ताले वाला महादेव मंदिर! भक्तों की मनोकामनाओं का अनूठा केंद्र है ये शिवालय

मंदिर परिसर की दीवारों, जालियों और आस-पास के हिस्सों पर लाखों ताले लगे हुए हैं. हर ताला किसी न किसी श्रद्धालु की आस्था, विश्वास और उम्मीद का प्रतीक है. कई श्रद्धालु ताले पर अपना नाम, पता या कोई विशेष पहचान भी लिखवाते हैं. ताकि मनोकामना पूर्ण होने पर वे अपने ताले को आसानी से पहचान सकें.

Advertisement
भगवान शिव के इस मंदिर में पूरे सावन आस्था का सैलाब उमड़ता है. (Photo: ITG) भगवान शिव के इस मंदिर में पूरे सावन आस्था का सैलाब उमड़ता है. (Photo: ITG)

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज,
  • 16 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST

प्रयागराज में भगवान शिव का एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जिसे श्रद्धालु नाथेश्वरनाथ महादेव मंदिर या 'ताले वाले महादेव मंदिर' के नाम से जानते हैं. यह मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना के साथ मंदिर परिसर में एक ताला लगाते हैं. मान्यता है कि भोलेनाथ उनकी प्रार्थना अवश्य सुनते हैं. इच्छा पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचकर उसी ताले को खोलते हैं और भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन-अर्चन करते हैं.

Advertisement

मंदिर परिसर की दीवारों, जालियों और आस-पास के हिस्सों पर लाखों ताले लगे हुए हैं. हर ताला किसी न किसी श्रद्धालु की आस्था, विश्वास और उम्मीद का प्रतीक है. कई श्रद्धालु ताले पर अपना नाम, पता या कोई विशेष पहचान भी लिखवाते हैं. ताकि मनोकामना पूर्ण होने पर वे अपने ताले को आसानी से पहचान सकें. श्रद्धालुओं का कहना है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भोलेनाथ की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी विश्वास के साथ हर दिन बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं और अपनी इच्छाओं का ताला लगाकर भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं.

सावन सोमवार पर उमड़ती है भीड़
मंदिर में प्रतिदिन रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन होता है. सावन के महीने, सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से गूंज उठता है. आस्था और विश्वास का यह अनोखा संगम नाथेश्वरनाथ महादेव मंदिर को प्रयागराज के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष पहचान दिलाता है.

Advertisement

यहां लगा हर ताला किसी न किसी भक्त की उम्मीद, विश्वास और भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा की कहानी बयां करता है. इस मंदिर में इतने ताले लग चुके हैं कि इन्हें निकालकर जगह खाली करनी पड़ती है और एक कमरे में पुराने ताले रखे गए हैं. यह काम हर कुछ दिनों के बाद निरंतर करना पड़ता है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को ताला लगाने की जगह मिल सके.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »