Roti Vastu Tips: थाली में 3 रोटियां परोसना अशुभ? जानें इस दावे के पीछे की सच्चाई

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, भोजन को अन्नपूर्णा देवी का स्वरूप माना गया है. इसलिए रोटी या अन्न को सम्मानपूर्वक और संतुलित तरीके से ग्रहण करना शुभ माना जाता है. तीन रोटियों को एकसाथ थाली में रखना कुछ जगहों पर अशुभ संकेत से जोड़ा जाता है, जिसका अर्थ अतिथि या परिवार में संतुलन बिगड़ने या भोजन की अनदेखी से लगाया जाता है.

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कुछ लोक मान्यताओं में थाली में तीन रोटियां रखना अपूर्णता या अस्थिरता का संकेत माना जाता है. (Photo: ITG) कुछ लोक मान्यताओं में थाली में तीन रोटियां रखना अपूर्णता या अस्थिरता का संकेत माना जाता है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 19 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:31 PM IST

भारत में भोजन से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं सदियों से चली आ रही हैं जिनका संबंध केवल धार्मिक विश्वासों से ही नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवहार और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. इन्हीं में से एक मान्यता यह भी है कि थाली में एक साथ तीन रोटियां नहीं रखनी चाहिए. यह नियम खासकर उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में आज भी बुजुर्गों द्वारा पालन कराने की सलाह के रूप में देखा जाता है. इसके पीछे अलग-अलग स्तर पर सांस्कृतिक, प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कारण हैं.

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परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, भोजन को अन्नपूर्णा देवी का स्वरूप माना गया है. इसलिए रोटी या अन्न को सम्मानपूर्वक और संतुलित तरीके से ग्रहण करना शुभ माना जाता है. तीन रोटियों को एकसाथ थाली में रखना कुछ जगहों पर अशुभ संकेत से जोड़ा जाता है, जिसका अर्थ अतिथि या परिवार में संतुलन बिगड़ने या भोजन की अनदेखी से लगाया जाता है. यह विचार प्रतीकात्मक रूप से अनुशासन और संयम को दर्शाने के लिए विकसित हुआ है.

वहीं, कुछ लोक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि तीन रोटियां एक साथ रखना अपूर्णता या अस्थिरता का संकेत हो सकता है. व्यावहारिक दृष्टि से देखें तो इसका संबंध भोजन की आदतों और नियंत्रण से भी है. तीन रोटियां एक साथ लेने से कई बार व्यक्ति अपनी भूख का सही आकलन नहीं कर पाता और अधिक भोजन ले लेता है, जिससे अपच या भारीपन की समस्या हो सकती है. आयुर्वेद के अनुसार भी भोजन हमेशा संतुलित मात्रा में लेना चाहिए ताकि पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव न पड़े.

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भोजन से जुड़े नियमों का पालन मानसिक अनुशासन और खाने की आदतों को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया गया था. लेकिन आधुनिक समय में इन्हें कठोर नियम की तरह देखने के बजाए, संतुलन और समझदारी के संकेत के रूप में समझना अधिक उचित है. थाली में भोजन की मात्रा व्यक्ति की भूख, स्वास्थ्य और दिनचर्या के अनुसार तय होनी चाहिए.

भोजन के समय क्रोध और जल्दबाजी से नुकसान
भोजन से जुड़ी अन्य शुभ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि भोजन हमेशा शांत मन से करना चाहिए. वैज्ञानिक तौर पर भी यह सिद्ध हो चुका है शांत मन से किया गया भोजन आसानी से पचता है या शरीर को लगता है. भोजन शुरू करने से पहले भगवान या प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना जैसी मान्यताएं भोजन से पहले मन को शांत करने की प्रक्रिया है. वहीं भोजन के दौरान अत्यधिक बातचीत, क्रोध या जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है, जिससे आप शांत मन से भोजन ग्रहण कर सकें.

वास्तव में भोजन से जुड़े ये सभी नियम जीवन में अनुशासन, स्वच्छता और कृतज्ञता की भावना को विकसित करने के लिए बनाए गए थे. समय के साथ इनमें धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का रंग जुड़ता गया. आज के दौर में इन परंपराओं को अंधविश्वास के रूप में नहीं बल्कि जीवनशैली सुधार के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए.

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