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ताकतवर, तेज रफ्तार और दुश्मन को गहरा घाव देने में सक्षम.. जानिए नेवी के लिए आ रहे राफेल-M की खासियतें

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 2:25 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस दौरे पर भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन (Rafale Marine or Rafale-M) फाइटर जेट्स की डील होगी. यह 90 हजार करोड़ की है. यह एक मल्टीरोल फाइटर जेट है. 22 फाइटर जेट्स को INS विक्रांत और विक्रमादित्य पर तैनात किया जाएगा. 4 दो सीटर ट्रेनिंग जेट्स आएंगे. (सभी फोटोः गेटी/एपी/एएफपी)

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दक्षिण एशिया की बात करें तो भारत और चीन के अलावा किसी अन्य देश के पास एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर पर तीन तरह के मल्टीरोल फाइटर जेट तैनात हैं. पहला जे-10, दूसरा जे-15 और तीसरा सुखोई-30. तीनों से राफेल की तुलना समझिए. जे-10 जेट 55.5 फीट लंबा, जे-15 जेट 73.1 फीट और सुखोई-30 जेट 72 फीट लंबा है. जबकि राफेल-एम 50.1 फीट लंबा है. यानी आकार में सबसे छोटा. 

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चीन का जे-10 फाइटर जेट को एक पायलट, जे-15 को 1 या 2 और सुखोई-30 को 2 पायलट मिलकर उड़ाते हैं. जबकि, राफेल को 1 या 2 पायलट उड़ाते हैं. जे-10 का कुल वजन 14 हजार KG, जे-15 का 27 हजार KG और सुखोई-30 का 24,900 किलोग्राम है. जबकि, राफेल का सिर्फ 15 हजार किलोग्राम है. यानी हल्का है. 

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चीन के जे-10 में 8950 लीटर की इंटर्नल फ्यूल कैपेसिटी है. जे-15 की 9500 लीटर और सुखोई-30 फाइटर जेट की 9400 लीटर फ्यूल कैपेसिटी है. राफेल-एम की फ्यूल कैपेसिटी करीब 11,202 किलोग्राम है. यानी सभी फाइटर जेट से ज्यादा देर फ्लाई कर सकता है. ज्यादा देर तक डॉग फाइट में भाग ले सकता है. 

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जे-10 की अधिकतम गति 2205 किलोमीटर प्रतिघंटा है. जे-15 की मैक्सिमम स्पीड 2963 किलोमीटर प्रतिघंटा है. सुखोई-30 की अधिकत रफ्तार 2120 किलोमीटर प्रतिघंटा है. जबकि, राफेल-एम की अधिकतम गति 2205 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यानी जे-15 से कमजोर लेकिन सुखोई से ऊपर और जे-10 के बराबर. 

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जे-10 की कॉम्बैट रेंज 1240 किलोमीटर, जे-15 की फेरी रेंज 3500 किलोमीटर और सुखोई-30 की फेरी रेंज 3000 किलोमीटर है. जबकि, राफेल-एम की कॉम्बैट रेंज 1850 किलोमीटर है. इसकी फेरी रेंज 3700 किलोमीटर है. यानी सबसे बेहतर. 

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जे-10 अधिकतम 59 हजार फीट, जे-15 फाइटर जेट 66 हजार फीट और सुखोई-30 करीब 57 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. जबकि राफेल-एम 52 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इस मामले में यह चीन के तीनों फाइटर जेट से पीछे हैं. 

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चीन के जे-10 फाइटर जेट में 11 हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी चार तरह के हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, 90 मिलिमीटर के अनगाइडेड रॉकेट्स, 23 मिलिमीटर की गन और चार तरह के बम लगाए जा सकते हैं. जे-15 फाइटर जेट में 12 हार्डप्वाइंट्स हैं. जिनमें 9 तरीके के हथियार लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा बम भी. इसमें 30 मिलिमीटर की गन लगी होती है. 

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सुखोई-30 में 12 हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी तीन तरह के रॉकेट्स, चार तरह के मिसाइल और 9 तरह के बम या इनका मिश्रण लगा सकते हैं. इसमें 30 मिलिमीटर की गन लगी है. जबकि, राफेल-एम में 30 मिलिमीटर की ऑटोकैनन गन लगी है. इसके अलावा 14 हार्डप्वाइंट्स हैं. इसमें तीन तरह के हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, हवा से सतह पर मार करने वाली सात तरह की मिसाइलें, एक परमाणु मिसाइल या फिर इनका मिश्रण लगा सकते हैं. 

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चीन के जे-10 और जे-15 फाइटर जेट्स एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात होने वाले चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट्स हैं. वहीं सुखोई-30 मल्टीरोल एयर सुपरीरियॉरिटी फाइटर जेट है. जबकि, राफेल-एम 4.5 जेनरेशन का आधुनिक फाइटर जेट है, जिसे विमानवाहक युद्धपोत पर तैनात करने के लिए ही बनाया गया है. 

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पाकिस्तान के पास जो फाइटर जेट्स हैं, उनमें से ज्यादातर चीन के ही हैं. चीन ने अपनी पांचवीं पीढ़ी के जे-20 फाइटर जेट्स को फिलहाल नौसेना में तैनात नहीं किया है. न ही पाकिस्तान को दिया है. कुछ कमियों को छोड़कर राफेल-एम चीन और पाकिस्तान के फाइटर जेट्स को टक्कर देने में पूरी तरह सक्षम है. 

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