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कोलंबिया भूकंप- 24 घंटे में 30 आफ्टरशॉक, 60 लाख लोगों ने महसूस किए झटके, तबाही की तस्वीरें

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:47 AM IST
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कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में 10 अगस्त 2026 की सुबह करीब 7:34 बजे एक शक्तिशाली भूकंप ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया. यह भूकंप 7.4 तीव्रता का था. इसका केंद्र चोको विभाग में सैन जोस डेल पालमार के पास था. गहराई लगभग 100 से 110 किलोमीटर थी. Photo: AP

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इतनी गहराई होने के बावजूद झटके इतने तेज थे कि दूर-दूर तक महसूस किए गए. कैली, पेरिरा, मनिजालेस, आर्मेनिया और क्विबदो जैसे शहरों में इमारतें हिलने लगीं और कई जगहों पर दीवारें फट गईं. लोग सड़कों पर भाग निकले. भूकंप के दो मिनट तक चलने वाले झटकों ने हजारों घरों को नुकसान पहुंचाया. Photo: AP

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एक दिन बाद भी कई जगहों पर इमारतें गिरती जा रही हैं क्योंकि उनकी नींव कमजोर हो चुकी है. आफ्टरशॉक से और दबाव बढ़ रहा है. क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 240 से ऊपर पहुंच गई है. सैकड़ों लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं, खासकर कैली और पेरिरा में. Photo: AFP

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अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी यूएसजीएस ने भूकंप के बाद शेकमैप को अतिरिक्त आंकड़ों के आधार पर बदला गया है. इसमें गवाहों की रिपोर्ट भी शामिल की गई जो 'डिड यू फील इट' सिस्टम के जरिए आईं.  इस भूकंप ने औसत से ज्यादा तेज झटके दिए. Photo: AP

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यूएसजीएस के अनुमान के मुताबिक 60 लाख से ज्यादा लोग तीव्रता 7 से 8 के झटकों का सामना कर चुके हैं. तीव्रता 7 या 8 का मतलब है कि बिना मजबूत बनाए गए ईंट-पत्थर के घर आसानी से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं या गिर सकते हैं. महाद्वीप के पूर्व में स्थित पेरिरा, मनिजालेस और आर्मेनिया जैसे शहरों में सबसे तेज झटके महसूस किए गए. Photo: AP

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ये शहर भूकंप केंद्र के पूर्व में हैं जहां भूगर्भीय संरचना के कारण ऊर्जा ज्यादा केंद्रित हुई. सामान्यतः इतनी गहराई वाले भूकंप कम नुकसान पहुंचाते हैं लेकिन इस बार फॉल्ट का प्रकार और ऊर्जा का फ्रीक्वेंसी पैटर्न ऐसा था कि इमारतों को ज्यादा नुकसान पहुंचा. Photo: AP

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कोलंबिया प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर पर स्थित है जहां नाज्का प्लेट दक्षिण अमेरिकी प्लेट के नीचे धंस रही है. इस भूकंप का कारण इंटरमीडिएट डेप्थ पर स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग था. यानी प्लेट के अंदर ही दरार पड़ी और ऊर्जा निकली. गहराई ज्यादा होने से सतह पर कम ऊर्जा पहुंचना चाहिए था लेकिन स्थानीय मिट्टी की संरचना, पहाड़ी इलाके और पुरानी इमारतों की कमजोरी ने नुकसान बढ़ा दिया. Photo: AP

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कोलंबियाई भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने भी इसे 21वीं सदी में देश का सबसे शक्तिशाली भूकंप बताया. इससे पहले 1999 में कॉफी क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें हजारों लोग मारे गए थे. इस बार भी वही क्षेत्र प्रभावित हुआ है इसलिए पुरानी यादें ताजा हो गई हैं.  Photo: AP

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आफ्टरशॉक की संख्या 30 से ज्यादा हो चुकी है जिनमें सबसे बड़ा करीब 5.0 तीव्रता का था. ये आफ्टरशॉक बचाव कार्यों को और मुश्किल बना रहे हैं क्योंकि मलबा और अस्थिर हो रहा है. कैली कोलंबिया का तीसरा सबसे बड़ा शहर है जहां दर्जनों इमारतें पूरी तरह या आंशिक रूप से गिर गईं.  Photo: AP

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अस्पतालों में भी नुकसान हुआ और मरीजों को निकालना पड़ा. पेरिरा जो कॉफी उत्पादक क्षेत्र का मुख्य शहर है वहां भी सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त हुए. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार सैकड़ों लोग अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं. बचाव दल हेडलैम्प लगाकर रात भर खुदाई कर रहे हैं. Photo: AP

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स्वयंसेवक भी हाथों से मलबा हटा रहे हैं. चोको विभाग जो गरीब और दूरदराज का इलाका है वहां सड़कें क्षतिग्रस्त होने से मदद पहुंचना मुश्किल हो रहा है. संचार व्यवस्था कई जगहों पर ठप हो गई थी जिससे लापता लोगों की सही संख्या जानना कठिन है. Photo: AP

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शुरुआती रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या हजारों में बताई जा रही थी. सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है. सभी संसाधन लगा दिए गए हैं. नए राष्ट्रपति ने खुद बचाव कार्यों का नेतृत्व संभाला है. अंतरराष्ट्रीय मदद के प्रस्ताव भी आ रहे हैं. Photo: AP

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इस भूकंप ने सिर्फ इमारतें ही नहीं गिराई बल्कि पूरे समाज की कमजोरियों को उजागर कर दिया. कई पुरानी इमारतें भूकंप प्रतिरोधी मानकों के अनुसार नहीं बनी थीं. ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और मिट्टी के घर आसानी से ढह गए. शहरों में ऊंची इमारतों की नींव कमजोर साबित हुई. Photo: AP

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आर्थिक रूप से कॉफी उत्पादक क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है क्योंकि खेत और भंडारण सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुईं. अस्पताल और स्कूल बंद होने से स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं प्रभावित हुईं. हजारों लोग बेघर हो गए हैं. अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं. बिजली और पानी की आपूर्ति कई जगहों पर बाधित है. Photo: AP

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मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ेगा क्योंकि लोग बार-बार आफ्टरशॉक से डर रहे हैं. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को खास देखभाल की जरूरत है. एक दिन बाद भी इमारतें गिरना जारी हैं क्योंकि संरचनात्मक क्षति धीरे-धीरे असर दिखा रही है. बचाव दल को सावधानी से काम करना पड़ रहा है ताकि और लोग न दबें. Photo: AP

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भारी मशीनरी पहुंचाने में समय लग रहा है खासकर पहाड़ी इलाकों में. चिकित्सा सुविधाओं पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि घायलों की संख्या सैकड़ों में है. खाद्य वितरण और स्वच्छ पानी की व्यवस्था जरूरी हो गई है. Photo: AP

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