Advertisement

साइंस न्यूज़

जून सूखा, जुलाई रूठा... पहाड़ों से समंदर तक मॉनसून का कहर

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST
  • 1/14

जुलाई के पहले हफ्ते में मॉनसून ने पूरे देश में बारिश की तस्वीर बदल दी है. जून के आखिर तक जहां देश में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश हुई थी, वहीं सिर्फ आठ दिनों में यह कमी घटकर 15 फीसदी रह गई. लेकिन मॉनसून की यह वापसी सिर्फ राहत नहीं लेकर आई है. Photo: PTI

  • 2/14

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, केरल के वायनाड और कई दूसरे इलाकों में भारी बारिश की वजह से फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं. Photo: PTI

  • 3/14

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. ऐसे में बाढ़, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा भी बना रहेगा. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र है. Photo: PTI

Advertisement
  • 4/14

अगले कुछ दिनों में यह वेदर सिस्टम लगातार मजबूत होती गई और ओडिशा से होते हुए झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक पहुंची. जहां-जहां यह सिस्टम पहुंचा, वहां अच्छी और कई जगहों पर बहुत भारी बारिश हुई. इसी वजह से जून में बनी बारिश की कमी तेजी से कम हो गई. Photo: PTI

  • 5/14

हालांकि पूरे देश में हालात एक जैसे नहीं हैं. जहां मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में अच्छी बारिश हुई है, वहीं पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में अब भी सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की जा रही है. IMD के मुताबिक, 2 जुलाई को उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट के पास मॉनसून सीजन का पहला लो प्रेशर का क्षेत्र बना. Photo: PTI

  • 6/14

अगले कुछ दिनों में यह वेदर सिस्टम लगातार मजबूत होती गई. 6 जुलाई को यह ओडिशा के तट को पार करते हुए झारखंड, मध्य प्रदेश और फिर उत्तर प्रदेश की तरफ बढ़ी. जहां-जहां यह सिस्टम पहुंचा, वहां लगातार भारी से बहुत भारी बारिश हुई. इसी वजह से कई राज्यों में कुछ ही दिनों के भीतर बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ गया. Photo: PTI

Advertisement
  • 7/14

1 से 8 जुलाई के बीच पूरे देश में सामान्य से 42 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई. इस दौरान सबसे ज्यादा फायदा मध्य भारत को मिला, जहां सामान्य से 129 फीसदी ज्यादा बारिश हुई. उत्तर-पश्चिम भारत में भी सामान्य से 16 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई. Photo: PTI

  • 8/14

वहीं दक्षिण भारत में बारिश सामान्य से सिर्फ 5 फीसदी ज्यादा रही. दूसरी तरफ, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में अब भी 44 फीसदी बारिश की कमी बनी हुई है. अगर राज्यों की बात करें तो ओडिशा में 1 जुलाई तक 39 फीसदी बारिश की कमी थी, लेकिन 8 जुलाई तक वहां सामान्य से 20 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई. Photo: PTI

  • 9/14

छत्तीसगढ़ में पहले 59 फीसदी बारिश की कमी थी, जो अब घटकर 10 फीसदी रह गई है. वहीं मध्य प्रदेश में 28 फीसदी की कमी खत्म होकर सामान्य से 5 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई. इससे साफ है कि सिर्फ एक हफ्ते में मॉनसून ने कई राज्यों की बारिश की तस्वीर बदल दी. Photo: PTI

Advertisement
  • 10/14

मौसम विभाग के मुताबिक, इस समय मॉनसून के साथ पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है. आमतौर पर मॉनसून के दौरान पश्चिमी डिस्ट्रबेन्स का असर कम देखने को मिलता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह स्थिति कई बार सामने आई है. Photo: PTI

  • 11/14

जब मॉनसून और पश्चिमी  डिस्ट्रबेन्स एक साथ सक्रिय होते हैं, तब उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में बहुत भारी बारिश हो सकती है. लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है. पहाड़ी इलाकों में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है. इसी वजह से मौसम विभाग ने कई इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. Photo: PTI

  • 12/14

हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में मॉनसून ने अच्छी वापसी की है, लेकिन पूरे महीने के लिए तस्वीर पूरी तरह राहत वाली नहीं है. IMD का अनुमान है कि जुलाई में देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है. इसकी एक बड़ी वजह प्रशांत महासागर में मजबूत हो रहा अल-नीनो है. Photo: PTI

  • 13/14

आमतौर पर अल-नीनो की वजह से भारत में मॉनसून कमजोर पड़ता है और बारिश कम होती है. फिलहाल मॉनसून ने जून में बनी बारिश की बड़ी कमी को काफी हद तक कम कर दिया है. लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रह सकती है. Photo: PTI

  • 14/14

ऐसे में जहां एक तरफ यह बारिश खेती, जलाशयों और पानी की उपलब्धता के लिए राहत लेकर आई है, वहीं दूसरी तरफ कई इलाकों में बाढ़, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है. इसलिए लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. Photo: PTI

Advertisement

लेटेस्ट फोटो

Advertisement