Vastu Upay: घर को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने के लिए लोग तरह-तरह के पौधे लगाते हैं . पौधे न सिर्फ घर की खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि वातावरण को भी ताजगी देते हैं . हालांकि, वास्तु शास्त्र में पौधों को लेकर कुछ विशेष मान्यताएं बताई गई हैं . माना जाता है कि पौधे तभी सकारात्मक प्रभाव देते हैं, जब वे स्वस्थ हों और उन्हें सही तरीके से रखा जाए . इसके विपरीत सूखे, खराब या कुछ विशेष प्रकार के पौधों को घर के अंदर रखने से बचने की सलाह दी जाती है .
अगर आपके घर में भी पौधे लगे हैं, तो एक बार उनकी स्थिति जरूर देख लें . कहीं ऐसा तो नहीं कि खूबसूरती बढ़ाने के चक्कर में आप ऐसे पौधे घर में रख रहे हैं, जिन्हें वास्तु की दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता .
1. सूखे या मुरझाए पौधे
घर में रखा पौधा अगर लंबे समय से सूख रहा है या उसकी पत्तियां लगातार मुरझा रही हैं, तो उसे यूं ही न छोड़ें . वास्तु मान्यताओं में सूखे और मृत पौधों को ठहरी हुई ऊर्जा से जोड़ा जाता है .
व्यावहारिक रूप से भी सूखे पौधे घर की साफ-सफाई और सुंदरता को प्रभावित करते हैं . इसलिए समय-समय पर पौधों की सूखी पत्तियां हटाते रहें . अगर पौधा पूरी तरह खराब हो चुका है, उसके दोबारा हरा होने की उम्मीद नहीं है, तो उसे हटा देना बेहतर है .
2. कांटेदार पौधे और कैक्टस
कैक्टस और दूसरे कांटेदार पौधों को लेकर वास्तु में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि कांटों वाले पौधे घर के वातावरण में तनाव या नकारात्मकता का प्रतीक बन सकते हैं . खासतौर पर इन्हें घर के मुख्य दरवाजे या रहने वाले कमरों में रखने से बचने की सलाह दी जाती है .
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर कांटेदार पौधा हर परिस्थिति में नुकसान करता है . पौधे की प्रजाति, जगह और उसकी देखभाल भी महत्वपूर्ण है .
3. दूधिया रस वाले पौधे
कुछ पौधों की टहनियां या पत्तियां तोड़ने पर सफेद या दूध जैसा रस निकलता है . यूफोरबिया जैसे कुछ पौधों में ऐसा रस पाया जाता है . वास्तु मान्यताओं में ऐसे पौधों को घर के अंदर रखने से बचने की बात कही जाती है .
इसके पीछे सिर्फ वास्तु की मान्यता ही नहीं, बल्कि सुरक्षा का पहलू भी महत्वपूर्ण है . कुछ पौधों का दूधिया रस त्वचा या आंखों में जलन पैदा कर सकता है . इसलिए ऐसे पौधों को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखना चाहिए .
4. दीवार पर फैलने वाली बेलें
घर की दीवारों पर तेजी से फैलने वाली बेलें देखने में आकर्षक लग सकती हैं, लेकिन वास्तु में इन्हें लेकर कुछ मान्यताएं हैं . माना जाता है कि दीवार पर बेतरतीब तरीके से फैलती बेलें घर में ठहराव या उलझन का प्रतीक बन सकती हैं .
इसके अलावा व्यावहारिक तौर पर भी दीवार से चिपकी बेलें नमी बढ़ा सकती हैं, पेंट खराब कर सकती हैं और कुछ स्थितियों में कीड़े-मकौड़ों की समस्या बढ़ा सकती हैं . अगर आपको बेल वाले पौधे पसंद हैं, तो उन्हें दीवार से अलग जाली या सपोर्ट देकर उगाना बेहतर विकल्प हो सकता है .
5. नकली या कृत्रिम पौधे
आजकल घर की सजावट के लिए प्लास्टिक और कपड़े से बने आर्टिफिशियल पौधों का खूब इस्तेमाल होता है . इन्हें पानी देने या धूप में रखने की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए इनकी देखभाल आसान होती है .
वास्तु की कुछ मान्यताओं में इन्हें प्राकृतिक हरियाली का विकल्प नहीं माना जाता . वहीं वास्तविक पौधों की तुलना में कृत्रिम पौधे हवा को शुद्ध करने जैसी प्राकृतिक भूमिका नहीं निभाते . इसलिए अगर घर में हरियाली चाहते हैं, तो ऐसे पौधे चुनें जिनकी देखभाल आपके घर की रोशनी और जगह के हिसाब से आसानी से हो सके .
गमले में जमा पानी और काई को न करें नजरअंदाज
सिर्फ पौधे का चुनाव ही जरूरी नहीं है, उसकी सफाई और देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है . गमले की ट्रे में लंबे समय तक पानी जमा रहने, मिट्टी में सड़न होने या पानी के फव्वारे में काई जमने से घर में बदबू और कीड़ों की समस्या हो सकती है .
वास्तु मान्यताओं में भी गंदगी, काई और सड़न को ठहराव से जोड़ा जाता है . इसलिए गमलों की नियमित सफाई करें, अतिरिक्त पानी निकालें और पौधों की सूखी पत्तियां समय पर हटाते रहें .
पौधा लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
घर के लिए पौधा चुनते समय केवल वास्तु ही नहीं, बल्कि उसकी जरूरतों को भी समझना जरूरी है . किस पौधे को कितनी धूप चाहिए, कितना पानी देना है, वह घर के अंदर या बाहर बेहतर तरीके से बढ़ेगा. इन बातों पर ध्यान दें .
वास्तु मान्यताओं के अनुसार स्वस्थ, हरे-भरे और अच्छी तरह देखभाल किए गए पौधे घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने वाले माने जाते हैं . वहीं सूखे, मृत या खराब स्थिति वाले पौधों को हटाना बेहतर माना जाता है .
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