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बैक्टीरिया के ये 10 नाम जान लीजिए! हैजा, प्लेग, टीबी से लेकर निमोनिया तक का बनते हैं कारण

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:22 AM IST
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रूस में इस समय प्लेग फैल रहा है. जो एक बैक्टीरिया से होता है. दुनिया में कई ऐसे बैक्टीरिया हैं जो इंसानों में गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं. इनमें कुछ दूषित पानी और खाने से फैलते हैं, जबकि कुछ सांस की बूंदों या संक्रमित व्यक्ति के करीबी संपर्क से फैलते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कई ऐसे बैक्टीरिया को लेकर चिंता जताई है, जो बड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं या जिनमें दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध बढ़ रहा है. Photo: Getty
 

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इन बैक्टीरिया का असर हर जगह एक जैसा नहीं है. कुछ का सबसे ज्यादा असर अफ्रीका में दिखता है, कुछ दक्षिण एशिया में ज्यादा आम हैं और कुछ दुनिया के कई हिस्सों में पाए जाते हैं. भारत में भी इन 10 में से कई बैक्टीरिया से संक्रमण के मामले सामने आते हैं. आइए जानते हैं कौन सा बैक्टीरिया कौन सी बीमारी करता है, दुनिया में कहां ज्यादा पाया जाता है और भारत में इसकी क्या स्थिति है. Photo: Getty
 

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विब्रियो कॉलेरी: हैजा... विब्रियो कॉलेरी से हैजा होता है. यह दूषित पानी और खाने से फैलता है. इलाज न मिलने पर तेज दस्त और शरीर में पानी की कमी जानलेवा हो सकती है. 2025 में हैजा के सबसे ज्यादा मामले डब्ल्यूएचओ के अफ्रीकी और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में दर्ज हुए. यमन, दक्षिण सूडान, सूडान, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, अंगोला, नाइजीरिया और बांग्लादेश सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में रहे. भारत में भी विब्रियो कॉलेरी पाया जाता है. एनसीडीसी की 2024 सर्विलांस में मल के नमूनों में दर्ज बैक्टीरिया में विब्रियो कॉलेरी शामिल था. Photo: Getty

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यर्सिनिया पेस्टिस: प्लेग... यर्सिनिया पेस्टिस से प्लेग होता है. यह आमतौर पर संक्रमित पिस्सुओं और छोटे स्तनधारी जानवरों से इंसानों तक पहुंचता है. इसका फेफड़ों वाला रूप संक्रमित व्यक्ति से सांस के जरिए भी फैल सकता है. आज प्लेग के ज्यादातर मामले अफ्रीका में आते हैं. 2019 से 2025 के बीच डब्ल्यूएचओ को मिले ज्यादातर मामले कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और मेडागास्कर से थे. भारत में प्लेग के मामले बहुत कम हैं, लेकिन यह पूरी तरह गायब नहीं है. 2002 में हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में डब्ल्यूएचओ ने यर्सिनिया पेस्टिस की पुष्टि वाले 16 मामले दर्ज किए थे. Photo: Getty

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शिगेला डिसेंट्री: पेचिस... शिगेला डिसेंट्री बैक्टीरियल पेचिस कर सकता है. यह दूषित पानी, खाना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है. शिगेला से होने वाली बीमारी का बड़ा बोझ उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में देखा जाता है, खासकर छोटे बच्चों में. शिगेला भारत में संक्रमण और प्रकोप का कारण रहा है. आईसीएमआर की बैक्टीरियोलॉजी निगरानी में शिगेला डिसेंट्री भी शामिल है. 2024 की एनसीडीसी सर्विलांस में शिगेला के आइसोलेट्स भी दर्ज हुए. Photo: Getty

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साल्मोनेला टाइफी: टाइफाइड... साल्मोनेला टाइफी से टाइफाइड होता है. यह दूषित पानी और खाने से फैलता है. टाइफाइड का खतरा खासकर दक्षिण एशिया और उप-सहारा अफ्रीका के उन इलाकों में ज्यादा है जहां साफ पानी और सफाई की सुविधा कम है. भारत में टाइफाइड के मामले लगातार सामने आते हैं. एनसीडीसी की 2024 सर्विलांस में साल्मोनेला टाइफी और पैराटाइफी के आइसोलेट्स दर्ज किए गए हैं. Photo: Getty
 

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बोर्डेटेला पर्टुसिस: काली खांसी... बोर्डेटेला पर्टुसिस से पर्टुसिस यानी काली खांसी होती है. यह खांसने और छींकने से निकलने वाली बूंदों से फैलती है और छोटे बच्चों के लिए ज्यादा गंभीर हो सकती है. यह बैक्टीरिया दुनिया के अलग-अलग देशों में पाया जाता है. 2025 में दुनिया भर में 2.64 लाख से ज्यादा पर्टुसिस मामले दर्ज हुए. डब्ल्यूएचओ के भारत टीकाकरण आंकड़ों में 2025 में भारत में 2,149 पर्टुसिस मामले दर्ज हैं. Photo: Getty
 

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माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस: टीबी... माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस से टीबी होती है. यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और हवा के जरिए फैलती है. टीबी दुनिया के सभी हिस्सों में है, लेकिन 2024 में सबसे ज्यादा नए मामले दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में आए. भारत अकेले दुनिया के करीब 25 प्रतिशत नए टीबी मामलों के लिए जिम्मेदार था. भारत इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में है. 2024 में दुनिया के कुल नए टीबी मामलों में भारत की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत थी. Photo: Getty

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निसेरिया मेनिन्जाइटिडिस: मेनिन्जाइटिस... निसेरिया मेनिन्जाइटिडिस मेनिन्जोकॉकल मेनिन्जाइटिस और खून का गंभीर संक्रमण कर सकता है. इसका सबसे बड़ा बोझ अफ्रीका के मेनिन्जाइटिस बेल्ट में है, जो सेनेगल से इथियोपिया तक फैला है. 2025 में इस क्षेत्र के 24 देशों ने 21,526 संदिग्ध मामले और 971 मौतें दर्ज कीं. भारत में भी निसेरिया मेनिन्जाइटिडिस से मेनिन्जाइटिस के मामले रिपोर्ट हुए हैं. भारतीय अध्ययनों में यह बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस के कारणों में शामिल पाया गया है. Photo: Getty

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क्लेबसिएला न्यूमोनिया: गंभीर संक्रमण... क्लेबसिएला न्यूमोनिया से निमोनिया, पेशाब का संक्रमण, खून का संक्रमण और मेनिन्जाइटिस हो सकता है. इसके दवा-प्रतिरोधी रूप बड़ी चिंता हैं. इसका दवा-प्रतिरोधी रूप दुनिया के सभी छह डब्ल्यूएचओ क्षेत्रों में पाया गया है. भारत समेत 16 देशों में हाइपरवायरुलेंट क्लेबसिएला न्यूमोनिया की मौजूदगी दर्ज की गई है. भारत में यह अस्पतालों और गंभीर संक्रमणों से जुड़ा महत्वपूर्ण बैक्टीरिया है. एनसीडीसी की 2024 सर्विलांस में क्लेबसिएला प्रजातियां बड़ी संख्या में दर्ज हुईं. Photo: Getty
 

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स्ट्रेप्टोकॉकस न्यूमोनिया: निमोनिया... स्ट्रेप्टोकॉकस न्यूमोनिया से निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और खून का गंभीर संक्रमण हो सकता है. यह गंभीर निमोनिया का प्रमुख कारण है. यह दुनिया भर में पाया जाता है. बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस का बड़ा बोझ अफ्रीका के मेनिन्जाइटिस बेल्ट समेत कई क्षेत्रों में है. भारतीय अध्ययनों में स्ट्रेप्टोकॉकस न्यूमोनिया को निमोनिया का प्रमुख कारण पाया गया है. एक भारतीय अध्ययन में वयस्कों के निमोनिया मामलों में इसका हिस्सा करीब 19 प्रतिशत था. Photo: Getty
 

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एस्चेरिशिया कोलाई: फूड पॉइजनिंग... ई. कोलाई की ज्यादातर किस्में नुकसान नहीं करतीं, लेकिन कुछ किस्में गंभीर फूड पॉइजनिंग, दस्त और खूनी दस्त कर सकती हैं. बीमारी पैदा करने वाला ई. कोलाई दुनिया के कई हिस्सों में पाया जाता है. फूडबोर्न बीमारी का बोझ खासकर अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में ज्यादा है. एनसीडीसी की 2024 सर्विलांस में ई. कोलाई सबसे ज्यादा पाए जाने वाले प्राथमिक बैक्टीरिया में था और कुल आइसोलेट्स में इसकी हिस्सेदारी 33 प्रतिशत थी. Photo: Getty
 

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इन 10 बैक्टीरिया की मौजूदगी और असर हर देश में एक जैसा नहीं है. कुछ जगहों पर दूषित पानी और खराब सफाई बड़ा कारण है, तो कुछ जगहों पर अस्पतालों में बढ़ता एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस चिंता बढ़ा रहा है. भारत में भी इन बैक्टीरिया में से कई की मौजूदगी आधिकारिक निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययनों में दर्ज है. इसलिए इनके संक्रमण की समय पर पहचान, निगरानी और सही इलाज बेहद जरूरी है. Photo: Getty

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