Premanand Maharaj: खाना खाते समय टीवी-मोबाइल देखना सही या गलत? प्रेमानंद महाराज ने दिया उत्तर

Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज के मुताबिक, भोजन के समय अच्छा सुनना, अच्छा देखना और अच्छा सोचना चाहिए. यही अच्छे संस्कार की पहचान होती है. जब हम भोजन को श्रद्धा और भक्ति के साथ खाते हैं, तब वह हमारे शरीर, मन और जीवन तीनों को सकारात्मक बनाता है.

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खाना खाते वक्त ना करें ये गलती (Photo: ITG) खाना खाते वक्त ना करें ये गलती (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

Premanand Maharaj: मथुरा-वृंदावन के जाने माने बाबा प्रेमानंद महाराज लोगों के बीच में आजकल बहुत ही ज्यादा पॉपुलर हो रहे हैं. उनके भक्त सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं बल्कि विदेशों में भी हैं. वहीं, जाने माने एक्टर, नेता वगैरह भी प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. महाराज जी के पास जीवन से जुड़ी हर समस्या का समाधान होता है. हाल ही में प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने बताया कि भोजन करते समय टीवी व मोबाइल (TV-Mobile) देखना चाहिए या नहीं. 

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दरअसल, प्रेमानंद महाराज के मुताबिक, 'हमारा भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं होता है. जो अन्न हम खाते हैं, वह हमारे शरीर के साथ-साथ हमारे मन और संस्कारों पर भी बहुत गहरा असर डालता है. इसी कारण शास्त्रों में और संतों की वाणी में कहा गया है कि भोजन के समय अच्छे विचार, पवित्र नाम, और शुभ भाव रखने चाहिए. अगर हम भोजन करते समय गलत बातें सुनें, गलत दृश्य देखेंगे, या मन में बुरे विचार लाएंगे तो उसका सीधा असर हमारे स्वभाव पर भी पड़ेगा. इसलिए कहा जाता है कि जैसा हम भोजन के समय सोचते हैं, वैसा ही प्रभाव हमारे अंदर लंबे समय तक रहता है.'

खाना खाते वक्त मन रखें सकारात्मक

प्रेमानंद महाराज आगे कहते हैं कि, 'भोजन के समय मन बहुत कोमल और ग्रहणशील होता है. उस समय जो वातावरण होता है, वही हमारे अंदर उतर जाता है. यदि कोई व्यक्ति क्रोध, निंदा, ईर्ष्या, अशुद्ध बातों या तनाव के बीच भोजन करता है, तो उसका मन भी वैसा ही बन जाता है. दूसरी ओर यदि भोजन के समय भगवान का नाम, कीर्तन, जयकारा, स्मरण और पवित्र चर्चा हो, तो मन शांत रहता है. यही कारण है कि कई संत-मंडलियों में भोजन से पहले और भोजन के समय नाम-स्मरण किया जाता है.'

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'शास्त्रों में भी इस बात का जिक्र मिलता है कि भोजन करते समय प्रभु का स्मरण करना चाहिए. पहले अपने आराध्य देव को याद करें, फिर उनके नाम का जप करते हुए भोजन करें. कुछ लोग पानी पीते समय भी नाम लेते हैं, और मन में यही भाव रखते हैं कि यह अन्न और जल प्रभु का प्रसाद है. इससे भोजन केवल शरीर का पोषण नहीं रहता, बल्कि वह आत्मिक शांति और भक्ति का साधन बन जाता है.'

खाना खाते वक्त न करें ये गलती

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, 'आज के समय में लोग खाना खाते वक्त अपने एंटरटेनमेंट के लिए मोबाइल देखते हैं, टीवी पर अनावश्यक चीजें सुनते हैं, या इधर-उधर की बातें करते रहते हैं. इससे न तो भोजन ठीक से पचता है, न मन शांत रहता है. इसलिए, भोजन का समय बहुत खास होना चाहिए. उस समय वातावरण साफ, शांत और पवित्र रखना चाहिए.

हमें यह समझना चाहिए कि 24 घंटे की ऊर्जा हमारे शरीर में भोजन के माध्यम से जाती है. इसलिए, जो भाव भोजन के साथ जाएगा, वही हमारे जीवन पर असर डालेगा. अगर भोजन श्रद्धा, स्मरण और शांति से किया जाए, तो उसके अच्छे संस्कार बनते हैं. इसलिए भोजन के समय भजन, नाम-जप, जयघोष और भगवान का स्मरण करना एक बहुत अच्छा और लाभदायक अभ्यास है.

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