Ganesh Chaturthi 2026: घर की इस दिशा में स्थापित करें गणपति, नौकरी-व्यापार में होगी तरक्की

ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को बुद्धि, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी दिशा माना जाता है. इसलिए इस दिशा में भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित करके पूजा करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा उत्तर दिशा भी गणपति पूजन के लिए उपयुक्त मानी जाती है. उत्तर दिशा का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है और बुध बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार तथा संवाद का कारक ग्रह है.

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ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को बुद्धि, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी दिशा माना जाता है. (Photo: ITG) ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को बुद्धि, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी दिशा माना जाता है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST

व्यापार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, मेहनत के बावजूद नए अवसर हाथ नहीं आ रहे या जीवन में आगे बढ़ने के रास्ते स्पष्ट नहीं हो पा रहे हैं तो भगवान गणपति की आराधना करिए. गणपति को बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है. वहीं वास्तु में उत्तर दिशा को नए अवसर, प्रगति और व्यापार से जोड़कर देखा जाता है. इसका संबंध बुध ग्रह से भी है. ऐसे में गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की आराधना के साथ उनकी प्रतिमा की दिशा का भी विशेष महत्व है. आइए 14 सितंबर को शुरू हो रहे गणेश महोत्सव से पहले आपको बताते हैं कि गणपति की पूजा में दिशाओं का क्या महत्व है.

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ईशान या उत्तर दिशा में गणपति स्थापना
ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को बुद्धि, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी दिशा माना जाता है. इसलिए इस दिशा में भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित करके पूजा करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा उत्तर दिशा भी गणपति पूजन के लिए उपयुक्त मानी जाती है. उत्तर दिशा का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है और बुध बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार तथा संवाद का कारक ग्रह है. जिन लोगों की कुंडली में बुध कारक ग्रह के रूप में मजबूत स्थिति में हो और कन्या राशि में उच्च का होकर स्थित हो, उनके लिए गणपति पूजन में उत्तर दिशा का विशेष महत्व है. पूजा के दौरान उत्तर या ईशान दिशा की ओर मुख करके भगवान गणेश का ध्यान करना भी शुभ माना जाता है.

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यदि किसी कारणवश उत्तर दिशा में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करना संभव न हो तो वास्तु के अनुसार इस दिशा में तुलसी का पौधा या मनी प्लांट लगाया जा सकता है. मनी प्लांट की बेल नीचे की ओर लटकने के बजाय ऊपर की तरफ बढ़ती हुई होनी चाहिए. इसे घर में विकास, उन्नति और आगे बढ़ने की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.

उत्तर दिशा का वास्तु दोष देगा नुकसान
घर की उत्तर दिशा का संबंध जल तत्व और बुध से माना जाता है. यदि इस दिशा में वास्तुदोष हो तो बुध से संबंधित शुभ फल प्रभावित होने लगते है. इसलिए उत्तर दिशा को साफ, हल्का और व्यवस्थित रखना चाहिए. इस हिस्से का स्तर घर के अन्य हिस्सों की तुलना में अनावश्यक रूप से ऊंचा नहीं होना चाहिए.

उत्तर दिशा में अग्नि और पृथ्वी तत्व से जुड़े रंगों का प्रयोग भी वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता है. लाल, नारंगी, गुलाबी और पीले रंग का अधिक इस्तेमाल यहां नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करता है. इसके विपरीत हरा, नीला और सफेद रंग उत्तर दिशा के लिए शुभ माने जाते हैं.

घर की खुशहाली-उन्नति के लिए करें ये उपाय
उत्तर दिशा में पौधे और हरियाली रखना भी वास्तु की दृष्टि से लाभकारी माना गया है. विशेष रूप से ऐसे छोटे छोटे पौधे जिनकी वृद्धि ऊपर की ओर हो, उन्हें प्रगति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. उत्तर दिशा को स्वच्छ, खुला और हरा-भरा रखने से घर में अवसरों और आर्थिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण बनता है. गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति की आराधना करते समय केवल पूजा की विधि ही नहीं, बल्कि पूजा स्थल की दिशा और उसके आस-पास के वातावरण पर भी ध्यान देना चाहिए. श्रद्धा के साथ सही दिशा में पूजा और घर की उत्तर दिशा को व्यवस्थित रखना बुद्धि, व्यापार और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक प्रयास को बढ़ाती है.

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