30 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो रहा है और इसका समापन 28 अगस्त को होगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सावन कुछ शुभ संयोगों के साथ आ रहा है. सावन के पहले दिन कई दुर्लभ और शुभ योग रहने वाले हैं, जिससे इस पवित्र महीने का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है. सावन के पहले दिन आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और श्रवण नक्षत्र का संयोग इस दिन को बेहद खास बना रहा है. आइए जानते हैं कि यह शुभ संयोग कब और कितने बजे रहने वाला है.
श्रवण नक्षत्र- 29 जुलाई को दोपहर 03 बजकर 37 मिनट से लेकर 30 जुलाई को शाम 05 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
आयुष्मान योग- 29 जुलाई को रात 11 बजकर 57 मिनट से 31 जुलाई को रात 12 बजकर 04 मिनट तक
सौभाग्य योग- 30 जुलाई को रात 12 बजकर 04 मिनट से 31 जुलाई को रात 11 बजकर 53 मिनट तक
शिव पूजा का शुभ समय
पूजा मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 28 मिनट से शाम 6 बजकर 21 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 07 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक
विजय मुहूर्त- शाम 4 बजकर 28 मिनट से शाम 5 बजकर 29 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- रात 9 बजकर 32 मिनट से रात 9 बजकर 50 मिनट तक
जलाभिषेक का ब्रह्म मुहूर्त क्या है?
सावन के पहले दिन शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ के भक्तों का बड़ा हुजूम जलाभिषेक के लिए पहुंचेगा. ऐसे में आपको बताते हैं कि पहले दिन जलाभिषेक करने का सबसे अच्छा मुहूर्त क्या रहने वाला है. हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को साधना, जप और पूजा के लिए सबसे पवित्र समय माना गया है. ऐसे में आप 30 जुलाई को शिवलिंग ब्रह्म मुहूर्त में जलाभिषेक करेंगे तो बहुत उत्तम होगा. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 बजे से 5:46 बजे तक रहेगा. इसके अलावा, आप आप सुबह 06:24 बजे से लेकर सुबह 08:08 बजे तक अमृत काल में भी जलाभिषेक कर सकते हैं.
शिव पूजन की ये खास बातें रखें याद
शिव आराधना शुरू करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना गया है. पूजा के दौरान या उसके बाद तांबे या पीतल के पात्र से शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए. मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा में केतकी का फूल और शंख का उपयोग नहीं किया जाता. वहींस, बिल्वपत्र चढ़ाते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर होना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से शिव पूजा अधिक फलदायी होती है.
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