धरती की सतह से करीब 5,150 किलोमीटर नीचे एक ऐसा हिस्सा है, जहां तापमान करीब 5,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. इतनी ज्यादा गर्मी होने के बाद भी धरती का सबसे अंदरूनी हिस्सा यानी इनर कोर ठोस है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह वहां मौजूद बहुत ज्यादा दबाव है. यही दबाव आयरन और निकेल को पिघलने से रोकता है. Photo: Getty
धरती के अंदर क्या है, यह जानना आसान नहीं है. इंसान वहां सीधे जाकर जांच नहीं कर सकता. इसलिए वैज्ञानिक भूकंप से पैदा होने वाली सिस्मिक वेव्स की मदद लेते हैं. ये वेव्स धरती के अंदर से गुजरती हैं और इनके रास्ते और रफ्तार में होने वाले बदलाव से वैज्ञानिक अंदर की परतों के बारे में पता लगाते हैं. Photo: Getty
धरती बाहर से देखने में एक ठोस गेंद जैसी लगती है, लेकिन इसके अंदर कई परतें हैं. इनमें क्रस्ट, मेंटल और कोर मुख्य हैं. कोर भी दो हिस्सों में बंटा है. बाहर का हिस्सा आउटर कोर है, जबकि सबसे अंदर वाला हिस्सा इनर कोर कहलाता है. Photo: Getty
आउटर कोर तरल है, जबकि इनर कोर ठोस है. इनर कोर मुख्य रूप से आयरन से बना है. इसमें निकेल और कुछ दूसरे तत्व भी मौजूद हैं. इसका रेडियस करीब 1,220 किलोमीटर है. यानी धरती के बीच में यह एक बहुत बड़ा ठोस हिस्सा है. Photo: Getty
इतनी गर्मी में भी ठोस क्यों है?... आमतौर पर बहुत ज्यादा गर्मी में धातु पिघल जाती है. लेकिन धरती के इनर कोर में सिर्फ तापमान ही बहुत ज्यादा नहीं है. वहां दबाव भी बेहद ज्यादा है. यह दबाव इतना ज्यादा है कि आयरन के पिघलने की स्थिति बदल जाती है. Photo: Getty
इसी वजह से करीब 5,500 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद इनर कोर ठोस बना रहता है. वहीं आउटर कोर में दबाव इनर कोर के मुकाबले कम होता है. वहां मौजूद धातु तरल अवस्था में रहती है. यानी धरती के कोर में तापमान और दबाव दोनों मिलकर तय करते हैं कि धातु ठोस रहेगी या तरल. Photo: Getty
इनर कोर के बारे में पता कैसे चलता है?... इनर कोर धरती की सतह से हजारों किलोमीटर नीचे है. इंसान अभी तक इतनी गहराई तक नहीं पहुंच पाया है. इसलिए वैज्ञानिक वहां कोई मशीन भेजकर सीधे जांच नहीं कर सकते. इसके लिए सिस्मिक वेव्स का इस्तेमाल किया जाता है. जब धरती के अंदर भूकंप आता है, तो अलग-अलग तरह की वेव्स वहां से गुजरती हैं. ये वेव्स ठोस और तरल हिस्सों में अलग तरह से चलती हैं. इनके बदलाव को देखकर वैज्ञानिक धरती के अंदर मौजूद परतों के बारे में जानकारी जुटाते हैं. इसी सिस्मिक डेटा से वैज्ञानिकों को पता चला है कि इनर कोर ठोस है, जबकि उसके आसपास का आउटर कोर तरल है. Photo: Getty
धरती के मैग्नेटिक फील्ड से भी जुड़ा है कोर... धरती के कोर का काम सिर्फ अंदर की परतों तक सीमित नहीं है. आउटर कोर में मौजूद तरल धातु की हलचल धरती के मैग्नेटिक फील्ड को बनाने में अहम भूमिका निभाती है. मैग्नेटिक फील्ड धरती के आसपास एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. यह अंतरिक्ष से आने वाले कई आवेशित कणों के असर को कम करने में मदद करता है. Photo: Getty
धरती का इनर कोर इसलिए खास है क्योंकि यहां एक साथ बहुत ज्यादा तापमान और बहुत ज्यादा दबाव मौजूद हैं. वैज्ञानिक सिस्मिक डेटा और दूसरे अध्ययनों की मदद से आज भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि धरती के इस अंदरूनी हिस्से की बनावट और इसमें समय के साथ क्या बदलाव होते हैं. Photo: Getty