 360 साल पहले विलुप्त हो चुके डोडो पक्षी को फिर से धरती पर लाने की कोशिश की जा रही है. अमेरिका की बायोटेक कंपनी कोलोसल बायोसाइंसेज ने इस दिशा में नई प्रगति की जानकारी दी है. कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे करीब 2300 जीन की पहचान की है, जो डोडो की चोंच और चेहरे की बनावट से जुड़े हो सकते हैं. अब वैज्ञानिक लैब में इनकी जांच कर रहे हैं.
डोडो एक ऐसा पक्षी था जो उड़ नहीं सकता था. यह हिंद महासागर में मौजूद मॉरीशस द्वीप पर पाया जाता था. इंसानों के शिकार और उनके साथ पहुंचे चूहों जैसे दूसरे जानवरों की वजह से यह पक्षी धीरे-धीरे खत्म हो गया. साल 1662 में आखिरी बार जीवित डोडो को देखे जाने का रिकॉर्ड है. अब वैज्ञानिक इसके करीबी जीवित रिश्तेदार निकोबार कबूतर के जीन में बदलाव करके उसमें डोडो जैसे गुण लाने की कोशिश कर रहे हैं.
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AI से कैसे मिले डोडो के जीन के सुराग?
कंपनी ने जीन की पहचान करने के लिए जीनोमॉर्फ नाम का AI प्लेटफॉर्म बनाया है. इसकी मदद से वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि डोडो की बड़ी चोंच और चेहरे की खास बनावट के पीछे कौन-से जीन जिम्मेदार थे. पुराने जीवों का DNA समय के साथ छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है. इस वजह से वैज्ञानिकों के लिए यह पता लगाना मुश्किल होता है कि किसी विलुप्त जीव की खास पहचान किस जीन की वजह से थी. डोडो के मामले में भी यही परेशानी है.
इसका हल निकालने के लिए वैज्ञानिकों ने 70 से ज्यादा जीवित पक्षियों की चोंच और खोपड़ी की बनावट का अध्ययन किया. AI ने इस जानकारी की मदद से करीब 2,300 ऐसे संभावित जीन की पहचान की, जो चोंच के आकार और चेहरे की बनावट से जुड़े हो सकते हैं. अब लैब में इनकी जांच की जा रही है. अभी यह साबित नहीं हुआ है कि ये सभी जीन डोडो की खास बनावट के लिए जिम्मेदार हैं.
निकोबार कबूतर के जीन में होगा बदलाव
डोडो का सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार निकोबार कबूतर है. यह दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ द्वीपों पर पाया जाता है. इसके पंख हरे और तांबे जैसे चमकीले रंग के होते हैं. डोडो के उलट निकोबार कबूतर उड़ सकता है. कंपनी की योजना निकोबार कबूतर की कोशिकाओं में जीन बदलकर उसमें डोडो जैसे गुण लाने की है.
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इसके लिए पहले यह समझना जरूरी है कि कौन-से जीन उसकी चोंच और चेहरे की बनावट को बदल सकते हैं. कंपनी ने अमेरिका के टेक्सास में निकोबार कबूतरों की संख्या बढ़ाकर 36 कर दी है. इन पक्षियों की मदद से वैज्ञानिक उनके विकास, प्रजनन और जीन का अध्ययन कर रहे हैं. इससे आगे की रिसर्च में मदद मिल सकती है.
डोडो को वापस लाने में अभी कई मुश्किलें
डोडो जैसे गुणों वाला पक्षी तैयार करना आसान नहीं है. वैज्ञानिकों को पहले यह साबित करना होगा कि जीन में बदलाव करने से मनचाहे गुण आते हैं. इसके बाद यह भी देखना होगा कि ये बदलाव अगली पीढ़ी तक पहुंचते हैं या नहीं. कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि डोडो जैसा पहला पक्षी कब पैदा हो सकता है.
इसके अलावा, भविष्य में अगर ऐसे पक्षियों को मॉरीशस में बसाया जाता है, तो उनके रहने के लिए सुरक्षित जगह तैयार करनी होगी. इसके लिए उन बाहरी जानवरों को नियंत्रित करना होगा, जो वहां के जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं. साथ ही, डोडो के पुराने रहने की जगह को भी बेहतर बनाना होगा.
कंपनी मॉरीशस के वैज्ञानिकों, पर्यावरण संगठनों और सरकार के साथ इस पर काम कर रही है. फिलहाल डोडो को वापस लाने की कोशिश शुरुआती दौर में है. AI से मिले सुरागों की जांच के बाद ही पता चलेगा कि वैज्ञानिक इस दिशा में कितनी आगे बढ़ पाते हैं.
आजतक साइंस डेस्क