Guru Purnima Satya Narayan Vrat Katha: गुरु पूर्णिमा पर पढ़ें सत्यनारायण की व्रत कथा, श्रीहरि का बना रहेगा आशीर्वाद

Guru Purnima Satya Narayan Vrat Katha: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से श्री सत्यनारायण व्रत कथा सुनने से जीवन के सभी दुख-दरिद्रता दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है.

Advertisement
सत्यनारायण व्रत कथा (Photo: ITG) सत्यनारायण व्रत कथा (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:34 AM IST

Guru Purnima Satya Narayan Vrat Katha: गुरु पूर्णिमा के मौके पर कई घरों में भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन किया जाता है. इस दिन किसी योग्य पंडित को बुलाकर विधि-विधान से कथा कराना शुभ माना जाता है. पूजा की शुरुआत सबसे पहले भगवान गणेश से की जाती है, फिर नवग्रह पूजन और उसके बाद भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है. मान्यता है कि चतुर्मास के दौरान सत्यनारायण कथा करवाने से विशेष फल मिलता है और श्रीहरि की कृपा बनी रहती है. कथा के लिए घर में केले के पत्तों से मंडप सजाया जाता है और परिवार व रिश्तेदारों को आमंत्रित किया जाता है.

Advertisement

सत्यनारायण की कथा

कथा के अनुसार, एक बार नारद जी पृथ्वी लोक पर घूमते हुए लोगों की स्थिति देखकर दुखी हो गए. उन्होंने देखा कि मनुष्य अपने कर्मों के कारण तरह-तरह के कष्ट झेल रहे हैं. यह देखकर उनका मन करुणा से भर गया और वे भगवान विष्णु के पास क्षीरसागर पहुंच गए. वहां उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि कोई ऐसा सरल उपाय बताएं, जिससे लोगों के दुख दूर हो सकें. भगवान विष्णु ने नारद जी से कहा कि उन्होंने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया है. इसके बाद उन्होंने श्री सत्यनारायण व्रत के बारे में बताया, जो बहुत पुण्य देने वाला और मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है. भगवान ने कहा कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि से करने पर मनुष्य के जीवन के दुख दूर होते हैं और उसे सुख-समृद्धि मिलती है. इसके बाद यह व्रत एक ब्राह्मण, लकड़हारे, राजा और व्यापारी जैसे कई लोगों ने किया और उन्हें इसका लाभ मिला. इससे यह संदेश मिलता है कि यह व्रत कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह अमीर हो या गरीब, पुरुष हो या महिला.

Advertisement

कथा में एक व्यापारी का भी उल्लेख मिलता है, जिसने पहले इस व्रत को गंभीरता से नहीं लिया. उसने संतान होने के बाद व्रत करने का वादा किया, लेकिन बाद में भी टालता रहा. परिणामस्वरूप उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. बाद में जब उसकी पत्नी और बेटी ने श्रद्धा से व्रत किया, तो भगवान की कृपा से उसके सभी कष्ट दूर हो गए. इसी तरह एक राजा ने भी भगवान का अनादर किया और प्रसाद तक नहीं लिया, जिसके कारण उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा. बाद में जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सच्चे मन से पूजा की, तो उसकी सारी परेशानियां खत्म हो गईं. मुख्य संदेश यह है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है. सत्य को अपनाना और भक्ति के मार्ग पर चलना ही इस व्रत का असली महत्व है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »