हममें से ज्यादातर लोगों को अपनी जिंदगी के शुरुआती 3-4 साल की बहुत कम बातें याद रहती हैं. अपना तीसरा जन्मदिन, पहला घर या उस उम्र की कोई खास घटना याद न होना आम बात है. साइंस में इसे चाइल्डहुड एम्नेशिया कहा जाता है. रिसर्च बताती है कि छोटे बच्चे भी यादें बना सकते हैं, लेकिन बड़े होने के बाद उन यादों को याद करना मुश्किल हो जाता है.
2025 में हुई एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने छोटे बच्चों के दिमाग को स्कैन किया. इसमें पता चला कि करीब 1 साल की उम्र से ही हिप्पोकैम्पस में ऐसी गतिविधि शुरू हो जाती है, जो यादें बनाने से जुड़ी होती है. यानी छोटे बच्चों का दिमाग यादें बना सकता है. लेकिन समय के साथ इन शुरुआती यादों को वापस याद करना मुश्किल हो सकता है.
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3 साल से पहले की बातें क्यों याद नहीं रहतीं?
रिसर्च के मुताबिक, ज्यादातर लोगों को 3 से 4 साल की उम्र से पहले की बहुत कम व्यक्तिगत बातें याद रहती हैं. इसके बाद यादें धीरे-धीरे ज्यादा साफ होने लगती हैं. बचपन की शुरुआती यादों के कम रहने को चाइल्डहुड एम्नेशिया का हिस्सा माना जाता है.
इस उम्र में बच्चे का दिमाग बहुत तेजी से विकसित हो रहा होता है. हिप्पोकैम्पस यादें बनाने में अहम भूमिका निभाता है. इसके साथ ही बच्चा बोलना, चीजों को समझना और घटनाओं को जोड़ना भी सीख रहा होता है. इन सभी बदलावों का असर याददाश्त पर पड़ता है.
7 साल की उम्र के आसपास क्या बदलाव आता है?
एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने 3 साल की उम्र के बच्चों से उनकी कुछ खास घटनाओं के बारे में बात की. इसके बाद जब बच्चों से 5 से 9 साल की उम्र के बीच वही बातें पूछी गईं, तो 5, 6 और 7 साल की उम्र में उन्हें 60 फीसदी या उससे ज्यादा घटनाएं याद थीं. लेकिन 8 और 9 साल की उम्र में यह आंकड़ा 40 फीसदी से नीचे चला गया.
इससे पता चलता है कि बचपन की यादें एक साथ अचानक गायब नहीं होतीं. उम्र बढ़ने के साथ उन्हें याद करना धीरे-धीरे मुश्किल होता जाता है. दूसरी रिसर्च में भी पाया गया कि छोटे बच्चों की शुरुआती यादें समय के साथ बदल सकती हैं और बाद में उनमें से कई बातें याद नहीं रहतीं.
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छोटे बच्चे यादें बनाते हैं, फिर भूलते क्यों हैं?
2025 की रिसर्च में करीब 1 साल की उम्र के बच्चों के हिप्पोकैम्पस में ऐसी गतिविधि देखी गई जो यादें बनाने से जुड़ी होती है. इससे पता चलता है कि बहुत छोटी उम्र में भी दिमाग यादें बनाने का काम कर रहा होता है. लेकिन बचपन में दिमाग लगातार बदल रहा होता है. बच्चे की भाषा, सोचने और चीजों को समझने की क्षमता भी तेजी से विकसित होती है. इस दौरान मेमोरी सिस्टम में भी बदलाव होते हैं. यही वजह है कि बचपन में बनी कुछ यादों को बड़े होने के बाद उसी तरह याद करना आसान नहीं रहता.
क्या बचपन की सारी यादें खत्म हो जाती हैं?
ऐसा नहीं है. कुछ लोगों को 3 साल से पहले की भी कोई खास घटना याद रह सकती है. लेकिन ऐसी यादें आम तौर पर बहुत कम होती हैं. कई बार कोई तस्वीर, जगह, आवाज या परिवार की बताई हुई बात भी बचपन की किसी पुरानी घटना की याद दिला सकती है.
इसलिए अगर आपको अपना तीसरा जन्मदिन या 4 साल की उम्र की ज्यादातर बातें याद नहीं हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. आपका दिमाग उस समय भी यादें बना रहा था. बस उम्र बढ़ने के साथ उन शुरुआती यादों को याद करने का तरीका बदल गया. इसी वजह से जिंदगी के शुरुआती साल हमारी याददाश्त में अक्सर धुंधले रह जाते हैं.
आजतक साइंस डेस्क