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मॉनसून की एक चौथाई बारिश 'हवा में ही हवा' हो गई! IITM पुणे चौंकाने वाली स्टडी

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:32 PM IST
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भारतीय मॉनसून को लेकर एक नई वैज्ञानिक खोज ने मौसम विज्ञान के क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है. भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम संस्थान (IITM), पुणे की स्टडी में पता चला है कि जून से सितंबर के बीच मॉनसून की कुल बारिश का औसतन 25 प्रतिशत हवा में ही उड़ जाता है यानी खत्म हो जाता है. Photo: PTI

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यह पहली बार है जब भारत में किसी प्रयोग के जरिए इसकी माप की गई है. पश्चिमी घाट के उत्तरी हिस्से में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है. इस खोज का मौसम और जलवायु मॉडल्स को बेहतर बनाने में बड़ा योगदान होगा. Photo: PTI

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IITM के शोधकर्ताओं ने पाया कि बारिश की मात्रा का औसतन 25% नीचे गिरते समय हवा में ही भाप बनकर उड़ जाता है. यह प्रतिशत दिन-प्रतिदिन बदलता रहता है - कभी 4% तो कभी 61% तक. स्टडी के लेखक सैकत सेनगुप्ता का कहना कि यह पश्चिमी घाट क्षेत्र में पहला ऑब्जरवेशनल एस्टीमेट है. Photo: PTI

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यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बारिश का एक बड़ा हिस्सा जमीन तक पहुंचने से पहले ही गायब हो जाता है. इससे मिट्टी में नमी कम होती है और सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है. शोधकर्ताओं ने आइसोटोप तकनीक का इस्तेमाल किया. पानी के सामान्य अणु (H₂O) के अलावा कुछ भारी आइसोटोप भी होते हैं. Photo: PTI

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जब पानी की बूंद भाप बनती है तो हल्के अणु पहले उड़ जाते हैं और भारी आइसोटोप बूंद में रह जाते हैं. इस अंतर से वैज्ञानिक पता लगा सकते हैं कि कितनी बारिश हवा में गायब हुई. Photo: PTI

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2019 के मॉनसून सीजन में पुणे में बारिश और हवा के नमूने लिए गए. लेजर स्पेक्ट्रोमीटर से उनका विश्लेषण किया गया. बिलो क्लाउड इंटरैक्शन मॉडल में डाला गया. Photo: PTI

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दुनिया के अन्य हिस्सों में भी यह प्रतिशत अलग-अलग है. ट्रॉपिकल क्षेत्रों में औसतन 20%, स्विट्जरलैंड (ज्यूरिख) में 40% और बारबाडोस में 60% तक बारिश हवा में उड़ जाती है. भारत में यह आंकड़ा अपेक्षाकृत कम है, लेकिन क्षेत्रीय रूप से बहुत भिन्नता हो सकती है - राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में ज्यादा और तटीय क्षेत्रों में कम. Photo: PTI

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वर्तमान मौसम मॉडल्स में इस प्रक्रिया को सही ढंग से शामिल नहीं किया जाता था. बारिश की बूंद के भाप बनने से आसपास की हवा ठंडी होती है, जो नए बादल बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है. IITM की यह स्टडी मॉडल्स को और सटीक बनाने में मदद करेगी. Photo: PTI

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भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है. अगर 25% बारिश हवा में गायब हो रही है तो सिंचाई, भूजल और फसल पैटर्न पर असर पड़ेगा. जलवायु परिवर्तन के दौर में यह जानकारी सूखा प्रबंधन और जल संरक्षण के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी. Photo: PTI

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IITM पुणे की यह स्टडी भारतीय मॉनसून की समझ को नई दिशा देगी. 25% बारिश का हवा में वाष्पीकरण एक बड़ी खोज है, जो मौसम पूर्वानुमान को और बेहतर बनाएगी. आगे के अध्ययन पूरे भारत में किए जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय विविधता भी सामने आएगी. Photo: PTI

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