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अफगानिस्तान का 'गोल्ड रश'... सोना पाने की होड़ में छलनी हुआ पहाड़, पानी हुआ बेकार

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:00 AM IST
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अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में सोने की तलाश तेजी से बढ़ रही है. शिआवा इलाके में दर्जनों एक्सकेवेटर दिन-रात पहाड़ों की खुदाई कर रहे हैं. प्रांत की राजधानी फैजाबाद से करीब 50 किलोमीटर दूर इस इलाके में देशभर से हजारों मजदूर काम के लिए पहुंचे हैं. Photo: AFP

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रोजगार के कम मौकों के बीच सोने की खदानें लोगों के लिए कमाई का नया जरिया बन गई हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों से मजदूर यहां पहुंच रहे हैं, जबकि निवेशक सोना निकालने के लिए जमीन और खनन के काम में पैसा लगा रहे हैं. Photo: AFP

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लेकिन खनन बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों की परेशानियां भी बढ़ रही हैं. उनका कहना है कि खुदाई से नदी का पानी खराब हो रहा है, खेतों पर धूल जम रही है और पशुओं के लिए चारा भी कम हो गया है. यानी सोने से होने वाली कमाई के साथ इसकी कीमत भी स्थानीय लोगों को चुकानी पड़ रही है. Photo: AFP

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स्थानीय किसान मोहम्मद अमीन इसका उदाहरण हैं. उनका कहना है कि खनन शुरू होने के बाद नदी का पानी पीने लायक नहीं रहा. अब इस पानी से नहाना भी मुश्किल है और नदी किनारे पहले जो घास उगती थी, वह भी खत्म हो गई है. Photo: AFP

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अमीन बताते हैं कि धूल और हवा की वजह से अब खेती करना भी मुश्किल हो गया है. इसका सीधा असर उनके पशुपालन पर पड़ा है. पहले वह करीब 40 बकरियां पाल लेते थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर करीब 15 रह गई है. Photo: AFP

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अमीन ने अपनी जमीन एक खनन कंपनी को करीब 20 हजार डॉलर में लीज पर दी थी. उनका कहना है कि कंपनी ने इस रकम का सिर्फ आधा हिस्सा दिया. खनन का काम रुकने के बाद खेतों को पहले जैसा करने का वादा भी पूरा नहीं किया गया. Photo: AFP

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फिलहाल अमीन के गांव में खनन का काम रुका हुआ है, लेकिन आसपास के इलाकों में खुदाई जारी है. उनके घर से ज्यादा दूर नहीं, गुलक-दारा घाटी में दर्जनों मशीनें पहाड़ों को काट रही हैं और सोना निकालने का काम चल रहा है. Photo: AFP

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अफगानिस्तान में रोजगार के अवसर सीमित हैं, इसलिए खनन का काम देशभर के लोगों को अपनी ओर खींच रहा है. शिआवा इलाके में हजारों मजदूर सोने की खुदाई और उससे जुड़े दूसरे कामों में लगे हुए हैं. इससे स्थानीय स्तर पर कारोबार और कमाई के कुछ नए मौके भी बने हैं. Photo: AFP

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हालांकि, जिन इलाकों में लोग खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं, वहां खनन का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है. अगर पानी और जमीन की हालत खराब होती है तो इसका असर सिर्फ आज की कमाई पर नहीं, बल्कि आने वाले समय में लोगों की रोजी-रोटी पर भी पड़ सकता है. Photo: AFP

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2021 में सत्ता में लौटने के बाद तालिबान प्रशासन ने अफगानिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों से कमाई बढ़ाने पर जोर दिया है. सरकार खनन क्षेत्र को बढ़ाकर सरकारी राजस्व और रोजगार दोनों बढ़ाना चाहती है. इसी वजह से देश के कई हिस्सों में खनन गतिविधियां बढ़ी हैं. Photo: AFP

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अफगानिस्तान में सोने के अलावा तांबा, कोयला, लौह अयस्क और लिथियम जैसे कई खनिज भी मौजूद हैं. इन संसाधनों को देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जाता है. लेकिन बड़े स्तर पर खनन के साथ पर्यावरण और स्थानीय लोगों के हितों की सुरक्षा भी जरूरी है. Photo: AFP

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सोने की खुदाई में पहाड़ों से बड़ी मात्रा में मिट्टी और पत्थर हटाए जाते हैं. इससे धूल बढ़ सकती है और खनन का मलबा नदियों और आसपास की जमीन तक पहुंच सकता है. कुछ तरीकों से सोना निकालने में इस्तेमाल होने वाले रसायन भी पानी और मिट्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. Photo: AFP

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बदख्शां में अमीन की परेशानी इसी चिंता को सामने लाती है. सोने की खदानों से रोजगार और पैसा मिल रहा है, लेकिन अगर इसके बदले खेती, पशुपालन और साफ पानी का नुकसान होता है तो स्थानीय लोगों के लिए यह फायदा लंबे समय तक टिकना मुश्किल होगा. Photo: AFP

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