जब भी प्यार की बात आती है, तो पेरिस और वहां मौजूद मशहूर एफिल टावर (Eiffel Tower) का जिक्र जरूर आता है. इन दिनों एक बार फिर एफिल टावर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह प्यार नहीं बल्कि प्रदर्शन है. जी हां, पेरिस स्थित एफिल टावर उस वक्त अचानक सुर्खियों में आ गया, जब यहां कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी. वजह थी एक हिंदू धार्मिक संगठन से जुड़े लोगों का निजी दौरा. आरोप लगा कि इस विजिट के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ जगहों और काम से दूर रखा गया. इसके बाद फ्रांस में लैंगिक समानता (Gender Equality) को लेकर बहस छिड़ गई. इसकी वजह से एफिल टावर बंद किया गया था. हालांकि, अब वो आम लोगों के लिए दोबारा खुल गया है.
जिस संगठन के दौरे को लेकर ये विवाद हुआ, उसका नाम है बैप्स (BAPS) यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (Bochasanwasi Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha). ये स्वामीनारायण परंपरा से जुड़ा एक वैश्विक आध्यात्मिक संगठन है. गुजरात के एक मंदिर से शुरू हुआ BAPS आज भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया तक फैल चुका है. फ्रांस में इस समय BAPS इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि संगठन ने पेरिस से करीब 30 किलोमीटर दूर बुसी-सैंट-जॉर्ज (Bussy-Saint-Georges) में एक विशाल नए मंदिर का उद्घाटन किया है. इसे यूरोप में पारंपरिक शैली में बनाया गया सबसे बड़ा हिंदू मंदिर बताया जा रहा है. लेकिन एफिल टावर पर ऐसा क्या हुआ कि फ्रांस में लैंगिक समानता को लेकर बहस छिड़ी? क्यों कर्मचारियों ने हड़ताल की? आखिर ये विवाद है क्या? चलिए जानते हैं.
एफिल टावर में आखिर हुआ क्या?
सोमवार को एफिल टावर को कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बंद करना पड़ा. कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जब BAPS से जुड़े करीब 100 लोग वहां का दौरा करने आए, तो उस दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ जगहों पर काम करने से रोक दिया गया.
आरोप है कि कुछ महिला कर्मचारियों को उनके वर्कस्टेशन से हटाया गया और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगाया गया. कुछ अन्य महिलाओं को ये हिदायत दी गई कि जब तक BAPS का प्रतिनिधिमंडल वहां मौजूद है, वे कुछ खास जगहों पर न जाएं.
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें ऐसे प्रोफेशनल इंस्ट्रक्शंस दिए गए, जिनकी वजह से महिलाओं को सिर्फ उनके लिंग के आधार पर पीछे किया गया, उनकी जगह पुरुषों को रखा गया और उनकी लैंगिक पहचान के आधार पर उनके वजूद को ही खारिज कर दिया गया.
एफिल टावर की देखरेख करने वाली कंपनी Société d'Exploitation de la tour Eiffel यानी SETE ने भी माना कि BAPS के प्रतिनिधिमंडल ने दौरे का ऐसा इंतजाम करने को कहा था, जिसमें महिलाओं से संपर्क कम से कम हो. SETE ने कहा कि उसे प्रतिनिधिमंडल की ऐसी शर्तों को एक्सेप्ट नहीं करना चाहिए था. कंपनी के मुताबिक, ये फ्रांस में महिलाओं और पुरुषों की समानता के सिद्धांत और उसके मूल्यों के खिलाफ था.
BAPS ने क्या कहा?
धीरे-धीरे ये विवाद बहुत ज्यादा बढ़ गया, जिसके बाद BAPS को सफाई देनी पड़ी. BAPS ने कहा कि वो इस मामले को बहुत ही गंभीरता से ले रहा है. संगठन ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में काफी लोग शामिल थे. इसलिए एफिल टावर की टीम के साथ मिलकर उनके दौरे का इंतजाम किया गया था. दौरे का समय आमतौर पर टावर खुलने के आसपास रखा गया, ताकि वहां आने वाले बाकी लोगों को ज्यादा परेशानी न हो.
BAPS ने ये भी कहा कि उसकी जानकारी के अनुसार किसी को एफिल टावर में एंट्री करने से नहीं रोका गया था. संगठन ने इस घटना से दुखी या परेशान हुए लोगों से माफी मांगी. साथ ही, BAPS ने कहा कि वह आपसी सम्मान, एक-दूसरे की मदद और सभी के सम्मान जैसे उसूलों पर कायम रहेगा.
ये मामला सिर्फ एफिल टावर तक सीमित नहीं रहा. फ्रांस में ये राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है. फ्रांस की समानता मंत्री (France's Equality Minister) औरोर बर्जे (Aurore Bergé) ने कहा कि महिलाओं से खुद को 'गायब' करने या पीछे हटने के लिए नहीं कहा जा सकता. उन्होंने साफ कहा कि कोई भी धर्म फ्रांस के कानून से ऊपर नहीं है.
BAPS क्या है?
BAPS का पूरा नाम बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था है. ये स्वामीनारायण परंपरा से जुड़ा एक संप्रदाय है, जिसे हिंदू धर्म की वैष्णव परंपरा का हिस्सा माना जाता है. BAPS सिर्फ एक धार्मिक संस्था नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में फैला एक बड़ा आध्यात्मिक और सामाजिक संगठन है.
इसके तहत दुनिया भर में 1,300 से ज्यादा मंदिर और 5,025 से ज्यादा केंद्र हैं. यहां धार्मिक कार्यक्रमों के साथ युवाओं और परिवारों के लिए कार्यक्रम भी किए जाते हैं. इसके अलावा शिक्षा, संस्कृति, समाज सेवा और जरूरतमंदों की मदद से जुड़े काम भी किए जाते हैं. BAPS की सबसे खास पहचान इसके भव्य और पारंपरिक पत्थर से बने मंदिर हैं.
गुजरात से शुरू हुई BAPS की कहानी
BAPS का इतिहास साल 1907 से जुड़ा है. इसी साल शास्त्री जी महाराज ने गुजरात के बोचासन (Bochasan) में पहला BAPS मंदिर स्थापित किया था. इसी बोचासन मंदिर के नाम से संगठन का नाम पड़ा था. धीरे-धीरे ये संगठन गुजरात से निकलकर भारत के दूसरे हिस्सों और फिर दुनिया के कई देशों तक फैलता गया. आज BAPS की मौजूदगी भारत, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में है.
BAPS के बड़े और मशहूर मंदिर
BAPS के कई मंदिर दुनियाभर में अपनी भव्यता के लिए जाने जाते हैं. इनमें अक्षरधाम मंदिर खास तौर पर मशहूर हैं.
गांधीनगर का अक्षरधाम मंदिर: गुजरात के गांधीनगर में बना अक्षरधाम मंदिर, BAPS द्वारा बनाए गए बड़े मंदिरों में से एक है. इसे साल 1992 में खोला गया था. इसका उद्घाटन BAPS के प्रमुख संत स्वामी महाराज ने किया था.
दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर: नई दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर भी BAPS ने ही बनाया है. इसे 6 नवंबर 2005 को खोला गया था. ये सिर्फ एक मंदिर नहीं है. यहां एक्जीबिशन हॉल, सुंदर बगीचे और कई तरह के ट्रेडिशनल अट्रैक्शन भी मौजूद हैं.
अमेरिका का रॉबिंसविले (Robbinsville) मंदिर: अमेरिका के न्यू जर्सी में स्थित BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम भी संगठन के सबसे बड़े और चर्चित मंदिरों में शामिल है. ये मंदिर रॉबिंसविले में करीब 183 एकड़ में फैला है. इसे बनाने में लगभग 12 साल लगे और इसका निर्माण 2011 में शुरू हुआ. मंदिर का उद्घाटन 2023 में हुआ.
अबू धाबी का BAPS मंदिर: BAPS के द्वारा विदेशों में बनाए गए मंदिरों में एक और बड़ा पड़ाव साल 2024 में आया, जब अबू धाबी में संगठन के हिंदू मंदिर का उद्घाटन हुआ. इसे पश्चिम एशिया में पारंपरिक तरीके से बनाए गए पहले हिंदू पत्थर के मंदिर के तौर पर देखा गया. UAE ने अबू मुरैखाह (Abu Mureikhah) में इस मंदिर के लिए 17.5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई थी.
BAPS के कितने मंदिर हैं और ये कहां-कहां हैं?
BAPS की पहुंच सिर्फ मंदिरों तक नहीं है. संगठन के दुनिया भर में हजारों केंद्र हैं, जहां धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां की जाती हैं.
ब्रिटेन में संगठन की 2019 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, उस साल BAPS ने करीब 64 लाख पाउंड चैरिटी के कामों पर खर्च किए थे. 2018 में यह रकम करीब 1.17 करोड़ पाउंड थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के अंत तक संगठन की कुल संपत्ति करीब 1.4 करोड़ पाउंड थी. इसमें करीब 1.2 करोड़ पाउंड ऐसे फंड थे, जिन्हें संगठन अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर सकता था.
महिलाओं को लेकर पहले भी उठे हैं सवाल
एफिल टावर विवाद BAPS से जुड़ा महिलाओं का पहला विवाद नहीं है. BAPS के स्वामियों को लेकर कहा जाता है कि वे ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और महिलाओं के संपर्क से बचते हैं. हालांकि, इस नीति से जुड़ी सभी बातों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
Entrepreneur Arnaud Bertrand ने X पर दावा किया था कि BAPS के गुरु फ्रांस में नए मंदिर के उद्घाटन के लिए आए थे और संगठन के धार्मिक सिद्धांतों के कारण महिलाओं की मौजूदगी को लेकर कुछ पाबंदियां लगाई गई थीं.
1960 के दशक में भी हुआ था मतभेद
इंडियन एक्सप्रेस की 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1960 के दशक के आखिर में हरिप्रसाद स्वामी और उनके कुछ अनुयायियों ने महिला शिष्यों को दीक्षा देने की इच्छा जताई थी. उस समय BAPS के गुरु योगी महाराज ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था. इसके बाद हरिप्रसाद स्वामी 1966 में BAPS से अलग हो गए और उन्होंने Sokhda sect की स्थापना की. यानी महिलाओं की धार्मिक भूमिका को लेकर BAPS से जुड़ा विवाद नया नहीं है, बल्कि कई दशक पुराना है.
2015 में किताब के लॉन्च को लेकर विवाद
साल 2015 में भी BAPS से जुड़ा एक मामला चर्चा में आया था. मामला पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की किताब Transcendence – My Spiritual Experience के Malayalam अनुवाद के लॉन्च से जुड़ा था. इस किताब का संबंध प्रमुख स्वामी महाराज के साथ उनके आध्यात्मिक अनुभवों से था.
किताब का अनुवाद करने वाली श्रीदेवी कार्था (Sreedevi Kartha) ने आरोप लगाया था कि उन्हें इवेंट में शामिल नहीं होने के लिए कहा गया था. इसके पीछे प्रमुख स्वामी के आश्रम की ओर से रखी गईं कुछ शर्तें थीं.
उन्होंने फेसबुक पर लिखे एक पोस्ट में दावा किया था कि जिस मंच पर स्वामी जी यानी आश्रम का प्रतिनिधित्व करने वाले संत बैठेंगे, वहां महिलाओं को मौजूद नहीं रहना था. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि इवेंट में आगे की तीन लाइन पुरुष सदस्यों के लिए रखी जानी थीं और महिलाओं को वहां बैठने की अनुमति नहीं थी.
इसके बाद विवाद बढ़ गया और इवेंट जिस जगह होना था उसके बाहर प्रदर्शन भी हुए थे. आखिरकार किताब का लॉन्च इवेंट रद्द कर दिया गया था. बाद में बुक्स मैनेजर केजे जॉनी ने कार्था से हुई परेशानी और उन्हें हुए मेंटल ट्रॉमा के लिए माफी मांगी थी.
2024 में कोलकाता में फिर उठा ऐसा ही मामला
साल 2024 में BAPS से जुड़े एक और कार्यक्रम में महिलाओं को लेकर विवाद सामने आया था. द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता में इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया यानी ICAI के एक इवेंट में आगे की सीटों पर बैठी कुछ महिलाओं को वहां से हटने के लिए कहा गया था.
ये इवेंट में BAPS से जुड़े धार्मिक नेता स्वामी ज्ञानवत्सल के भाषण से पहले हुआ था. इसका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें घोषणा करते हुए कहा गया कि सामने कोई महिला या लड़की दिखाई नहीं देनी चाहिए. इस घटना के बाद काफी विरोध हुआ. ICAI के अध्यक्ष रंजीत कुमार अग्रवात ने कहा था कि संस्था इस मामले की जांच करेगी और उचित कार्रवाई की जाएगी. ये मामला इसलिए भी खास था क्योंकि ये कोई धार्मिक इवेंट नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल कॉनफ्रेंस थी.
BAPS पर जबरन मजदूरी करवाने के आरोप भी लगे
BAPS सिर्फ महिलाओं से जुड़े विवादों की वजह से ही चर्चा में नहीं रहा है. अमेरिका में इसके एक बड़े मंदिर के निर्माण को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं.
साल 2021 में द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में न्यू जर्सी के रॉबिंसविले वाले मंदिर परिसर में काम करने वाले मजदूरों के बारे में आरोप लगाए गए थे. मजदूरों के वकीलों ने दावा किया था कि सैकड़ों भारतीय पुरुषों को धार्मिक कार्यकर्ता वीजा पर अमेरिका लाया गया था. इनमें कई लोग दलित समुदाय से थे.
आरोप था कि इन लोगों से मंदिर बनाने के लिए बहुत मुश्किम काम कराया गया और उन्हें करीब 1 डॉलर प्रति घंटे के हिसाब से पैसे दिए गए. मुकदमे के मुताबिक, ये मजदूर रोजाना करीब 13 घंटे काम करते थे. उन्हें मंदिर परिसर में बने ट्रेलरों में रखा गया था. आरोप है कि उनके पासपोर्ट भी ले लिए गए थे और उन्हें मंदिर में आने वाले लोगों से बात करने की अनुमति नहीं थी.
इस मामले की जांच के लिए FBI, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (US Department of Homeland Security) और श्रम विभाग (Department of Labor) के अधिकारियों ने मंदिर परिसर का दौरा किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, वहां से करीब 90 मजदूरों को हटाया गया था. मुकदमे में ये भी आरोप लगाया गया था कि मंदिर बनाने के लिए 200 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को काम पर लाया गया था.
हालांकि, BAPS ने इन सभी आरोपों से इनकार किया था. संगठन का कहना था कि ये सामान्य मजदूर नहीं थे, बल्कि मंदिर में हाथ से तराशे गए बारीक पत्थरों को लगाने वाले कुशल कारीगर थे. BAPS ने इन आरोपों को निराधार बताया था.
अब क्यों बढ़ गया एफिल टावर विवाद?
BAPS के लिए एफिल टावर का ये विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि संगठन अंतरराष्ट्रीय लेवल पर लगातार मशहूर हो रहा है और उसके भव्य मंदिर दुनिया भर में उसकी पहचान बन चुके हैं. लेकिन फ्रांस में महिलाओं को कथित तौर पर पीछे रखने की घटना ने धार्मिक परंपराओं और जेंडर इक्वैलिटी के बीच टकराव की बहस को फिर सामने ला दिया है.
एक तरफ BAPS अपने धार्मिक सिद्धांतों और परंपराओं के साथ काम करने वाला वैश्विक संगठन है, वहीं फ्रांस में सार्वजनिक संस्थानों और कार्यस्थलों पर महिलाओं और पुरुषों की समानता को बेहद अहम माना जाता है.
यही वजह है कि एक निजी धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के एफिल टावर दौरे से शुरू हुआ मामला अब धर्म, महिलाओं के अधिकार, कार्यस्थल की समानता और फ्रांस के कानून से जुड़ी बड़ी बहस में बदल गया है.
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