स्वस्थ रहने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को ठीक रखना बहुत जरूरी है. अन्यथा छोटी-छोटी समस्याएं शरीर को लगी रहती हैं. शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए खान-पान व अन्य चीजों के साथ यदि आप अपने घर की उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा को ठीक रखें तो बीमारी आपसे कोसों दूर रहेगी. वहीं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को टीक रखना बेहद जरूरी है.
घर की दिशाओं का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है, खासकर जब बात उत्तर-उत्तर-पूर्व और ईशान कोण की हो. वास्तु शास्त्र के अनुसार ये दोनों दिशाएं जल तत्व से जुड़ी होती हैं और व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) तथा बुद्धि से सीधा संबंध रखती हैं. ऐसे में इन दिशाओं में किसी भी प्रकार का वास्तु दोष स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है. उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को नियंत्रित करती है. यदि इस दिशा में गड़बड़ी हो, जैसे भारी सामान, गंदगी, अंधेरा या अव्यवस्था, तो व्यक्ति की इम्युनिटी कमजोर हो सकती है. इसका परिणाम बार-बार बीमार पड़ना, थकान, एलर्जी या संक्रमण के रूप में सामने आ सकता है.
वहीं, इसके ठीक बराबर स्थित ईशान कोण को ज्ञान, बुद्धि और मानसिक स्पष्टता की दिशा माना जाता है. यदि इस दिशा में वास्तुदोष हो जाए, तो व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसके कारण भ्रम, तनाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. जब शरीर और दिमाग दोनों ही प्रभावित होते हैं, तो जीवन की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है.
हालांकि दोनों दिशाएं जल तत्व से जुड़ी हैं, लेकिन यहां जल तत्व की अधिकता भी नुकसानदायक साबित हो सकती है. उदाहरण के लिए अगर ईशान कोण में सीलन, पानी का जमाव या लगातार नमी बनी रहती है, तो यह वातावरण को नकारात्मक बना देती है. इससे घर में रहने वाले लोगों को श्वसन संबंधी समस्याएं, त्वचा रोग या बार-बार सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
ईशान कोण में टॉयलेट
सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब ईशान कोण में टॉयलेट बना हो. इस दिशा में टॉयलेट को बड़ा दोष माना गया है. इससे न केवल स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि मानसिक शांति भी भंग होती है. ऐसे घरों में रहने वाले लोग अक्सर तनाव, चिंता और असंतुलन महसूस कर सकते हैं. इन दिशाओं को साफ, हल्का और खुला रखना बेहद जरूरी है. उत्तर-उत्तर-पूर्व और ईशान कोण में प्राकृतिक रोशनी और ताजगी बनी रहनी चाहिए. यहां पूजा स्थान, ध्यान कक्ष या जल से संबंधित सकारात्मक तत्व जैसे छोटा फव्वारा या जल पात्र रखना शुभ माना जाता है, लेकिन पानी का ठहराव या गंदगी नहीं होनी चाहिए.
अगर पहले से इन दिशाओं में कोई वास्तुदोष मौजूद है, तो कुछ उपाय अपनाकर उसके प्रभाव को कम किया जा सकता है. जैसे, सीलन को दूर करना, उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था करना, हल्के रंगों का उपयोग करना और नियमित सफाई बनाए रखना.
अंशु पारीक